दोपहर की चिलचिलाती धूप में पूरा मोहल्ला एक गहरी नींद में सोया हुआ था, लेकिन आर्यन के मन में एक अजीब सी उत्तेजना और हलचल मची हुई थी। वह अपनी मीरा चाची के घर की सीढ़ियां बहुत ही धीरे-धीरे चढ़ रहा था, जहाँ चारों तरफ शांति का सन्नाटा पसरा हुआ था। मीरा चाची अपने पति की लंबी व्यावसायिक यात्राओं के कारण अक्सर अकेली रहती थीं और आर्यन को अक्सर उनकी देखरेख या मदद के बहाने वहाँ जाने का मौका मिल जाता था। जैसे ही वह कमरे में दाखिल हुआ, कूलर की ठंडी हवा और चाची के बदन से आने वाली चमेली के इत्र की भीनी-भीनी खुशबू ने आर्यन के होश फाख्ता कर दिए, उसका दिल सीने में हथौड़े की तरह बजने लगा था।
मीरा चाची सोफे पर अर्धनिद्रा की अवस्था में लेटी हुई थीं, और उनकी साड़ी का पल्लू लापरवाही से एक तरफ सरक गया था जिससे उनके उभरे हुए और मांसल तरबूज आधे से ज्यादा नजर आ रहे थे। उनकी त्वचा दूध जैसी सफेद और मखमली थी, और उनके भरे हुए बदन की गोलाई किसी भी पुरुष को दीवाना बनाने के लिए काफी थी। उनके उन रसीले तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर जैसे दाने साड़ी के मलमल के कपड़े के नीचे से साफ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे, जो शायद कूलर की ठंडक या किसी दबी हुई ख्वाहिश का संकेत दे रहे थे। चाची की उम्र पैंतीस के करीब थी, लेकिन उनका यौवन अभी भी अपनी पूरी रंगत पर था।
आर्यन की नजरें चाची के सुडौल और भारी पिछवाड़े पर जाकर टिक गईं, जो साड़ी के तंग घेरे में पूरी तरह से कसा हुआ और उभार मार रहा था। वह धीरे से उनके करीब सोफे के किनारे पर बैठ गया और उसके हाथ पसीने से भीगने लगे थे, एक अजीब सी झिझक और बेपनाह चाहत के बीच वह झूल रहा था। उसने सोचा कि क्या यह मर्यादा का उल्लंघन होगा, पर चाची की गहरी और मधोश करने वाली सांसों ने उसके मन के सारे डर को एक ही पल में मिटा दिया। वह उनके चेहरे की ओर झुका और उनकी गर्दन के पास अपनी सांसें छोड़ने लगा, जहाँ से गर्मी का एक भबका निकल रहा था।
तभी अचानक मीरा चाची की आँखें खुलीं, लेकिन उनमें कोई गुस्सा नहीं बल्कि एक गहरा सन्नाटा और छिपी हुई प्यास थी। उन्होंने आर्यन को इतनी करीब देखा तो उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान फैल गई और उन्होंने अपनी बाहें आर्यन के गले में डाल दीं। आर्यन ने धीरे से अपना हाथ चाची के ब्लाउज के ऊपर रखा और उन नरम तरबूजों को हल्के से सहलाना शुरू किया। चाची के मुंह से एक धीमी सी आह निकली और उन्होंने आर्यन के होंठों को अपने होंठों से मिला दिया, वह स्वाद इतना मीठा और मदहोश करने वाला था कि दोनों एक-दूसरे में खोते चले गए।
आर्यन के हाथों की उंगलियां अब चाची के पेट की गहराईयों को नाप रही थीं और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ रही थीं, जहाँ साड़ी और पेटीकोट के नीचे एक रहस्यमयी खाई इंतज़ार कर रही थी। चाची ने खुद ही अपनी साड़ी की परतों को ढीला कर दिया और आर्यन के सामने अपने बदन की नुमाइश करने लगीं। उनके तरबूज अब पूरी तरह से आजाद थे और उनके ऊपर के गहरे गुलाबी मटर आर्यन के स्पर्श के लिए बेताब थे। आर्यन ने अपने मुंह में एक तरबूज को भर लिया और मटर को अपनी जीभ से सहलाने लगा, जिससे चाची के शरीर में बिजली सी दौड़ गई और वह बिस्तर पर तड़पने लगीं।
जैसे ही आर्यन ने अपना हाथ नीचे किया, उसे वहां रेशमी बाल महसूस हुए जो उस गहरी खाई की रखवाली कर रहे थे। वह खाई पहले से ही रस से लबालब भीग चुकी थी और एक अजीब सी फिसलन वहां महसूस हो रही थी। आर्यन ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो चाची ने अपनी कमर ऊपर उठा दी और उनके मुंह से निकलने वाली सिसकारियां कमरे की शांति को भंग करने लगीं। चाची के हाथ अब आर्यन के पेंट की जिप की ओर बढ़े और उन्होंने वहाँ कैद उस तनावपूर्ण खीरे को बाहर निकाल लिया, जो अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ अकड़ कर खड़ा था।
चाची ने उस गरम और सख्त खीरे को अपने कोमल हाथों में पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं, जिससे आर्यन की आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। उन्होंने अपनी झुकी हुई नजरों से आर्यन को देखा और फिर उस खीरे को मुंह में लेना शुरू कर दिया। उनके मुंह की गर्माहट और जीभ का स्पर्श आर्यन को स्वर्ग का अहसास करा रहा था। वह उनके सिर के बालों को पकड़कर उस सुख को महसूस कर रहा था। चाची बड़ी शिद्दत से उस खीरे को चूस रही थीं जैसे वह दुनिया का सबसे कीमती फल हो, और आर्यन का पूरा शरीर उत्तेजना के मारे कांप रहा था।
अब सब्र का बांध टूट चुका था, आर्यन ने चाची को बिस्तर पर लिटाया और उनके पैरों को फैलाकर उस गीली खाई के द्वार पर अपना खीरा टिका दिया। उसने धीरे से दबाव बनाया और वह सख्त अंग उस तंग और रसीली खाई के अंदर धीरे-धीरे समाने लगा। चाची ने दर्द और आनंद के मिले-जुले अहसास में आर्यन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। जैसे ही पूरा खीरा अंदर समा गया, दोनों को एक पूर्णता का अनुभव हुआ। आर्यन ने अब सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्का गहरा और लयबद्ध था, जिससे चाची के तरबूज हवा में उछल रहे थे।
कमरे में केवल जिस्मों के टकराने की आवाज और भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। आर्यन ने चाची को घुमाया और उन्हें घुटनों के बल खड़ा कर दिया ताकि वह पिछवाड़े से खोदना शुरू कर सके। पीछे से चाची का वह भारी पिछवाड़ा किसी पहाड़ की तरह सुंदर लग रहा था। आर्यन ने अपनी पकड़ मजबूत की और पूरी ताकत से खुदाई जारी रखी। चाची बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थीं और उनकी आँखों में वह जंगलीपन था जो केवल चरम सुख के करीब आने पर ही दिखता है। वह चीख-चीख कर आर्यन से और तेज खोदने की मांग कर रही थीं।
अंत में, जब दोनों की उत्तेजना अपने चरम बिंदु पर पहुँच गई, तो आर्यन ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। चाची का शरीर पूरी तरह से धनुष की तरह तन गया और तभी उनकी खाई से और आर्यन के खीरे से एक साथ रस छूटने लगा। वह अहसास इतना तीव्र था कि दोनों निढाल होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे में अब केवल उनकी धड़कनों की आवाज थी। चाची के चेहरे पर एक संतोष भरी चमक थी और आर्यन को अपनी मर्दानगी पर गर्व हो रहा था। उस दोपहर की वह खुदाई उनके बीच एक ऐसा राज बन गई थी जिसे वे ताउम्र अपने सीने में दफन रखने वाले थे, लेकिन वह अहसास हमेशा उनके जिस्मों में ताजा रहने वाला था।