लाइब्रेरी की पुरानी किताबों की महक और बाहर छाई गहरी खामोशी के बीच मीरा और राघव एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे। मेज पर रखी लैंप की हल्की रोशनी मीरा के चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसके गोरे बदन की चमक और भी बढ़ गई थी। राघव की नजरें मीरा के कसते हुए ब्लाउज पर टिकी थीं, जहाँ उसके दोनों विशाल तरबूज बड़ी बेताबी से बाहर निकलने को छटपटा रहे थे। मीरा ने राघव की आँखों में देखा तो उसे अपनी साड़ी के अंदर एक अजीब सी सिहरन महसूस हुई, जैसे उसकी खाई में कोई मीठा दर्द सा उठा हो और वह खुद को राघव की बाहों में सौंपने के लिए पूरी तरह बेताब होने लगी थी।
राघव ने धीरे से आगे बढ़कर मीरा की कमर पर हाथ रखा, जिससे उसकी रेशमी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया और उसके उभरे हुए तरबूजों की गहराई साफ़ दिखने लगी। मीरा की साँसें तेज हो गईं और उसने अपनी आँखें मूँद लीं, क्योंकि उसे राघव के बढ़ते हुए हाथ की गर्मी अपनी त्वचा पर महसूस हो रही थी। राघव ने अपनी उंगलियों से मीरा के ब्लाउज के ऊपर ही उसके मटर जैसे निप्पलों को धीरे से सहलाया, जिससे मीरा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। वह राघव के करीब और खिंचती चली गई, उसका मन अब किसी भी तरह की झिझक को छोड़कर बस उस आने वाले सुखद एहसास की कल्पना में डूब चुका था।
राघव ने बड़ी नजाकत से मीरा के ब्लाउज के हुक खोले और जैसे ही कपड़ा हटा, उसके दोनों दूधिया सफेद तरबूज पूरी शान से राघव की आँखों के सामने आ गए। उन तरबूजों के बीच की गहरी लकीर और उनके ऊपर गुलाबी मटर की तरह खिले हुए हिस्से राघव को पागल कर रहे थे। राघव ने झुककर उन तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें बड़े प्यार से सहलाने लगा, जबकि मीरा ने उसके बालों में अपनी उंगलियां फँसा लीं। उसके पूरे शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई थी और उसकी खाई अब धीरे-धीरे गीली होने लगी थी, जैसे वह राघव के खीरे का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हो।
मीरा ने अब और सब्र न करते हुए राघव की पेंट की बेल्ट खोली और जैसे ही कपड़ा नीचे गिरा, राघव का विशाल और सख्त खीरा बाहर निकल आया। मीरा ने उस लम्बे और मोटे खीरे को अपने नाजुक हाथों में पकड़ा और उसकी गरमाहट महसूस करके दंग रह गई। उसने धीरे से अपना सिर नीचे झुकाया और राघव के उस गरम खीरे को अपने मुँह में ले लिया, उसका पूरा मुँह उस खीरे के अहसास से भर गया था। मीरा बड़े सलीके से उस खीरे को चूसने लगी, जिससे राघव के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं और वह मीरा के सिर को सहलाते हुए उसे इस सुख के सागर में और गहराई तक ले जाने लगा।
राघव ने अब मीरा को मेज पर लिटा दिया और उसकी साड़ी और पेटीकोट को पूरी तरह हटा दिया, जिससे मीरा की चौड़ी खाई और उसके आस-पास के काले घने बाल पूरी तरह उजागर हो गए। राघव ने नीचे झुककर अपनी जीभ से मीरा की खाई को चाटना शुरू किया, जिससे मीरा की पीठ मेज से ऊपर उठ गई। उसकी जीभ जब मीरा की उस तंग खाई के अंदर तक जाती, तो मीरा अपनी टांगें राघव के कंधों पर कस लेती। मीरा की पूरी देह अब पसीने से भीग चुकी थी और उसके मुँह से निकलने वाली आहें उस शांत लाइब्रेरी में गूँज रही थीं, मानो वह खुदाई के लिए पूरी तरह तैयार हो।
राघव अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था, उसने अपने सख्त खीरे को मीरा की रेशमी खाई के मुहाने पर टिकाया और एक झटके में सामने से खोदना शुरू किया। जैसे ही वह विशाल खीरा मीरा की तंग खाई के अंदर समाया, मीरा के मुँह से एक लंबी और दर्दभरी मगर सुखद चीख निकली। राघव ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और बड़े ही दमदार तरीके से खुदाई जारी रखी, हर धक्का मीरा के दिल की धड़कन को तेज कर रहा था। मीरा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और राघव की पकड़ उसके कूल्हों पर और भी मजबूत होती जा रही थी, जिससे कमरे में मांस से मांस टकराने की आवाजें गूँजने लगी थीं।
राघव ने अब मीरा को पलट दिया और उसे मेज पर झुकाकर पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, यह अंदाज मीरा को और भी अधिक उत्तेजित कर रहा था। जैसे-जैसे वह खीरा अंदर और बाहर हो रहा था, मीरा का पूरा बदन पसीने और वासना के रस से लथपथ हो गया था। "राघव, मुझे और जोर से खोदो, आज मुझे पूरी तरह अपना बना लो," मीरा ने सिसकते हुए कहा। राघव ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और हर धक्के के साथ वह मीरा की गहराई को और करीब से महसूस करने लगा। दोनों का शरीर अब एक लय में चल रहा था, जैसे कोई पवित्र लेकिन कामुक अनुष्ठान चल रहा हो।
अंत में, जब दोनों की चरम सीमा करीब आई, तो राघव की खुदाई और भी तेज और गहरी हो गई। मीरा का शरीर झटके खाने लगा और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा, ठीक उसी समय राघव के खीरे ने भी अपना सारा गरम रस मीरा की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए मेज पर ही गिर पड़े, उनकी साँसें उखड़ी हुई थीं और जिस्म पसीने से तर-बतर। उस रात की उस गहरी खुदाई के बाद मीरा का चेहरा सुकून और संतोष से दमक रहा था, जबकि राघव ने उसे चूमते हुए अपनी बाहों में कस लिया, जैसे वह लम्हा ताउम्र के लिए ठहर गया हो।