होटल में पड़ोसन की खुदाई

विकास एक बत्तीस वर्षीय सुगठित शरीर वाला युवक था, जो पिछले दो सालों से दिल्ली के एक फ्लैट में अकेला रहता था। उसी के बगल वाले फ्लैट में अंजली अपने पति के साथ रहती थी। अंजली की उम्र करीब अट्ठाइस साल थी और उसका बदन किसी ढली हुई मूरत जैसा था। वह जब भी साड़ी पहनकर निकलती, उसकी पतली कमर और भारी तरबूज किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थे।



किस्मत का खेल देखिए, दोनों एक ही शहर में एक सेमिनार के सिलसिले में मिले। होटल में भारी भीड़ होने के कारण विकास और अंजली को एक ही कमरा साझा करना पड़ा। कमरे के अंदर का माहौल शांत था, लेकिन दोनों के दिलों में एक अजीब सी हलचल मची हुई थी। अंजली ने गुलाबी रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसमें से उसका गोरा रंग और भी ज्यादा निखर कर आ रहा था।


विकास की नजरें बार-बार अंजली के उभरे हुए अंगों पर जाकर टिक जाती थीं। उसने देखा कि कैसे साड़ी के तंग ब्लाउज से उसके तरबूज बाहर आने को बेताब थे। जब अंजली अपना पल्लू संभालती, तो उसके बगल का गोरा हिस्सा और कमर की गहरी ढलान विकास की धड़कनें बढ़ा देती। विकास को महसूस हो रहा था कि अंजली भी उसकी नजरों की तपिश को भांप रही है।


रात का खाना खाने के बाद कमरे में हल्की मद्धम रोशनी जल रही थी। अंजली बेड के एक किनारे पर बैठी अपने बालों को संवार रही थी। विकास ने गौर किया कि उसके चेहरे पर पसीने की नन्हीं बूंदें चमक रही थीं। कमरे का तापमान बढ़ा हुआ महसूस हो रहा था, हालांकि एयर कंडीशनर चल रहा था। उन दोनों के बीच एक अनकहा आकर्षण जन्म ले चुका था।


"विकास, तुम्हें गर्मी नहीं लग रही?" अंजली ने अपनी भारी आवाज में पूछा, जिसकी खनक विकास के कानों में शहद की तरह घुली। विकास ने अपनी नजरें उसके चेहरे से हटाकर उसके गले के नीचे की गहराई पर टिका दीं। वहां उसके तरबूजों के बीच की खाई साफ नजर आ रही थी। विकास ने बस सिर हिलाया और उसके करीब जाकर बैठ गया।


अंजली ने अपनी नजरें झुका लीं, लेकिन उसके चेहरे पर आई गुलाबी चमक सब कुछ बयां कर रही थी। विकास ने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ धीरे से अंजली के हाथ पर रखा। पहला स्पर्श होते ही अंजली के पूरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई। उसकी सांसें तेज चलने लगीं और उसने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि विकास की उंगलियों को कसकर थाम लिया।


विकास ने धीरे से उसके चेहरे को अपनी तरफ मोड़ा। उन दोनों की सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। विकास ने देखा कि अंजली की आंखों में एक अजीब सी प्यास थी। उसने धीरे से अंजली के कान के पास जाकर फुसफुसाया, "तुम आज बहुत सुंदर लग रही हो।" अंजली की धड़कनें और तेज हो गईं और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं।


विकास का हाथ अब उसकी रेशमी कमर पर था, जहां की त्वचा रेशम से भी ज्यादा नरम थी। उसने अपनी उंगलियों से उसकी कमर को सहलाना शुरू किया। अंजली के मुंह से एक धीमी सी आह निकली। विकास ने उसके ब्लाउज की डोरियों की तरफ हाथ बढ़ाया। झिझक अब खत्म हो रही थी और मन का संघर्ष हार चुका था। वासना का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था।


जैसे ही विकास ने उसके ब्लाउज की डोरियां खोलीं, उसके भारी और रसीले तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। उनकी गोलाई और उन पर मौजूद गहरे गुलाबी रंग के मटर देखकर विकास की आंखों में चमक आ गई। उसने धीरे से अपने हाथ उन तरबूजों पर रखे और उन्हें हल्के से भींचा। अंजली ने दर्द और आनंद के मिले-जुले अहसास में अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया।


विकास की प्यास अब बढ़ती जा रही थी। उसने अपनी जीभ से उसके एक मटर को हल्के से छुआ। अंजली के बदन में एक जोर की कंपन हुई। विकास ने उसके तरबूजों को बारी-बारी से अपने मुंह में लेना शुरू किया। वह उन्हें ऐसे चूस रहा था जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी पी रहा हो। कमरे में सिर्फ सिसकारियों और सांसों की आवाजें गूंज रही थीं।


अंजली ने भी अब विकास के कपड़े उतारने में उसकी मदद की। जब विकास का सख्त और फौलादी खीरा उसके सामने आया, तो अंजली की आंखें फटी रह गईं। उसने कभी इतना विशाल और तनावग्रस्त खीरा नहीं देखा था। विकास ने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी साड़ी और पेटीकोट को धीरे-धीरे उसके बदन से अलग कर दिया। अब अंजली पूरी तरह से कुदरती लिबास में थी।


विकास ने उसकी टांगों के बीच की रेशमी खाई को देखा, जो अब रस से गीली हो चुकी थी। वहां मौजूद हल्के बाल उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। विकास ने अपनी जीभ से उस खाई को चाटना शुरू किया। अंजली बेड की चादर को अपने हाथों में भींचने लगी और उसका पूरा बदन धनुष की तरह मुड़ने लगा। वह रस में पूरी तरह भीग चुकी थी।


अंजली ने विकास को अपने ऊपर खींच लिया और उसके खीरे को अपनी खाई के मुहाने पर महसूस किया। विकास ने एक गहरे और धीमे झटके के साथ अपने खीरे को उसकी गहरी खाई में उतार दिया। अंजली के मुंह से एक चीख निकली, जो कमरे की दीवारों से टकराकर दम तोड़ गई। वह अहसास इतना गहरा था कि दोनों कुछ पलों के लिए ठहर गए।


विकास ने धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ वह उसकी खाई की गहराई को नाप रहा था। अंजली की सिसकारियां अब तेज हो गई थीं। "और तेज विकास... और गहराई से खोदो," वह बेसुध होकर कह रही थी। विकास ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ा और अपनी रफ्तार बढ़ा दी। कमरे में मांस से मांस टकराने की चप-चप की आवाजें आने लगीं।


कुछ देर बाद विकास ने अंजली को उल्टा लेटने के लिए कहा। उसने उसके भारी और गोल पिछवाड़े को थपथपाया और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब वह पिछवाड़े से खोदने की तैयारी में था। विकास ने दोबारा अपने खीरे को उसकी खाई में पीछे से दाखिल किया। यह पोजीशन अंजली के लिए नई और बेहद रोमांचक थी। वह बिस्तर पर अपना चेहरा टिकाए हुए सिसक रही थी।


खोदने की गति अब चरम पर थी। विकास का पूरा बदन पसीने से लथपथ था और अंजली भी पूरी तरह से पसीने में नहाई हुई थी। पसीने की वजह से उनके बदन एक-दूसरे से चिपक रहे थे। विकास को महसूस हुआ कि उसकी खाई अब और भी ज्यादा गर्म और तंग हो गई है। अंजली का पूरा बदन कांपने लगा था, जो इस बात का संकेत था कि उसका रस छूटने वाला है।


अचानक अंजली ने एक जोर की सिसकारी भरी और उसका बदन पूरी तरह अकड़ गया। उसकी खाई से भारी मात्रा में रस छूटा, जिसने विकास के खीरे को पूरी तरह भिगो दिया। उसी पल विकास ने भी अपनी पूरी ताकत के साथ अंतिम झटके दिए और अपना सारा गर्म लावा उसकी खाई की गहराई में उड़ेल दिया। दोनों बेदम होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।


काफी देर तक दोनों शांत लेटे रहे, उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। कमरे की हवा में एक अजीब सी गंध और सुकून फैला हुआ था। विकास ने अंजली को अपने सीने से लगा लिया। उस रात की उस खुदाई ने उनके बीच के पड़ोसी वाले रिश्ते को एक नई और गहरी भावनात्मक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था। दोनों जानते थे कि यह रात उनके जीवन की सबसे यादगार रात बन चुकी है।


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