दोपहर की उस सुनसान घड़ी में पूरा घर एक अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ था। सूरज की तपिश खिड़की के पर्दों को चीरकर अंदर आ रही थी और कमरे के माहौल को और भी भारी बना रही थी। सीमा भाभी, जिनकी उम्र लगभग बत्तीस साल थी, सोफे पर बैठी पसीने की बूंदों को अपने आंचल से पोंछ रही थीं। उनकी रेशमी साड़ी उनके बदन से इस तरह चिपकी थी जैसे कोई बेल किसी पुराने दरख्त से लिपटी हो। उनके चेहरे पर छाई थकान और आंखों की गहराई में छिपी एक अनजानी सी तड़प मुझे उनकी ओर खींच रही थी।
सीमा भाभी का शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था, जिसके हर मोड़ पर कुदरत ने फुरसत से काम किया था। उनकी छाती पर लदे दो भारी और गोल तरबूज ब्लाउज की तंग सीमाओं को तोड़ने के लिए बेताब नजर आते थे। जब भी वो गहरी सांस लेतीं, उन तरबूजों के ऊपर लगे दो छोटे मटर जैसे उभार साफ दिखाई देते थे, जो उनकी उत्तेजना की गवाही दे रहे थे। उनका निचला हिस्सा भी कम कयामत नहीं था; उनका भारी और मांसल पिछवाड़ा जब हिलता था, तो देखने वाले की धड़कनें बेकाबू हो जाती थीं।
हम दोनों के बीच हमेशा से एक अनकहा सा रिश्ता था, जो हंसी-मजाक से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका था। भाभी अक्सर मुझे तिरछी नजरों से देखतीं और मैं उनकी उन नशीली आंखों में डूब जाता था। आज घर पर कोई नहीं था और उनके करीब बैठने भर से मेरे अंदर का सोया हुआ जानवर जागने लगा था। मेरा खीरा पैंट के अंदर अपनी जगह बनाने के लिए छटपटाने लगा था। भाभी ने मेरी बेचैनी भांप ली थी और उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई थी, जो मुझे और भी उकसा रही थी।
धीरे-धीरे मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और उनके करीब खिसक गया, जिससे हमारे शरीर आपस में छूने लगे। भाभी ने अपनी गर्दन झुका ली, लेकिन उन्होंने पीछे हटने की कोशिश नहीं की, जो मेरे लिए एक मूक सहमति थी। उनके जिस्म से उठने वाली चमेली और पसीने की मिली-जुली महक मेरे दिमाग को सुन्न कर रही थी। मेरा हाथ कांपते हुए उनके कंधे पर गया और वहां से फिसलते हुए उनकी कमर के नंगे हिस्से को छू गया। उनकी त्वचा रेशम से भी ज्यादा मुलायम और गर्म थी, जिसे छूते ही मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।
पहला स्पर्श हमेशा सबसे ज्यादा डरावना और सुखद होता है, और आज वही हो रहा था। भाभी ने एक गहरी आह भरी और अपनी आंखें बंद कर लीं, जैसे वो भी इसी पल का सदियों से इंतजार कर रही हों। मैंने उनके चेहरे को धीरे से अपनी ओर घुमाया और उनके तपते गालों को महसूस किया। उनकी सांसें तेज चलने लगी थीं और उनकी छाती के तरबूज ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने धीरे से उनके होंठों की ओर रुख किया, लेकिन मेरा ध्यान उनके पूरे बदन की उस प्यास पर था जो अब धीरे-धीरे ज्वालामुखी की तरह फटने वाली थी।
भाभी की झिझक अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और उन्होंने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं। हमने एक-दूसरे को इतनी जोर से जकड़ लिया था कि हमारे बीच हवा जाने की भी जगह नहीं बची थी। मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए, और जैसे ही वो बंधन खुला, उनके भारी तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। वो इतने गोरे और सुडौल थे कि मेरा मन किया उन्हें बस देखता रहूं। उन तरबूजों के बीचों-बीच लगे मटर अब पूरी तरह से सख्त हो चुके थे, जिन्हें मैंने अपनी उंगलियों से सहलाया तो भाभी के मुंह से एक सिसकारी निकल गई।
अगले ही पल मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनके कपड़ों को एक-एक करके उतारना शुरू किया। जब वो पूरी तरह निर्वस्त्र हुईं, तो उनकी खूबसूरती देखकर मेरी आंखें फटी रह गईं। उनकी टांगों के बीच छिपी वो गहरी और रसीली खाई अब पूरी तरह से सामने थी, जिसके आसपास के काले बाल उसकी गहराई को और भी रहस्यमयी बना रहे थे। उस खाई से एक हल्की सी नमी निकल रही थी, जो इस बात का संकेत थी कि भाभी अब पूरी तरह से तैयार थीं। मेरा खीरा अब अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा होकर अपना हक मांग रहा था।
मैंने पहले उनकी खाई को सहलाना शुरू किया और अपनी उंगली से खोदना शुरू किया। जैसे ही मेरी उंगली उस रसीली खाई के अंदर गई, भाभी ने अपनी कमर ऊपर उठा ली और उनके चेहरे पर एक असीम सुख के भाव आ गए। वो अपनी खाई में उंगली का इतना आनंद ले रही थीं कि उन्होंने मेरे बालों को जोर से पकड़ लिया। मैंने उनकी खाई चाटना शुरू किया, तो वो पूरी तरह से बेसुध हो गईं। उनकी सिसकारियां अब धीरे-धीरे आहों में तब्दील हो रही थीं और वो बार-बार मेरा नाम पुकार रही थीं, जैसे कोई प्रार्थना कर रही हों।
अब वक्त आ गया था उस असली खेल का जिसके लिए हम दोनों ही पागल हो रहे थे। मैंने अपने मजबूत खीरे को उनकी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से धक्का दिया। भाभी ने एक दर्द भरी लेकिन सुखद चीख मारी क्योंकि मेरा खीरा उनकी तंग खाई को चीरता हुआ अंदर जा रहा था। जैसे-जैसे मैं गहराई तक पहुंच रहा था, उनकी खाई मेरे खीरे को चारों तरफ से जकड़ रही थी। मैंने उन्हें सामने से खोदना (missionary) शुरू किया, और हर धक्के के साथ उनके तरबूज हवा में उछल रहे थे, जो एक अद्भुत दृश्य पैदा कर रहा था।
खुदाई की गति अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और कमरे में मांस के टकराने की आवाजें गूंजने लगी थीं। भाभी भी अपनी कमर को ऊपर-नीचे करके मेरा साथ दे रही थीं, जिससे खुदाई और भी दमदार हो गई थी। हम दोनों पसीने से पूरी तरह नहा चुके थे, लेकिन इसकी फिक्र किसी को नहीं थी। मैंने उन्हें बेड के किनारे पर लाकर उनके पिछवाड़े से खोदना (doggy style) शुरू किया। इस पोजीशन में मेरा खीरा उनकी खाई की गहराई को पूरी तरह नाप रहा था और भाभी बेतहाशा कराह रही थीं, उनके हाथ चादर को बुरी तरह भींच रहे थे।
भाभी ने मुझसे कहा, 'और जोर से खोदो, आज मुझे पूरी तरह से अपना बना लो।' उनकी इन बातों ने मेरी उत्तेजना को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और तेज गति से खुदाई जारी रखी। उनके चेहरे पर आने वाले भाव, उनके पसीने की चमक और उनके बदन की वो थरथराहट मुझे पागल बना रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि अब अंत करीब है, क्योंकि भाभी की खाई के अंदर की पकड़ बहुत ज्यादा सख्त होती जा रही थी और उनका शरीर कमान की तरह तन गया था।
अचानक भाभी के शरीर में एक जोरदार कंपन हुआ और उनकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा। उनका रस छूटना इतना तीव्र था कि वो कुछ पलों के लिए बिल्कुल शांत पड़ गईं। उसी पल मेरा भी सब्र जवाब दे गया और मेरे खीरे ने भी भारी मात्रा में अपना रस उनकी खाई के अंदर छोड़ दिया। वो गर्म एहसास हम दोनों को चरम सुख की ऊंचाइयों पर ले गया। हम दोनों काफी देर तक उसी अवस्था में लेटे रहे, एक-दूसरे की सांसों को महसूस करते हुए, जैसे दुनिया की सारी खुशियां बस इसी पल में सिमट आई हों।
कुछ देर बाद जब हमारी सांसें सामान्य हुईं, तो भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे माथे को चूमते हुए कहा कि आज उन्होंने जो महसूस किया है वो पहले कभी नहीं किया था। उनकी आंखों में एक नया संतोष और चमक थी। उनके बिखरे हुए बाल और पसीने से चमकता बदन अभी भी बहुत कामुक लग रहा था। हमने साथ में कुछ पल बिताए, पुरानी बातों को याद किया और इस नए रिश्ते की गहराई को महसूस किया। वो दोपहर हमारे जीवन की सबसे यादगार दोपहर बन गई थी, जिसने हमारे बीच के फासले को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था।
अंत में, जब शाम ढलने लगी और घर के अन्य सदस्यों के आने का समय हुआ, तो भाभी ने धीरे से उठकर अपने कपड़े ठीक किए। लेकिन जाते-जाते उन्होंने मेरी आंखों में झांककर एक ऐसी शरारती मुस्कान दी, जिसने मुझे बता दिया कि यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। उस दिन के बाद से हमारा रिश्ता और भी गहरा और रोमांचक हो गया, जहां हम अक्सर चोरी-छिपे इन हसीन पलों का आनंद लेते रहे। वह रसीली खुदाई और भाभी का वो साथ मेरे दिलो-दिमाग पर हमेशा के लिए अंकित हो गया था।