होटल में अजनबी के साथ खुदाई

कमरे की खिड़की से बाहर शहर की बत्तियां टिमटिमा रही थीं, लेकिन समीर का ध्यान उन पर नहीं था। उसका पूरा ध्यान सामने बैठी उस औरत पर था जिसे वह कुछ घंटे पहले ही मिला था। नीलम नाम की उस महिला की उम्र लगभग पैंतीस साल रही होगी। वह एक गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी में लिपटी हुई थी जो उसके शरीर के हर उभार को बखूबी बयां कर रही थी।


समीर की उम्र अभी पच्चीस के करीब थी और वह अपनी नौकरी के सिलसिले में इस अनजान शहर में आया था। होटल में कमरे कम होने की वजह से उसे और नीलम को एक ही कमरा साझा करना पड़ा था। शुरुआत में दोनों के बीच झिझक थी, लेकिन धीरे-धीरे बातों का सिलसिला शुरू हुआ। नीलम का शरीर काफी भरा हुआ और आकर्षक था। उसकी चौड़ी कमर और भारी पिछवाड़ा उसे बार-बार देखने पर मजबूर कर रहे थे।


नीलम ने जब अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा ठीक किया, तो समीर की नजरें उसके ब्लाउज से बाहर झांकते भारी तरबूजों पर टिक गईं। वह तरबूज इतने बड़े और तने हुए थे कि ब्लाउज के बटन जैसे टूटने को तैयार थे। समीर ने अपना गला साफ किया और नजरें चुराने की कोशिश की, लेकिन नीलम की मदहोश कर देने वाली खुशबू उसे अपनी ओर खींच रही थी।


"समीर, तुम बहुत शांत हो गए हो, क्या सोच रहे हो?" नीलम ने अपनी सुरीली आवाज में पूछा। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी जो समीर के भीतर हलचल पैदा कर रही थी। समीर ने घबराते हुए कहा, "कुछ नहीं नीलम जी, बस इस सफर और इत्तेफाक के बारे में सोच रहा था।" नीलम थोड़ा मुस्कुराई और उसके करीब आकर बैठ गई।


जैसे ही वह करीब आई, समीर को उसके शरीर की गर्मी महसूस होने लगी। नीलम के तरबूज अब उसके हाथ के बहुत करीब थे। समीर ने महसूस किया कि उसका खीरा पैंट के अंदर धीरे-धीरे सिर उठाने लगा है। वह इस अहसास से थोड़ा असहज था, लेकिन उसका मन इस रोमांच का आनंद भी ले रहा था। कमरे का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था।


नीलम ने अपना हाथ धीरे से समीर के कंधे पर रखा। उसके स्पर्श में एक बिजली सी थी जिसने समीर के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ दी। "तुम्हें डर लग रहा है क्या?" उसने फुसफुसाते हुए पूछा। उसकी सांसें समीर के कानों से टकरा रही थीं। समीर ने उसकी ओर देखा, उनकी नजरें मिलीं और उस पल में सारी झिझक जैसे हवा में उड़ गई।


समीर ने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ नीलम की कमर पर रखा। उसकी त्वचा मखमली और गर्म थी। नीलम ने एक हल्की सी आह भरी और अपनी आंखें मूंद लीं। समीर का हाथ अब उसकी पीठ पर रेंगने लगा था। वह धीरे-धीरे उसके शरीर की बनावट को महसूस कर रहा था। नीलम का भारी पिछवाड़ा बेड पर फैल गया था, जो समीर को और भी उत्तेजित कर रहा था।


नीलम ने धीरे से अपना पल्लू कंधे से गिरा दिया। अब उसके गोरे और विशाल तरबूज सिर्फ एक पतले ब्लाउज के नीचे कैद थे। समीर ने अपनी उंगलियों से उन तरबूजों के ऊपरी हिस्से को सहलाया। नीलम के मुंह से एक धीमी सिसकारी निकली। उसने समीर का सिर पकड़कर अपने सीने की ओर खींच लिया। समीर का चेहरा अब उन गर्म तरबूजों के बीच दबा हुआ था।


ब्लाउज के ऊपर से ही समीर ने उन तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया। वे इतने भारी और मुलायम थे कि उसे यकीन नहीं हो रहा था। उसने अपने दांतों से ब्लाउज की डोरी खोलने की कोशिश की। नीलम ने उसकी मदद की और देखते ही देखते वह अनमोल नजारा उसके सामने था। उसके तरबूजों के बीच में गहरी घाटी थी और उन पर गहरे रंग के मटर उभरे हुए थे।


समीर ने एक मटर को अपने मुंह में ले लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगा। नीलम बिस्तर पर तड़पने लगी। उसके हाथ समीर के बालों में फंस गए थे। "ओह समीर... ऐसे ही... बहुत अच्छा लग रहा है," वह बार-बार कह रही थी। समीर अब दूसरे तरबूज को सहला रहा था और उसे अपनी हथेलियों में भींच रहा था। कमरे में केवल उनकी भारी सांसों की आवाज गूंज रही थी।


अब समीर की नजरें नीलम की साड़ी के नीचे छिपी उस खाई की ओर गईं। उसने धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर सरकाना शुरू किया। नीलम की जांघें बहुत भारी और चिकनी थीं। जब समीर का हाथ उसकी रेशमी पैंटी के ऊपर पहुंचा, तो उसने महसूस किया कि वह हिस्सा पहले से ही गीला हो चुका है। नीलम की खाई से रस रिस रहा था जो उसकी उत्तेजना का सबूत था।


समीर ने पैंटी को एक तरफ किया और अपनी उंगलियों को उस नम खाई की गहराई में उतार दिया। नीलम ने जोर से अपनी कमर ऊपर की ओर झटका दी। समीर की उंगलियां अब उस खाई के अंदर और बाहर हो रही थीं। वह महसूस कर सकता था कि अंदर कितनी गर्मी और फिसलन है। नीलम का पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था और वह जोर-जोर से हांफ रही थी।


नीलम ने अब समीर की पैंट की जिप खोली और उसके कड़े हो चुके खीरे को बाहर निकाला। "वाह, यह तो बहुत बड़ा और सख्त है," उसने खीरे को अपने हाथ में पकड़ते हुए कहा। उसने अपनी जीभ से खीरे के ऊपरी हिस्से को चाटना शुरू किया। समीर की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह सुख के उस चरम पर था जहां शब्द मायने नहीं रखते थे।


नीलम अब घुटनों के बल बैठ गई और समीर के खीरे को पूरा अपने मुंह में भर लिया। वह उसे बड़ी सफाई से चूस रही थी। समीर को ऐसा लग रहा था जैसे उसका सारा रस अभी निकल जाएगा। उसने नीलम के सिर को पकड़ा और अपनी गति तेज कर दी। नीलम भी पूरी शिद्दत से उसके खीरे के साथ खेल रही थी, उसे अपनी जीभ से सहला रही थी।


कुछ देर बाद समीर ने उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। उसने नीलम की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा। अब उसकी खाई पूरी तरह से समीर के सामने खुली हुई थी। उसने अपने खीरे की नोक को उस खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से एक धक्का दिया। नीलम की आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। वह पहली बार एक अजनबी के साथ इतनी गहराई से जुड़ी थी।


समीर ने धीरे-धीरे गहराई तक जाना शुरू किया। हर धक्के के साथ नीलम के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। कमरे में मांस से मांस टकराने की चप-चप की आवाज गूंजने लगी। समीर अब पूरी ताकत से नीलम की खाई को खोद रहा था। नीलम ने अपने नाखून समीर की पीठ में गड़ा दिए थे। "हाँ समीर... और जोर से... मुझे पूरा खोद डालो," वह चिल्ला रही थी।


खुदाई का यह सिलसिला काफी देर तक चला। समीर की गति अब और तेज हो गई थी। वह नीलम के शरीर के हर कोने को महसूस कर रहा था। नीलम का पिछवाड़ा बेड पर जोर-जोर से टकरा रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि अब उसका रस छूटने वाला है। उसकी जांघें कांपने लगी थीं और उसने समीर को कसकर जकड़ लिया। तभी समीर ने एक जोरदार धक्का दिया और अपना सारा गर्म रस उसकी खाई में छोड़ दिया।


नीलम ने भी एक लंबी चीख के साथ अपना रस छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। समीर का खीरा अभी भी नीलम की खाई के अंदर ही था। दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और उनकी धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। उस शांत कमरे में अब सिर्फ उनकी संतुष्ट सांसों की आवाज थी। समीर ने नीलम के माथे को चूमा।


कुछ देर बाद वे एक-दूसरे से अलग हुए। नीलम के चेहरे पर एक अजीब सी शांति और चमक थी। उसने समीर की ओर देखा और धीरे से मुस्कुराई। समीर को भी एक अजब सा सुकून महसूस हो रहा था। उन्होंने कपड़े पहने और वापस बिस्तर पर लेट गए। वह रात उनके लिए सिर्फ एक शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि दो अजनबियों के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन गई थी।


बाहर सूरज निकलने की तैयारी कर रहा था, लेकिन कमरे के अंदर उस रात की गर्मी और यादें हमेशा के लिए कैद हो गई थीं। समीर ने महसूस किया कि कभी-कभी अनजान लोग भी जिंदगी के सबसे हसीन पल दे जाते हैं। नीलम उसके सीने पर सिर रखकर सो चुकी थी, और समीर बस उसकी जुल्फों को सहलाते हुए उस अद्भुत अनुभव को याद कर रहा था।


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