Mansi की रेशमी खाई और जीजू का रसीला खीरा--->
दोपहर की उस तपती खामोशी में जब पूरा घर किसी गहरी नींद के आगोश में डूबा हुआ था, समीर अपनी चारपाई पर लेटा छत के पंखे की धीमी रफ्तार को देख रहा था। समीर की शादी को छह साल बीत चुके थे, लेकिन उसकी साली मानसी, जो अब तेईस साल की एक खिलती हुई कली बन चुकी थी, हमेशा उसके मन के किसी कोने में दबे अरमानों को हवा देती रहती थी। मानसी का बदन किसी सजी हुई मूरत की तरह था, जिसके हर उभार में एक अजीब सी कशिश थी जो किसी भी पुरुष के मन में तूफ़ान खड़ा कर देने के लिए काफी थी। समीर के कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और मानसी हाथ में शरबत का गिलास लिए अंदर दाखिल हुई, उसकी रेशमी साड़ी के नीचे से उसके भारी और रसीले तरबूज हर कदम के साथ धीरे-धीरे हिल रहे थे।
समीर ने उसे देखा तो उसकी आँखों में एक चमक सी आ गई, क्योंकि मानसी की साड़ी का पल्लू उसके कंधे से थोड़ा सरक गया था जिससे उसके गोरे बदन की झलक साफ दिख रही थी। मानसी ने गिलास समीर की तरफ बढ़ाया और उसके पास ही बैठ गई, जिससे समीर को उसके शरीर की मखमली खुशबू आने लगी जो किसी मादक इत्र से कम नहीं थी। समीर की नजरें मानसी के उभरे हुए तरबूज पर टिक गईं, जिनके ऊपर बारीक मलमल के कपड़े से उसके छोटे-छोटे मटर साफ अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहे थे। मानसी ने समीर की नजरों को भांप लिया और एक हल्की सी मुस्कान के साथ अपनी नजरें झुका लीं, लेकिन उसने पल्लू ठीक करने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि समीर के और करीब हो गई।
समीर के शरीर में एक अजीब सी हलचल होने लगी थी और उसके पायजामे के नीचे उसका खीरा धीरे-धीरे अपनी पूरी लंबाई में अकड़ने लगा था, जिससे उसे एक मीठा सा दर्द महसूस हो रहा था। मानसी ने धीरे से समीर के हाथ पर अपना हाथ रखा और उसकी उंगलियों को सहलाने लगी, उसके इस पहले स्पर्श ने समीर के दिल की धड़कन को तेज कर दिया था और कमरे का तापमान जैसे अचानक से बढ़ गया। समीर ने हिम्मत जुटाकर मानसी की कमर के पास हाथ ले जाकर उसे अपनी ओर खींचा, जिससे उसके भारी तरबूज समीर के सीने से पूरी तरह सट गए और उन दोनों के बीच की दूरी लगभग खत्म हो गई। मानसी की सांसें तेज चलने लगी थीं और वह समीर की आँखों में देखते हुए एक गहरी आह भरने लगी, जैसे वह भी इस पल का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रही थी।
समीर ने अपने हाथ मानसी के रेशमी ब्लाउज के ऊपर रखे और धीरे-धीरे उसके तरबूजों को सहलाना शुरू किया, जो बहुत ही कोमल और गद्देदार महसूस हो रहे थे। मानसी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के गले में अपनी बाहें डाल दीं, जबकि समीर की उंगलियां अब उन नन्हे मटरों को ढूंढ रही थीं जो उत्तेजना के मारे अब काफी सख्त हो चुके थे। समीर ने मानसी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके बीच एक गहरा और रसीला मिलन शुरू हुआ, जिसमें वे एक-दूसरे की सांसों और स्वाद को पूरी तरह से सोख लेना चाहते थे। मानसी की साड़ी का पल्लू अब पूरी तरह नीचे गिर चुका था और समीर का हाथ उसके पेट की गहराई को छूते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा था जहाँ उसकी रेशमी खाई छिपी हुई थी।
मानसी ने एक सिसकी भरी जब समीर की उंगलियां उसकी खाई के बाहरी किनारों को सहलाने लगीं, जहाँ बारीक और मुलायम बाल उस पवित्र द्वार की रक्षा कर रहे थे। समीर ने महसूस किया कि मानसी की खाई अब काफी गीली और गर्म हो चुकी थी, जो इस बात का संकेत थी कि वह अंदर से पूरी तरह से तैयार है और किसी भी क्षण उस रस को छोड़ने वाली है। समीर ने धीरे से मानसी के कपड़े उतारना शुरू किया और देखते ही देखते वह अप्सरा उसके सामने पूरी तरह से प्राकृतिक रूप में मौजूद थी, जिसका हर अंग रोशनी में चमक रहा था। समीर का खीरा अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था और वह अपने पायजामे की कैद से बाहर आने के लिए जैसे छटपटा रहा था, जिसे देखकर मानसी की आँखों में भी एक अलग ही चमक आ गई थी।
मानसी ने अपने कोमल हाथों से समीर के खीरे को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी, उसकी चिकनाई और गरमाहट मानसी के हाथों को एक अलग ही आनंद दे रही थी। समीर ने मानसी को बेड पर सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को फैलाकर उस गहरी खाई का मुआयना करने लगा, जो गुलाबी पंखुड़ियों की तरह नजर आ रही थी और जिसमें से हल्का-हल्का रस रिस रहा था। समीर ने अपनी जीभ से मानसी की खाई को चाटना शुरू किया, जिससे मानसी के पूरे बदन में बिजली सी दौड़ गई और वह जोर-जोर से अपने कूल्हे समीर के चेहरे पर पटकने लगी। खाई चाटने का यह सिलसिला कुछ मिनटों तक चला, जिसके दौरान मानसी कई बार झड़ने के करीब आई और उसकी सिसकियां कमरे की खामोशी को चीरने लगीं।
समीर अब और इंतजार नहीं कर सकता था, उसने अपने भारी और लंबे खीरे को मानसी की खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाव बनाना शुरू किया ताकि वह अंदर समा सके। जैसे ही खीरे का सिरा उस तंग खाई के अंदर दाखिल हुआ, मानसी के मुंह से एक लंबी आह निकली और उसने समीर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए, क्योंकि वह तंगी उसे एक सुखद दर्द दे रही थी। समीर ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका पूरा खीरा मानसी की उस रेशमी खाई की गहराई में समा गया, जिससे मानसी की आँखें फटी की फटी रह गईं और उसे लगा जैसे उसका पूरा शरीर भर गया हो। समीर ने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को हिलाना शुरू किया और कमरे में उस गहरी खुदाई की आवाजें गूंजने लगीं, जो दोनों के जिस्मों के आपस में टकराने से पैदा हो रही थी।
मानसी अब समीर के साथ तालमेल बिठा रही थी और हर धक्के के साथ अपने पिछवाड़े को ऊपर की ओर उठा रही थी ताकि समीर का खीरा उसकी खाई के सबसे गहरे कोने तक पहुँच सके। समीर ने मानसी के दोनों तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें बुरी तरह मसलने लगा, जबकि उसके धक्के अब और भी तेज और दमदार होते जा रहे थे जिससे मानसी बेहाल होने लगी। 'जीजू... और तेज... मुझे पूरी तरह से खोदो... मुझे अपना बना लो,' मानसी ने उत्तेजना में चिल्लाते हुए समीर से कहा और समीर ने उसकी मांग पूरी करते हुए अपनी खुदाई की रफ्तार और बढ़ा दी। पसीने से लथपथ दोनों के बदन एक-दूसरे में इस तरह गुंथे हुए थे कि यह कहना मुश्किल था कि कहाँ एक शरीर खत्म हो रहा है और दूसरा शुरू हो रहा है।
समीर ने मानसी को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने वाली मुद्रा में कर दिया, जिससे उसका भारी पिछवाड़ा अब समीर के सामने था और उसकी खाई पूरी तरह से खुली हुई थी। समीर ने दोबारा अपना खीरा उस खाई में पीछे से डाला और पूरी ताकत के साथ धक्के मारने शुरू किए, जिससे मानसी के तरबूज हवा में किसी पेंडुलम की तरह झूलने लगे। मानसी अब अपने चरमोत्कर्ष के करीब थी, उसका पूरा बदन कांप रहा था और उसकी खाई के अंदर की मांसपेशियां समीर के खीरे को बुरी तरह जकड़ रही थीं जैसे उसे कभी छोड़ना न चाहती हों। समीर को भी महसूस हुआ कि उसका रस अब छूटने वाला है, उसने आखिरी कुछ जोरदार और गहरे धक्के मारे और मानसी की खाई के भीतर ही अपना सारा गर्म रस छोड़ दिया।
मानसी का भी रस उसी समय पूरी तरह से निकल गया और वह बेदम होकर बिस्तर पर गिर पड़ी, उसका पूरा शरीर एक अजीब सी संतुष्टि और थकान से भारी हो चुका था। समीर भी उसके बगल में लेट गया और दोनों की सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उनके चेहरों पर एक ऐसी खुशी थी जो केवल इस तरह के मिलन के बाद ही मिल सकती है। कमरे में अब भी उस खुदाई की गंध और प्रेम का एहसास हवा में तैर रहा था, और मानसी ने मुस्कुराते हुए समीर का हाथ थाम लिया, यह जानते हुए कि अब उनके बीच का रिश्ता पहले जैसा कभी नहीं रहेगा। उस दोपहर की खामोशी में उन दोनों ने एक नई दुनिया खोज ली थी, जहाँ सिर्फ जिस्मों की प्यास और रूह का सुकून था, जिसे वे अब हमेशा के लिए सहेज कर रखना चाहते थे।