रोहन अपने फ्लैट में पिछले छह महीनों से अकेला रह रहा था, लेकिन उसके बगल वाले फ्लैट में रहने वाली मीरा भाभी हमेशा से उसके आकर्षण का केंद्र रही थीं। मीरा भाभी का व्यक्तित्व बहुत ही शांत और मिलनसार था, लेकिन उनकी आंखों में एक अजीब सी तन्हाई हमेशा झलकती थी जो रोहन को बार-बार उनकी ओर खींचती थी। आज दोपहर जब रोहन ने उनके दरवाजे की घंटी बजाई, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए उसे अंदर बुला लिया क्योंकि उनके पति शहर से बाहर गए हुए थे। रोहन ने ध्यान दिया कि उन्होंने एक हल्की रेशमी साड़ी पहनी थी, जो उनके शरीर के ढलते हुए उभारों को बहुत ही खूबसूरती से बयान कर रही थी, जिससे कमरे के भीतर के माहौल में एक विशेष कामुक गर्माहट धीरे-धीरे घुलने लगी थी।
मीरा भाभी की काया किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह सुडौल थी, और उनके साड़ी के पल्लू से झांकते हुए उनके दोनों विशाल और रसीले तरबूज रोहन की धड़कनों को बेकाबू कर रहे थे। जब वह चाय बनाने के लिए रसोई की तरफ मुड़ीं, तो उनके भारी और गोल पिछवाड़े का हिलोरा लेना रोहन की नजरों से ओझल नहीं हो सका, और वह बस वहीं सोफे पर बैठा उन्हें मंत्रमुग्ध होकर निहारता ही रह गया। साड़ी के पतले कपड़े से उनके तरबूजों के बीचों-बीच मौजूद नन्हे मटर साफ उभर कर दिखाई दे रहे थे, जैसे वह भी इस तन्हाई में किसी स्पर्श के लिए बेताब हों। रोहन के मन में बार-बार यही तीव्र इच्छा उठ रही थी कि काश वह इन बेहद नरम और भारी चीजों को अपने हाथों में भरकर उनकी कोमलता को महसूस कर सके।
बातों-बातों में मीरा भाभी रोहन के करीब आकर बैठ गईं, और उनकी बातों में छिपे दर्द ने रोहन को भावनात्मक रूप से उनसे जोड़ दिया, जिससे दोनों के बीच एक अनकहा जुड़ाव महसूस होने लगा। मीरा ने बताया कि उनके पति उन्हें समय नहीं देते और वह इस बड़े घर में खुद को बहुत अकेला और अधूरा महसूस करती हैं, यह कहते हुए उनकी आंखों में नमी आ गई। रोहन ने सहानुभूति जताने के बहाने अपना हाथ धीरे से उनके कंधे पर रखा, तो उसे मीरा के शरीर की तपिश का एहसास हुआ जो उसके पोरों में बिजली की तरह दौड़ गई। उस एक पल के स्पर्श ने दोनों के बीच जमी हिचकिचाहट की बर्फ को पिघला दिया और वातावरण में एक अनकही प्यास और गहरी कामुकता का संचार कर दिया।
रोहन का हाथ धीरे से खिसकते हुए उनके रेशमी तरबूज के ऊपर पहुंच गया, और मीरा ने अपनी आंखें बंद कर लीं जैसे वह इसी स्पर्श का सदियों से इंतजार कर रही थीं। रोहन ने अपनी उंगलियों से उनके तरबूज को हल्के से दबाया, तो मीरा के मुंह से एक दबी हुई आह निकल गई जो रोहन के उत्साह को और ज्यादा बढ़ाने लगी थी। उसने देखा कि मीरा के शरीर में एक कंपन हो रहा था, और उनके चेहरे पर एक अजीब सी लाली छा गई थी जो उनकी दबी हुई इच्छाओं को जगजाहिर कर रही थी। रोहन ने अब अपने दूसरे हाथ से उनके चेहरे को अपनी तरफ मोड़ा और धीरे से उनके होंठों का रस पीना शुरू कर दिया, जिससे मीरा का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया।
मीरा की सांसें तेज हो गई थीं, और उन्होंने रोहन के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं, जिससे रोहन को यह स्पष्ट संकेत मिल गया कि वह भी अब आगे बढ़ना चाहती हैं। रोहन ने धीरे से उनकी साड़ी के पल्लू को कंधे से नीचे गिरा दिया, जिससे उनके विशाल तरबूज अब पूरी तरह से आजाद होकर उसकी आंखों के सामने नाचने लगे थे। उसने झुककर उनके एक मटर को अपने मुंह में भर लिया और उसे जीभ से सहलाने लगा, जबकि मीरा का हाथ रोहन की पैंट के ऊपर उभरते हुए उसके सख्त खीरे को टटोलने लगा था। मीरा की इस प्रतिक्रिया ने रोहन के भीतर की आग को और भड़का दिया, और वह अब बिना किसी देरी के उनके पूरे शरीर को चखने के लिए व्याकुल होने लगा था।
रोहन ने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतार दिए और अब मीरा उसके सामने पूरी तरह से अपनी प्राकृतिक सुंदरता में मौजूद थीं, उनके शरीर पर घने और काले बाल उस गुप्त स्थान के पास एक रहस्यमयी खाई की रक्षा कर रहे थे। रोहन ने झुककर उस गहरी खाई को निहारना शुरू किया और अपनी जीभ से उस खाई के किनारों को चाटना शुरू कर दिया, जिससे मीरा के पैरों के बीच से रस बहने लगा था। वह बिस्तर पर छटपटा रही थी और रोहन का सिर पकड़कर अपनी खाई में और गहराई से धकेल रही थी, क्योंकि वह उस उंगली से खोदने के सुख को और बढ़ाना चाहती थी। रोहन ने अपनी दो उंगलियों को उस गीली खाई में गहराई तक उतारा, जिससे मीरा की आहें अब चीखों में बदलने लगी थीं और वह रोहन के खीरे की मांग करने लगी थी।
अब समय आ गया था उस असली खेल का, रोहन ने अपने विशाल और कड़े खीरे को निकाला और उसे मीरा की उस रसीली और गरम खाई के मुहाने पर टिका दिया, जो स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार थी। उसने एक जोरदार धक्का लगाया और उसका पूरा खीरा मीरा की खाई की गहराइयों में समा गया, जिससे मीरा की आंखों से सुख के आंसू छलक पड़े और उन्होंने उसे कसकर पकड़ लिया। रोहन ने अब सामने से खोदना शुरू किया, और हर धक्के के साथ मीरा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे, जो एक अद्भुत दृश्य पेश कर रहे थे। कमरे में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाज और मीरा की उत्तेजित कराहें गूंज रही थीं, जो इस खुदाई की तीव्रता को और बढ़ा रही थीं।
रोहन ने अब मीरा को बिस्तर पर उल्टा लिटा दिया और उनके भारी पिछवाड़े को हवा में उठाकर पीछे से खोदना शुरू किया, जो मीरा के लिए एक नया और अधिक तीव्र अनुभव था। हर प्रहार मीरा की आत्मा तक पहुंच रहा था, और वह बार-बार 'और जोर से रोहन, मुझे पूरी तरह खोद दो' जैसे शब्दों से उसे उकसा रही थी, जिससे रोहन की गति और बल बढ़ता जा रहा था। इस गहरी खुदाई ने मीरा के भीतर दबी बरसों की प्यास को शांत करना शुरू कर दिया था, और वह अब पूरी तरह से रोहन के वश में होकर उस चरम सुख की ओर बढ़ रही थी। उनके शरीरों से निकलने वाला पसीना अब एक-दूसरे में मिल चुका था, जिससे घर्षण और भी अधिक कामुक और आनंददायक होता जा रहा था।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद, दोनों ही अपने चरम सीमा पर पहुंच चुके थे, रोहन का खीरा अब पूरी तरह से फटने को तैयार था और मीरा की खाई भी रस छोड़ने के लिए बेकरार थी। रोहन ने आखिरी कुछ बहुत तेज और गहरे धक्के लगाए, और देखते ही देखते उसके खीरे से गरम रस की धारा फूट पड़ी जो मीरा की खाई की गहराइयों को तृप्त कर गई। ठीक उसी पल मीरा का भी पूरा बदन बुरी तरह से कांपने लगा और उनका अपना रस भी बाहर निकल आया, जिससे दोनों एक-दूसरे में सिमट कर बिस्तर पर गिर पड़े। उस पल की शांति में केवल उनकी उखड़ी हुई सांसें सुनाई दे रही थीं, जो एक बहुत ही गहरी और संतुष्ट कर देने वाली खुदाई की गवाह बन रही थीं।
खुदाई के बाद की वह स्थिति बहुत ही सुकून देने वाली थी, मीरा रोहन की छाती पर सिर रखकर लेटी हुई थी और रोहन उनके बिखरे बालों को सहला रहा था, उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। दोनों के बीच की वह तन्हाई अब एक गहरे शारीरिक और मानसिक जुड़ाव में बदल चुकी थी, जिसने उन्हें एक-दूसरे के और करीब ला दिया था। मीरा ने रोहन के कान में फुसफुसाते हुए कहा कि आज उन्हें पहली बार अपनी स्त्री होने का असली सुख मिला है, जिसे सुनकर रोहन ने उन्हें और जोर से गले लगा लिया। वह दोपहर अब ढल चुकी थी, लेकिन उनके बीच जो आग जली थी, वह भविष्य में भी ऐसी ही कई खुदाई की कहानियों को जन्म देने का वादा कर रही थी।