नयी पड़ोसन और रात की गर्म खुदाई


रोहन पिछले दो साल से अपनी पड़ोसन मीरा भाभी को चुपके-चुपके देख रहा था, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई कि उनसे बात कर सके। मीरा भाभी का शरीर किसी पके हुए रसीले फल की तरह था, जिसकी चमक दूर से ही किसी को भी अपना दीवाना बना सकती थी। उनके चेहरे पर हमेशा एक हल्की सी मुस्कान रहती थी जो रोहन के दिल की धड़कनें बढ़ा देती थी। उस रात जब तेज हवाएं चल रही थीं, रोहन ने देखा कि मीरा भाभी अपने घर की छत पर कपड़े समेट रही थीं और उनकी साड़ी हवा में बार-बार लहराकर उनके अंगों की बनावट को साफ दिखा रही थी। उनके शरीर का हर मोड़ और हर उभार रोहन के मन में हलचल पैदा कर रहा था।

जब रोहन छत पर गया, तो उसने देखा कि मीरा भाभी के कंधे से पल्लू फिसल गया था और उनके भरे हुए तरबूज ब्लाउज के अंदर से बाहर झांकने को बेताब थे। उनके तरबूजों की गोलाई इतनी मोहक थी कि रोहन की नजरें वहीं जम गईं और उसके मन में अजीब सी तड़प जाग उठी। मीरा भाभी ने जब रोहन को देखा तो वह थोड़ा शर्माईं, लेकिन उन्होंने अपना पल्लू ठीक करने की कोई जल्दी नहीं दिखाई। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी जैसे वह भी रोहन की बेताबी को महसूस कर रही थीं और उसे अपने करीब बुलाना चाहती थीं।

बातों-बातों में मीरा भाभी ने रोहन को नीचे चाय पीने के बहाने बुला लिया क्योंकि उस रात उनके पति शहर से बाहर गए हुए थे। घर के अंदर का माहौल बहुत ही शांत और मदहोश कर देने वाला था, जहां हल्की रोशनी में मीरा भाभी का बदन और भी ज्यादा निखर कर आ रहा था। रोहन के दिल की धड़कनें इतनी तेज थीं कि उसे अपनी खुद की सांसें सुनाई दे रही थीं और मीरा भाभी की खुशबू ने उसे चारों तरफ से घेर लिया था। वह दोनों सोफे पर बैठे थे और उनके बीच की दूरी धीरे-धीरे कम होती जा रही थी, जो किसी बड़े तूफान के आने का संकेत दे रही थी।

रोहन ने धीरे से अपना हाथ मीरा भाभी के हाथ पर रखा, तो उनके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं। उस पहले स्पर्श ने दोनों के बीच की झिझक को पूरी तरह से खत्म कर दिया और रोहन का हाथ धीरे-धीरे उनके रेशमी बदन पर रेंगने लगा। उसने महसूस किया कि मीरा भाभी की सांसें अब तेज हो रही थीं और वह धीरे-धीरे रोहन की ओर झुक रही थीं। रोहन ने उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके होंठों की पंखुड़ियों का स्वाद लेने लगा, जो किसी शहद की तरह मीठे और मुलायम लग रहे थे।

मीरा भाभी ने रोहन की टी-शर्ट उतार दी और रोहन ने उनके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए, जिससे उनके विशाल तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। उन तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे गुलाबी मटर बिल्कुल सख्त हो चुके थे, जिन्हें देखकर रोहन की उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई। उसने बारी-बारी से उन मटरों को अपने मुंह में लिया और उन्हें चूसने लगा, जिससे मीरा भाभी के मुंह से दबी-दबी आहें निकलने लगीं। उनके हाथ रोहन के बालों में फंस गए थे और वह उसे अपने और करीब खींच रही थीं जैसे वह उसके अंदर समा जाना चाहती हों।

जल्द ही दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुके थे और रोहन का सख्त खीरा पूरी तरह से बाहर निकल आया था, जो अपनी मंजिल की तलाश में बेकरार था। मीरा भाभी की जांघों के बीच की गहरी खाई पूरी तरह से गीली और रसीली हो चुकी थी, जिससे एक प्राकृतिक खुशबू आ रही थी। रोहन ने अपनी उंगली से उस खाई की गहराई को नापना शुरू किया, तो मीरा भाभी अपने कूल्हे ऊपर उठाने लगीं और जोर-जोर से कराहने लगीं। उन्होंने रोहन के खीरे को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाते हुए अपनी कोमलता का अहसास कराने लगीं, जिससे रोहन का संयम टूटने लगा था।

रोहन ने मीरा भाभी को बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर आकर धीरे-धीरे अपने खीरे को उनकी रेशमी खाई के मुहाने पर रखा। जैसे ही खीरे का सिरा उस गर्म और तंग खाई के अंदर गया, मीरा भाभी ने रोहन को जोर से जकड़ लिया और उनकी आंखों से खुशी के आंसू झलक आए। रोहन ने एक गहरा धक्का दिया और उसका पूरा खीरा उस तंग खाई के अंदर समा गया, जिससे मीरा भाभी के मुंह से एक तीखी चीख निकली जो कमरे की दीवारों से टकराकर वापस आ गई। यह उनकी उस रात की पहली और सबसे यादगार खुदाई की शुरुआत थी।

अब खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और कमरे में अंगों के टकराने की आवाजें गूंजने लगी थीं। रोहन पूरी ताकत से मीरा भाभी को खोद रहा था और हर धक्के के साथ उनका शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। उनके तरबूज इधर-उधर डोल रहे थे और रोहन कभी उन्हें अपने हाथों से मसलता तो कभी अपने मुंह में भर लेता। मीरा भाभी भी पूरे जोश के साथ रोहन का साथ दे रही थीं और अपने पैरों को उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिया था ताकि वह और भी गहराई तक खुदाई कर सके। उनका पसीना एक-दूसरे के बदन में मिल रहा था जो उनके जुनून को और बढ़ा रहा था।

कुछ देर बाद रोहन ने मीरा भाभी को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने की स्थिति में ला दिया, जिससे उनकी खाई और भी ज्यादा खुल गई थी। पीछे से खुदाई करते हुए रोहन को उनके कूल्हों की बनावट का पूरा आनंद मिल रहा था और वह पागलों की तरह धक्के मार रहा था। मीरा भाभी बिस्तर के चादर को अपने हाथों से भींच रही थीं और उनका पूरा बदन थरथरा रहा था। हर धक्के के साथ उन्हें एक नया और अनोखा सुख मिल रहा था जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। रोहन का खीरा अब पूरी तरह से गर्म हो चुका था और वह अपने रस को बाहर निकालने के लिए तैयार था।

अंतिम क्षणों में रोहन ने खुदाई की रफ्तार बहुत तेज कर दी और मीरा भाभी भी जोर-जोर से झटके लेने लगीं। अचानक मीरा भाभी का पूरा शरीर अकड़ गया और उनकी खाई से ढेर सारा गर्म रस निकलने लगा, और ठीक उसी समय रोहन के खीरे ने भी अपना सारा गाढ़ा रस उनकी गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े और उनकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं। उस खुदाई के बाद जो सुकून उनके चेहरों पर था, वह किसी भी शब्द से परे था। वह दोनों काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे, जैसे वक्त वहीं रुक गया हो और दुनिया की कोई भी चिंता उन्हें छू न सके।