चंदा की चुदाई 5 (Chanda ki Chudai Part 5) (दो का मजा एक साथ)

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Chanda Ki Chudai Part 4

दोस्तो, मैं चंदा हूँ, केसी लगी मेरी कहानी। मेरी कहानी पढ़के कितनी बार हिलाया या उंगली की कमेन्ट मे जरूर बताना। अब आगे कहानी सुनो। उस रात घर लौटते हुए मेरे मन में इतनी उथल-पुथल मची हुई थी कि डर उत्तेजना और एक अजीब सी संतुष्टि का मिश्रण मेरे पूरे शरीर को अभी भी कंपकंपा रहा था जैसे कोई तूफान अंदर घूम रहा हो। हरिया लाल का चेहरा मेरी आँखों के सामने बार-बार घूम रहा था उसकी घनी दाढ़ी जो मेरी नाजुक गर्दन पर इतनी जोर से चुभ रही थी कि त्वचा लाल हो गई थी और उसका मोटा लं@ड जो मेरी चू@@त को इतना फैलाकर अंदर तक घुसा था कि हर धक्के में दर्द और मजा दोनों मिलकर एक हो गए थे साथ ही वो गर्म रस जो मेरे अंदर इतनी तेजी से बह गया था कि जाँघों से नीचे टपक रहा था सब कुछ इतना तीव्र और जीवंत था कि मैं बार-बार सोच रही थी क्या ये सब एक लंबा सपना था या कड़वी हकीकत लेकिन मेरी जाँघों पर चिपचिपा गीला रस साफ बता रहा था कि सब कुछ बिलकुल सच था और अब उसकी यादें मेरी रगों में दौड़ रही थीं। 



घर पहुँचकर मैं चुपके से अपने कमरे में घुसी जहां नानी के खर्राटे अभी भी कमरे में गूँज रहे थे लेकिन मेरी साँसें इतनी तेज और अनियमित थीं कि मुझे लगा कहीं वो जाग न जाएँ और सब कुछ पता चल जाए इसलिए मैंने बहुत धीरे से अपनी सलवार को ठीक किया जो अभी भी गीली और अस्त-व्यस्त थी फिर बिस्तर पर लेट गई लेकिन नींद तो जैसे कोसों दूर थी क्योंकि मन में हरिया की वो डरावनी धमकी बार-बार गूँज रही थी कि हर रात आना पड़ेगा वरना नाना को सब बता दूँगा और गाँव में बदनामी फैला दूँगा। मैं लगातार सोच रही थी कि मोन सिंह अंकल आखिर कहाँ थे क्यों नहीं आए क्या हरिया ने उन्हें किसी तरह रोक लिया या डरा दिया और अब मैं पूरी तरह फँस गई हूँ इस खतरनाक जाल में जहां से निकलना नामुमकिन लग रहा था लेकिन साथ ही मन के किसी कोने में एक अजीब सी चाहत और उत्सुकता जाग रही थी कि कल रात फिर क्या होगा क्या वो ही तीव्र मजा और दर्द का मिश्रण मिलेगा जो शरीर को झकझोर देगा।


अगली सुबह जब मैं उठी तो पूरे शरीर में एक गहरा दर्द फैला हुआ था जैसे हर मांसपेशी चीख रही हो और मेरी चू@@त अभी भी इतनी सूजी हुई लग रही थी कि चलने में भी तकलीफ हो रही थी हरिया का वो मोटा लं@ड याद आते ही पूरे शरीर में एक तेज सिहरन दौड़ गई जो पैरों से सिर तक फैल गई। मैंने नहाते हुए खुद को बहुत ध्यान से छुआ जहां पानी की बूंदें मेरी त्वचा पर गिर रही थीं और मैंने अपनी क्लि@ट पर उँगलियाँ फेरीं जो अभी भी संवेदनशील और सूजी हुई थी सोचते हुए कि कितना अलग और गहन था वो अनुभव जहां मोन सिंह अंकल का लं@ड पतला था लेकिन हरिया का इतना मोटा रूखा और ताकतवर कि दर्द के साथ मजा दोगुना हो गया था जैसे कोई आग और बर्फ का मिलन हो। दिन भर नानी के साथ घरेलू काम किया लेकिन मेरा मन कहीं और भटक रहा था जैसे कोई अदृश्य शक्ति मुझे खींच रही हो शाम को जब मैंने खेतों की ओर नजर डाली तो हरिया लाल नाना से बात कर रहा था और उसकी मुस्कान मेरी ओर देखकर इतनी शैतानी और लालची थी कि मेरी रीढ़ की हड्डी में ठंडक दौड़ गई मैंने फौरन नजरें झुका लीं और मन में सोचा कि आज रात क्या करूँ अगर न गई तो बात पूरे गाँव में फैल जाएगी बदनामी होगी नानी को पता चलेगा तो उनका दिल टूट जाएगा और नाना की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। शाम को मोन सिंह अंकल अचानक मिले उन्होंने बहुत धीरे से मेरे कान में कहा कि हरिया ने उन्हें बाहर रखा था और अब वो भी पूरी तरह मजबूर हैं लेकिन आज रात दोनों आएँगे मैं ये सुनकर इतनी चौंक गई कि दिल की धड़कन रुक सी गई लेकिन मन में एक नई उत्तेजना और जिज्ञासा जाग उठी कि दो आदमी एक साथ क्या होगा डर तो बहुत लग रहा था लेकिन शरीर खुद-ब-खुद गर्म हो रहा था चू@@त गीली होने लगी थी सिर्फ सोचकर ही जैसे कोई आग लग गई हो। मैंने बिना ज्यादा सोचे हाँ कर दी क्योंकि अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं बचा था और कहीं न कहीं मुझे ये खतरनाक रोमांच इतना पसंद आ रहा था कि लग रहा था जैसे कोई नई दुनिया मेरे सामने खुल रही हो जहां हर पल अनजान और उत्तेजक होगा।


रात हो गई और गाँव की सड़कें पूरी तरह सूनी हो चुकी थीं जहां चाँद की हल्की रोशनी गिर रही थी और पेड़ों की छाया इतनी लंबी खिंच रही थी कि लग रहा था जैसे कोई भूतिया आकृतियाँ हों मैं चुपके से घर से निकली जहां नानी सो रही थीं लेकिन आज उनका खर्राटा थोड़ा कम लग रहा था शायद मेरी कल्पना थी या डर की वजह से लेकिन बाहर की ठंडी हवा मेरी त्वचा पर सरसराती हुई ब्र@ा के नीचे मेरे निप्@पल्स को इतना सख्त कर रही थी कि दर्द होने लगा था। झोपड़ी की ओर जाते हुए सरसों के पौधे मेरी जाँघों से इतनी जोर से रगड़ खा रहे थे कि हर कदम पर एक गुदगुदी सी महसूस हो रही थी जैसे वो मेरी चू@@त को छेड़ रहे हों और मैंने सोचा कि आज रात क्या-क्या होगा दो लं@ड एक साथ क्या मैं इतना संभाल पाऊँगी लेकिन उत्साह और उत्तेजना इतनी ज्यादा थी कि मेरे कदम खुद-ब-खुद तेज हो गए जैसे कोई चुंबक मुझे खींच रहा हो। झोपड़ी पहुँचकर मैंने देखा कि दरवाजा हल्का सा खुला था और अंदर

हल्की रोशनी जल रही थी जहां बल्ब धुंधला सा जल रहा था मैं अंदर घुसी तो मोन सिंह अंकल और हरिया लाल दोनों बैठे हुए थे हरिया की आँखें इतनी लालची और भूखी लग रही थीं कि लग रहा था जैसे वो मुझे निगल जाएगा जबकि मोन सिंह का चेहरा उदास लेकिन उत्साहित भी था मैं रुक गई और मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि सुनाई दे रहा था लेकिन हरिया ने सख्त आवाज में कहा कि चुप रहो और मजा लो वरना सबको बता दूँगा मैंने सोचा कि अब क्या करूँ लेकिन मेरे शरीर ने खुद फैसला कर लिया और मैं अंदर आ गई दरवाजा बंद किया फिर दोनों की ओर देखा जहां मेरी साँसें इतनी तेज थीं कि मेरे ब्रेस्ट ऊपर-नीचे हो रहे थे जैसे वो खुद कह रहे हों कि छुओ मुझे और शुरू करो ये खेल।



हरिया सबसे पहले उठा और उसने मुझे कमर से इतनी जोर से पकड़ा कि मेरी सांस रुक गई फिर दीवार से सटा दिया उसके रूखे और खुरदुरे होंठ मेरे नरम होंठों पर इतनी जोर से दबे कि दर्द हुआ लेकिन जीभ अंदर घुसकर लड़ने लगी स्वाद बीड़ी और पसीने का था लेकिन गर्माहट इतनी थी कि मेरी जीभ खुद उससे लड़ने लगी मोन सिंह अंकल पीछे से आए और उन्होंने मेरी गर्दन पर नरम चुंबन किया जहां उनकी दाढ़ी नहीं थी इसलिए स्पर्श इतना नरम लेकिन उत्तेजक था कि मैं बीच में फँस गई दोनों तरफ से दबाव महसूस कर रही थी मेरी चू@@त गीली हो रही थी और रस टपकने लगा था जैसे कोई झरना बह रहा हो। हरिया ने मेरा कुर्ता ऊपर किया ब्र@ा को खोल दिया और मेरे बड़े ब्रेस्ट बाहर आ गए जहां निप्@पल्स इतने सख्त थे जैसे छोटे पत्थर हरिया ने एक को मुँह में लिया और जोर से चूसा दाँत से हल्का काटा जहां दर्द मीठा था मैं सिसकारी और कहा आह अंकल धीरे लेकिन मजा इतना आ रहा था कि रुकना नहीं चाहती थी मोन सिंह ने दूसरा ब्रेस्ट पकड़ा मसला और घुंडी को रगड़ा दोनों एक साथ मेरे ब्रेस्ट पर हमला कर रहे थे जैसे कोई युद्ध हो मैं आँखें बंद करके महसूस कर रही थी जैसे स्वर्ग में हूँ और मेरी कमर खुद उठ रही थी उत्तेजना से। फिर हरिया ने सलवार की डोरी खोली नीचे सरकाई और मैं पूरी तरह नंगी हो गई जहां चू@@त की झां@ट हल्की और गीली थी मुंह खुला क्लि@ट सूजा हुआ हरिया ने उँगलियाँ फेरीं क्लि@ट को रगड़ा मैं कमर हिलाई और कहा उंगली अंदर डालो उसने दो उँगलियाँ घुसीं जहां गर्म दीवारें सिकुड़ रही थीं स्पॉट को छुआ मैं काँप गई मोन सिंह ने पीछे से मेरी गा@ंड पर हाथ फेरा उँगली गा@ंड के छेद पर रगड़ी हल्का दबाव दिया मैं चौंकी लेकिन मजा आया जैसे कोई नई संवेदना जाग रही हो जो पहले कभी महसूस नहीं की थी।

फिर दोनों ने मुझे घास पर लिटाया जहां हरिया ने अपना मोटा लं@ड बाहर निकाला जो काला था नसें फूली हुईं सिरा गीला मोन सिंह का पतला लेकिन लंबा दोनों मेरे मुँह के पास लाए मैंने पहले हरिया का चूसा मुँह में भरा जीभ से चाटा स्वाद नमकीन पूर्व-रस टपका फिर मोन सिंह का नरम लेकिन सख्त मैं दोनों को बारी-बारी चूस रही थी जैसे कोई रोमांचक खेल चल रहा हो मेरी साँसें तेज मुँह में लं@ड का स्वाद मिश्रित हरिया ने कहा चूस अच्छे से मैं जोर से चूसी गले तक लिया गैग हुई लेकिन रुकी नहीं क्योंकि मजा दोगुना हो रहा था। फिर हरिया नीचे आया मेरी चू@@त पर लं@ड रखा धीरे धकेला चू@@त फैली दर्द हुआ लेकिन मीठा पूरा अंदर गया दीवारें कसकर पकड़ीं हरिया धक्के मारने लगा धीरे से तेज हर धक्के में चटकने की आवाज रस बह रहा था मोन सिंह मेरे मुँह में लं@ड डाला मैं चूस रही थी दोनों तरफ से भरी हुई जैसे पूरा शरीर उत्तेजित मैं कमर उठा रही थी चू@@त सिकुड़ रही थी हरिया के धक्के गहरे मोन सिंह के लं@ड को गले तक ले रही थी जैसे कोई लयबद्ध नृत्य हो। फिर उन्होंने पोजीशन बदली मोन सिंह नीचे लेटे मैं उनके ऊपर बैठी उनका लं@ड चू@@त में लिया ऊपर-नीचे हो रही थी ब्रेस्ट उछल रहे थे हरिया पीछे से आया मेरी गा@ंड पर लं@ड रगड़ा थूक लगाया धीरे से घुसाया दर्द तीव्र था मैं चीखी आह धीरे लेकिन धीरे-धीरे मजा आया दोनों लं@ड अंदर चू@@त और गा@ंड भरी हुई मैं बीच में काँप रही थी दोनों धक्के मार रहे थे सिंक्रोनाइज्ड हर धक्के में शरीर लहरा रहा था चू@@त का रस बह रहा था गा@ंड की दीवारें सिकुड़ रही थीं मैं चरम पर पहुँच रही थी आह आ रही हूँ दोनों ने स्पीड बढ़ाई हरिया का रस गा@ंड में फूटा गर्म बहाव मोन सिंह का चू@@त में मैं काँपती रही शरीर में लहरें दौड़ रही थीं जैसे बिजली का झटका आँखें बंद साँसें रुक सी गईं और वो पल अनंत लगा।

बाद में हम तीनों लेटे रहे जहां साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं लेकिन तभी बाहर से एक तेज आवाज आई जो नानी की थी वो जाग गई थीं और मुझे ढूँढ रही थीं शायद मेरी अनुपस्थिति महसूस कर ली थी वो झोपड़ी की ओर आईं और दरवाजा खोल दिया सब कुछ देख लिया मैं नंगी दोनों आदमी मेरे साथ नानी का चेहरा सफेद पड़ गया गुस्से से चीखीं क्या कर रही हो तू हरिया और मोन सिंह डर गए भागने लगे लेकिन नानी ने मुझे पकड़ा घर ले गईं रात भर रोईं कहा

कि तू शहर वाली है लेकिन ये क्या कर रही है नाना को बताऊँगी लेकिन सुबह नाना को पता चला तो उन्होंने फैसला किया कि चंदा को वापस शहर भेज दो किसी दूसरे शहर में जहाँ वो नई जिंदगी शुरू करे कोई कॉलेज जॉइन करे ये गाँव उसके लिए नहीं क्योंकि यहाँ खतरे बहुत हैं। मैं रोई लेकिन जानती थी कि अब यही सही है नानी ने मुझे ट्रेन में बिठाया एक नए शहर की ओर जहाँ मेरी नई कहानी शुरू होगी नए लोग नई उत्तेजनाएँ लेकिन ये राज हमेशा मेरे साथ रहेगा जैसे कोई गुप्त खजाना।

पाठकों अगर इस कहानी पर फेसबुक पर 1 हजार लाइक्स आए तो अगला भाग जरूर आएगा जहाँ मेरी नई जिंदगी की कहानी होगी जो और भी रोमांचक और गहन होगी। तो जल्दी से फेसबुक पर पोस्ट लाइक करे और शेयर करना न भूलना आपको चंदा की चू@@त की कसम 😄

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Chanda Ki Chudai Part 6