संजना भाभी की छत पर खुदाई


गर्मियों की वह उमस भरी रात आज भी आर्यन की यादों में ताज़ा है, जब पूरे मोहल्ले की बिजली गुल हो गई थी। संजना भाभी, जो आर्यन के बगल वाले घर में रहती थीं, गर्मी से राहत पाने के लिए अपनी छत पर टहल रही थीं। संजना भाभी की उम्र करीब तीस साल रही होगी, लेकिन उनके शरीर की बनावट किसी कली जैसी खिली हुई थी। उनके रेशमी बदन के घुमाव और उनके उन्नत तरबूज उनकी ढीली नाइटी के नीचे से अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे। आर्यन ने जैसे ही उन्हें अंधेरे में देखा, उसके दिल की धड़कनें तेज हो गईं और वह भी धीरे से अपनी छत की मुंडेर के पास जाकर खड़ा हो गया।

संजना भाभी का व्यक्तित्व बहुत ही शांत और भावुक था, लेकिन उनके अकेलेपन की गूँज आर्यन अक्सर उनकी आँखों में पढ़ लेता था। उनके पति अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहर से बाहर रहते थे, जिससे भाभी का यौवन जैसे किसी प्यासे पंछी की तरह तड़पता रहता था। उस रात चाँद की मद्धम रोशनी में उनका चेहरा गुलाब की पंखुड़ी जैसा कोमल लग रहा था। उनके शरीर से उठती सोंधी खुशबू आर्यन की नाक तक पहुँच रही थी, जो उसके भीतर की दबी हुई इच्छाओं को जगाने के लिए काफी थी। दोनों के बीच अक्सर छोटी-मोटी बातें होती थीं, लेकिन उस रात की खामोशी में एक अजीब सा आकर्षण और खिंचाव था।

आर्यन ने हिम्मत जुटाकर भाभी से पूछा, 'भाभी, इतनी गर्मी में नींद नहीं आ रही क्या?' संजना ने गहरी आह भरी और मुड़कर आर्यन की ओर देखा, उनके चेहरे पर एक मद्धम मुस्कान तैर गई। उन्होंने धीरे से कहा, 'नींद कहाँ आर्यन, ये बेचैनी और ये गर्मी चैन ही नहीं लेने देती।' उनकी आवाज़ में एक कंपन था, जो आर्यन के कानों में शहद की तरह घुल गया। बातों-बातों में आर्यन अपनी छत से कूदकर भाभी की छत पर पहुँच गया, दोनों के बीच की दूरी कम होने लगी थी। भाभी ने उसे रोका नहीं, बल्कि उनकी नज़रों में एक तरह की रजामंदी और गहरी प्यास साफ़ झलक रही थी।

जैसे ही आर्यन उनके पास पहुँचा, उसने धीरे से भाभी के कंधे पर हाथ रखा, उनके जिस्म की गरमाहट ने आर्यन के हाथ में एक बिजली सी दौड़ा दी। भाभी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी साँस ली, जिससे उनके सीने पर सजे दोनों तरबूज ऊपर-नीचे होने लगे। आर्यन की उंगलियाँ धीरे-धीरे सरकते हुए उनकी नाइटी के पतले कपड़े के ऊपर से ही उनके मटर को सहलाने लगीं। संजना के मुँह से एक दबी हुई कराह निकली, 'आर्यन... ये क्या कर रहे हो?' पर उनके शरीर का झुकाव आर्यन की ओर ही था, जो साफ़ बता रहा था कि वह इस स्पर्श के लिए कब से तरस रही थीं।

आर्यन ने धीरे से उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और उनके चेहरे को चूमने लगा, उनकी कोमल त्वचा का स्वाद किसी मलाई जैसा था। उसने धीरे से भाभी की नाइटी के बटन खोले, और चाँदनी रात में उनके सफेद और गोल तरबूज बाहर छलक आए। आर्यन ने अपनी जुबान से उनके मटर को सहलाना शुरू किया, तो भाभी की पकड़ आर्यन की पीठ पर और भी मजबूत हो गई। वह धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा, भाभी की खाई की नमी अब आर्यन के सब्र का बांध तोड़ रही थी। भाभी ने सिसकते हुए कहा, 'आज मुझे अपनी बना दो आर्यन, इस प्यास को बुझा दो।'

आर्यन ने भाभी को छत पर बिछी एक चटाई पर लेटा दिया और उनकी खाई के पास उगे घने बालों को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। भाभी की खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, जैसे कोई सोता फूट पड़ा हो। आर्यन ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो भाभी अपनी कमर ऊपर उठाकर हवा में लहराने लगीं। उनकी आवाज़ अब और भी बुलंद हो गई थी, 'आह आर्यन... और तेज़... बहुत अच्छा लग रहा है।' आर्यन ने अब अपना सख्त और लंबा खीरा बाहर निकाला, जिसे देखते ही भाभी की आँखें फटी की फटी रह गई और उन्होंने धीरे से उसे अपने मुँह में ले लिया।

खीरा चूसने की प्रक्रिया इतनी सुखद थी कि आर्यन का शरीर कांपने लगा था, भाभी की जुबान उस खीरे पर किसी रेशमी धागे की तरह लिपट रही थी। कुछ देर बाद, आर्यन ने भाभी की टांगों को फैलाया और उनकी गहरी खाई के मुहाने पर अपना खीरा टिका दिया। उसने एक झटके के साथ सामने से खोदना शुरू किया, तो भाभी के मुँह से एक चीख निकलते-निकलते रह गई। संजना भाभी ने आर्यन के गले में अपनी बाहें डाल दीं और कहने लगीं, 'हाँ आर्यन... इसी तरह... मुझे पूरा खोद दो... मेरी गहराई तक जाओ।' खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी, हर धक्के के साथ भाभी का पूरा शरीर हिल रहा था।

थोड़ी देर बाद आर्यन ने भाभी को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया, भाभी ने अपने दोनों हाथ जमीन पर टिका दिए और उनका पिछवाड़ा ऊपर उठ गया। आर्यन ने पीछे से अपने खीरे को उनकी खाई में उतारा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। छत पर केवल उन दोनों की साँसों की आवाज़ और खुदाई की गूँज सुनाई दे रही थी। भाभी के तरबूज नीचे लटक रहे थे और आर्यन उन्हें अपने हाथों से मसल रहा था। अंत में, दोनों का चरम स्तर पास आ गया, और एक ज़ोरदार धक्के के साथ आर्यन का सारा रस भाभी की गहराई में निकल गया और भाभी का भी रस छूट गया।

खुदाई के बाद दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे की बाहों में लेट गए, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। संजना भाभी के चेहरे पर एक असीम संतोष और शांति थी, जैसे सदियों की प्यास बुझ गई हो। उन्होंने आर्यन के माथे को चूमा और धीरे से कहा, 'तुमने आज मुझे सच में जीवित कर दिया।' आर्यन ने भी उन्हें कसकर गले लगा लिया, उस रात के उस मिलन ने उनके बीच एक ऐसा रिश्ता बना दिया था जिसकी मिठास ताउम्र रहने वाली थी। वह रात केवल जिस्मानी भूख की नहीं, बल्कि दो रूहों के एक होने की गवाह बनी थी।