रोहन अपने फ्लैट में पिछले दो साल से रह रहा था और उसकी बगल वाली दीवार के पार मीना भाभी का संसार बसता था। मीना भाभी की उम्र करीब तीस साल रही होगी, लेकिन उनका यौवन किसी ढलती शाम की तरह नहीं बल्कि दोपहर की तपती धूप की तरह था जो किसी को भी अपनी गर्मी से पिघला दे। रोहन अक्सर खिड़की से उन्हें देखता रहता था, उनकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो उसके मन के भीतर हलचल मचा देती थी। वे जब भी छत पर कपड़े सुखाने आतीं, तो उनके रेशमी बालों का उड़ना और उनके बदन की सुडौल बनावट रोहन की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी थी।
मीना भाभी के शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उन्हें एक बार देख ले तो नजरें हटाना मुश्किल हो जाता था। उनके सफेद कुर्ते के नीचे से झलकते उनके गोल और पुष्ट तरबूज जब भी हिलते, तो रोहन के दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं। उन तरबूजों के बीच की जो गहरी घाटी थी, वह किसी को भी अपने भीतर समा लेने का आमंत्रण देती लगती थी। भाभी का पिछवाड़ा इतना भारी और मांसल था कि जब वह चलती थीं, तो उस हिस्से की थिरकन रोहन के भीतर एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर देती थी। उनके अंगों का उभार और उनकी त्वचा की चमक उन्हें एक साक्षात अप्सरा बनाती थी।
एक शाम जब पूरे मोहल्ले में बिजली गुल थी, रोहन ने देखा कि भाभी अपने दरवाजे पर खड़ी होकर हवा ले रही थीं। उनके पति शहर से बाहर गए हुए थे और घर में वह बिल्कुल अकेली थीं। रोहन ने पास जाकर हाल-चाल पूछा तो भाभी ने उसे अंदर आकर बैठने को कहा क्योंकि बाहर बहुत उमस थी। कमरे के भीतर मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में भाभी का चेहरा और भी ज्यादा कामुक लग रहा था। उनके चेहरे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं जो उनके गर्दन से होते हुए उनके तरबूजों की गहराई में जाकर छिप रही थीं।
बातें करते-करते रोहन का ध्यान बार-बार उनके शरीर के उतार-चढ़ाव पर जा रहा था और भाभी भी शायद इस बात को महसूस कर रही थीं। उन्होंने जानबूझकर अपने पल्लू को थोड़ा ढीला कर दिया जिससे उनके पुष्ट तरबूज और उन पर उभरे हुए छोटे-छोटे मटर साफ नजर आने लगे। रोहन की सांसें भारी होने लगीं और उसके शरीर के निचले हिस्से में बैठा खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने लगा। भाभी ने जब रोहन की आंखों में वह प्यास देखी, तो उन्होंने अपनी नजरें नहीं झुकाईं बल्कि एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ उसकी ओर हाथ बढ़ा दिया।
रोहन ने कांपते हाथों से भाभी की मखमली हथेली को पकड़ा और उन्हें अपनी ओर खींचा। जैसे ही भाभी का कोमल शरीर रोहन के सीने से टकराया, एक बिजली सी दोनों के शरीर में दौड़ गई। रोहन ने अपनी उंगलियां भाभी की कमर के निचले हिस्से यानी उनके भारी पिछवाड़े पर रखीं और धीरे से सहलाने लगा। भाभी के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उन्होंने अपने हाथ रोहन के बालों में फंसा दिए। रोहन ने झुककर भाभी के होठों का रस पीना शुरू किया और धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उनके मखमली तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया।
भाभी ने अपनी आँखें बंद कर लीं जब रोहन ने उनके तरबूजों के ऊपर मौजूद मटर को अपनी जीभ से सहलाना शुरू किया। उनके बदन में एक सिहरन दौड़ रही थी और उनकी सांसें तेज चलने लगी थीं। रोहन ने धीरे-धीरे भाभी के सारे कपड़े उतार दिए और अब वह पूरी तरह से प्राकृतिक अवस्था में उसके सामने थीं। उनके घने बालों के नीचे छिपी हुई गहरी और गीली खाई अब रोहन के सामने थी, जिससे एक भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी। रोहन ने अपनी उंगलियों से उस खाई को टटोलना शुरू किया और पाया कि वह पहले से ही काफी रसीली हो चुकी थी।
रोहन ने अपने खीरे को बाहर निकाला जो अब पूरी तरह से सख्त और खुदाई के लिए तैयार हो चुका था। भाभी ने जब उस लंबे और मोटे खीरे को देखा तो उनकी आँखें फटी रह गईं और उन्होंने उसे अपने हाथों में लेकर सहलाना शुरू किया। रोहन ने भाभी को बिस्तर पर लेटाया और उनके दोनों पैरों को फैलाकर उस गहरी खाई के मुहाने पर अपना खीरा टिका दिया। भाभी ने रोहन को अपनी बाहों में कस लिया और उसे आगे बढ़ने का इशारा किया। रोहन ने एक गहरे दबाव के साथ अपने खीरे को उस तंग खाई के भीतर धकेलना शुरू किया।
जैसे ही खीरा पूरी तरह से भीतर समाया, भाभी के मुंह से एक लंबी आह निकली और उन्होंने रोहन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। रोहन ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और खुदाई का वह सिलसिला शुरू हुआ जिसका दोनों को लंबे समय से इंतजार था। हर धक्के के साथ रोहन का खीरा भाभी की गहराई को नाप रहा था और भाभी अपने पिछवाड़े को ऊपर उठाकर उसका साथ दे रही थीं। कमरे में शरीर के टकराने की आवाजें गूंजने लगीं और दोनों पूरी तरह से उस आनंद के सागर में डूब गए।
खुदाई की प्रक्रिया अब और भी तेज हो गई थी, रोहन ने भाभी को उल्टा किया और उनके भारी पिछवाड़े की तरफ से खुदाई शुरू की। यह स्थिति भाभी को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी, वह तकिए में अपना मुंह छिपाकर कराह रही थीं। रोहन ने उनके तरबूजों को पीछे से पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू किया। कुछ ही मिनटों के बाद दोनों का शरीर कांपने लगा और भाभी के भीतर से एक गर्म रस छूटा, जिसके तुरंत बाद रोहन के खीरे ने भी अपना सारा रस भाभी की खाई की गहराइयों में उड़ेल दिया।
खुदाई खत्म होने के बाद दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। भाभी का चेहरा सुकून और थकान के मिश्रण से चमक रहा था। रोहन ने उनके माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में और भी कस लिया। उस रात उस कमरे की खामोशी में सिर्फ उनकी थमी हुई सांसों की आवाज थी, जो एक नए रिश्ते की शुरुआत की गवाह थी। रोहन को महसूस हुआ कि यह सिर्फ शरीर का मिलन नहीं था, बल्कि दो प्यासी रूहों की तृप्ति थी जो अब हमेशा के लिए एक-दूसरे के करीब आ चुकी थीं।