सुमन मामी की गहरी खुदाई


गाँव की उस सुनसान और शांत दुपहरी में जब सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था, सुमन मामी आँगन में रस्सी पर कपड़े सुखा रही थीं। उनकी सूती साड़ी पसीने से हल्की भीगकर उनके जिस्म से चिपक गई थी, जिससे उनके बदन के भारी उतार-चढ़ाव साफ झलक रहे थे। साड़ी के नीचे दबे उनके दो रसीले और गोल तरबूज हर हरकत के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे, जो किसी भी मर्द का ईमान डगमगा देने के लिए काफी थे। आर्यन किचेन की खिड़की से उन्हें टकटकी लगाए देख रहा था, उसकी नजरें मामी के चौड़े और भारी पिछवाड़े पर टिकी थीं जो चलने पर किसी लहर की तरह डोल रहा था। उसके पायजामे के भीतर उसका खीरा अब अपनी पूरी लंबाई में अकड़ चुका था और बाहर निकलने को बेताब था।

मामी जब कमरे में आईं तो उन्होंने देखा कि आर्यन उन्हें बड़ी अजीब नजरों से देख रहा है, उनकी आँखों में एक शरारत और प्यास साफ नजर आ रही थी। सुमन मामी ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया, लेकिन आर्यन की नजरें तो उनके ब्लाउज के भीतर छिपे उन बड़े तरबूजों पर जमी थीं जिनके मटर साड़ी के कपड़े को चीरकर बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे। मामी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'आर्यन, क्या देख रहे हो इतनी गौर से, क्या कभी किसी औरत को नहीं देखा?' उनकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक और आमंत्रण था जिसने आर्यन के भीतर की आग को और भड़का दिया। उसने धीरे से मामी के पास जाकर उनके कंधे पर हाथ रखा, जहाँ से मखमली अहसास उसके पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गया।

आर्यन ने धीरे से मामी को अपनी बाहों में भर लिया और उनके गर्दन के पास अपनी सांसें छोड़ने लगा, जिससे मामी के शरीर में एक सिहरन पैदा हो गई। उसने मामी के ब्लाउज के हुक धीरे-धीरे खोले, जिससे उनके सफेद और विशाल तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गिरे, जिन पर गुलाबी मटर अपनी पूरी शान से उभरे हुए थे। आर्यन ने झुककर एक तरबूज को अपने मुँह में भर लिया और उसके मटर को अपनी जीभ से सहलाने लगा, मामी की सिसकारी कमरे की खामोशी को चीरने लगी। उनका शरीर ढीला पड़ने लगा था और उनकी उंगलियाँ आर्यन के बालों में फंस गई थीं, वे अपनी कमर को धीरे-धीरे आर्यन के खीरे पर रगड़ रही थीं जो उनके पिछवाड़े के पास अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था।

अब सब्र का बांध टूट चुका था, आर्यन ने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया और उनकी साड़ी और पेटीकोट को एक झटके में नीचे खींच दिया। मामी की रेशमी खाई अब पूरी तरह सामने थी, जिसके चारों तरफ काले और घने बाल एक जंगल की तरह फैले हुए थे जो उस गुफा की रक्षा कर रहे थे। आर्यन ने अपना चेहरा उनकी खाई के पास ले जाकर उसे गहराई से सूँघा और फिर अपनी जीभ से उस खाई के किनारों को चाटना शुरू कर दिया। मामी की कमर बिस्तर से ऊपर उठने लगी और वे 'आह.. उफ़.. आर्यन' की आवाजें निकालने लगीं, उनकी खाई से अब कुदरती रस रिसने लगा था जो आर्यन के मुँह का स्वाद बढ़ा रहा था।

जब मामी पूरी तरह से गीली और तैयार हो गईं, तो आर्यन ने अपने लोहे जैसे सख्त खीरे को बाहर निकाला और उसे मामी की खाई के मुहाने पर टिका दिया। उसने धीरे से दबाव डाला, तो मामी की आँखों से पानी निकल आया क्योंकि काफी समय बाद कोई बड़ा खीरा उनकी तंग खाई को चौड़ा करने की कोशिश कर रहा था। आर्यन ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा खीरा जड़ तक उस तंग खाई में समा गया, जिससे मामी के मुँह से एक चीख निकल गई जो तुरंत एक सुखद कराह में बदल गई। कमरे में अब 'चप-चप' की आवाजें गूँजने लगी थीं क्योंकि आर्यन सामने से खोदना शुरू कर चुका था और हर धक्के के साथ उसके अंडकोष मामी के पिछवाड़े से टकरा रहे थे।

मामी ने आर्यन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए और अपनी टांगें उसकी कमर के चारों तरफ लपेट लीं ताकि वह और गहराई तक उन्हें खोद सके। आर्यन अब पागल हो चुका था, वह कभी उनके तरबूजों को मरोड़ता तो कभी उनके मटर को अपने दांतों से हल्का काटता। कुछ देर बाद उसने मामी को घुमाया और उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया ताकि वह पिछवाड़े से खोदना शुरू कर सके। पीछे से मामी का पिछवाड़ा दो बड़े पहाड़ों की तरह दिख रहा था जिसके बीच की गहरी खाई अब आर्यन के खीरे का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। उसने पीछे से अपना खीरा फिर से खाई में डाला और मशीन की रफ्तार से खुदाई शुरू कर दी, मामी के तरबूज हवा में लटक कर झूल रहे थे।

खुदाई की रफ्तार अब अपने चरम पर थी, आर्यन की सांसें फूल रही थीं और मामी की कराहें तेज होती जा रही थीं, वे कह रही थीं, 'और जोर से खोदो आर्यन, आज मुझे पूरी तरह भर दो।' आर्यन ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और आखिरी के कुछ धक्के इतने जोरदार थे कि मामी का पूरा शरीर कांपने लगा। अचानक आर्यन के खीरे ने गर्म लावा छोड़ना शुरू कर दिया और मामी की खाई के भीतर रस निकलने लगा, दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए बिस्तर पर ढह गए। सुमन मामी का चेहरा पसीने और संतुष्टि से चमक रहा था, उनकी खाई अब पूरी तरह से आर्यन के रस से लबालब भरी हुई थी और दोनों की धड़कनें एक ही लय में धड़क रही थीं, जैसे इस खुदाई ने उनकी रूहों को भी जोड़ दिया हो।