सावन की वह तूफानी रात थी, जब आसमान से पानी किसी झरने की तरह गिर रहा था और मीरा, जो अपने दफ्तर से काफी देर से निकली थी, सड़क के किनारे खड़ी होकर किसी सवारी का इंतज़ार कर रही थी, उसकी साड़ी बारिश के पानी से पूरी तरह भीग चुकी थी और उसके बदन से ऐसे चिपकी हुई थी जैसे दूसरी त्वचा हो, जिससे उसके शरीर के उ…
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