प्यारी मौसी की चु@@ई


गर्मियों की वह दोपहर आज भी आर्यन के जेहन में उतनी ही ताज़ा है जितनी वह उस वक्त थी जब वह अपनी मीना मौसी के घर छुट्टियों बिताने गया था। मीना मौसी, जिनकी उम्र करीब अड़तीस साल थी, अपनी ढलती जवानी के बावजूद किसी भी युवा लड़की को मात देने का दम रखती थीं। उनके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी पुरुष उन्हें एक बार देख ले तो बस देखता ही रह जाए। आर्यन जब वहां पहुंचा, तो घर पर सन्नाटा पसरा हुआ था क्योंकि मौसा जी एक हफ्ते के लिए शहर से बाहर किसी बिजनेस मीटिंग के सिलसिले में गए हुए थे। मौसी ने सफेद रंग की एक महीन सूती साड़ी पहन रखी थी, जिसके भीतर से उनके शरीर की हर एक रेखा साफ झलक रही थी।


मौसी के शरीर का आकार किसी तराशी हुई मूर्ति जैसा था, उनके सीने पर लदे हुए वे दो भारी और रसीले तरबूज ब्लाउज की तंग सीमाओं को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। जब भी वह चलती थीं, उनके वे तरबूज एक लय में ऊपर-नीचे होते थे, जिसे देखकर आर्यन के शरीर में एक अजीब सी सनसनी दौड़ जाती थी। मौसी का पिछवाड़ा काफी भरा हुआ और गोल था, जो साड़ी के पतले कपड़े में से अपनी पूरी गोलाई का अहसास करा रहा था। उनकी कमर पतली थी लेकिन उनके नितंबों का फैलाव इतना जबरदस्त था कि आर्यन का मन बार-बार उस गहराई को नापने के लिए मचल उठता था। उनके बदन से आती सौंधी महक और पसीने की हल्की बूंदें जो उनके गले के पास चमक रही थीं, आर्यन की कामुकता को चरम पर ले जा रही थीं।


उन दोनों के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव पहले से ही था, क्योंकि आर्यन बचपन से ही मौसी के काफी करीब रहा था। मौसी अक्सर उसे अपने दिल की बातें बताया करती थीं और कहती थीं कि मौसा जी के पास उनके लिए वक्त ही नहीं है। उस दोपहर, बातचीत के दौरान मौसी की आंखों में एक अजीब सी नमी और तन्हाई की झलक दिखी। उन्होंने आर्यन का हाथ पकड़ते हुए कहा कि वह कितनी अकेली महसूस करती हैं। उस स्पर्श में एक ऐसी बिजली थी जिसने आर्यन के भीतर दबे हुए अरमानों को जगा दिया। वह समझ पा रहा था कि मौसी को सिर्फ भावनात्मक ही नहीं, बल्कि एक शारीरिक सहारे की भी सख्त जरूरत है, जो उनकी इस प्यास को बुझा सके।


आकर्षण का जन्म तो पहले ही हो चुका था, लेकिन अब वह वासना की आग में तब्दील हो रहा था। आर्यन ने गौर किया कि मौसी का ध्यान बार-बार उसकी पैंट के उस उभार पर जा रहा था जहां उसका खीरा अब अपनी पूरी लंबाई में अकड़ने लगा था। कमरे की हवा अचानक भारी हो गई थी और दोनों के बीच एक अनकही सहमति बन रही थी। मौसी ने जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिरा दिया, जिससे उनके तरबूजों की गहराई और उनके ऊपरी हिस्से का गोरापन साफ दिखने लगा। आर्यन की धड़कनें तेज हो गई थीं और उसे लगने लगा था कि अब और रुकना मुमकिन नहीं है, क्योंकि मौसी की सांसों की गर्मी उसे अपनी ओर खींच रही थी।


हालांकि, मन में एक पल के लिए झिझक और द्वंद्व का संचार हुआ। आर्यन सोच रहा था कि क्या यह रिश्ता और यह कदम सही है? क्या मौसी इसे गलत नहीं समझेंगी? लेकिन जब उसने मौसी की आंखों में देखा, तो वहां सिर्फ और सिर्फ समर्पण और बेइंतहा चाहत दिखी। मौसी ने धीरे से आर्यन का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसे अपनी ओर झुकाया। उनकी उंगलियां आर्यन के बालों में खेल रही थीं, जैसे वह उसे मूक आमंत्रण दे रही हों। उस क्षण में शर्म और झिझक की दीवारें ढह गईं और केवल इच्छाओं का एक समंदर हिलोरे लेने लगा। आर्यन ने भी अपना हाथ मौसी की पतली कमर पर रख दिया, जिससे मौसी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई।


वह पहला स्पर्श इतना जादुई था कि दोनों के होंठ अपने आप एक-दूसरे के करीब आ गए। आर्यन ने मौसी के माथे और फिर उनके गालों पर अपना प्यार जताना शुरू किया। मौसी ने अपनी आंखें मूंद ली थीं और वह उस अहसास में पूरी तरह डूब चुकी थीं। धीरे-धीरे आर्यन का हाथ नीचे की ओर सरका और उसने मौसी के उन भारी तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया। जैसे ही उसने उन तरबूजों को हल्के से दबाया, मौसी के मुंह से एक मधुर आह निकली। ब्लाउज के ऊपर से ही आर्यन ने उन मटरों को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया जो अब पूरी तरह से सख्त हो चुके थे और कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब थे।


धीरे-धीरे उत्तेजना अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ने लगी। आर्यन ने मौसी के ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोल दिए, जिससे वे विशाल तरबूज अपनी पूरी गरिमा के साथ आजाद हो गए। मौसी का गोरा बदन दूधिया रोशनी में चमक रहा था और उनके मटर गुलाबी रंगत लिए हुए आर्यन को दावत दे रहे थे। आर्यन ने झुककर एक तरबूज को अपने मुंह में लिया और उसे धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, जबकि दूसरे हाथ से वह दूसरे मटर को मरोड़ रहा था। मौसी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था और उनके हाथ आर्यन के सिर को अपने सीने में और गहराई से दबा रहे थे। कमरे में केवल उनकी भारी होती सांसों और सिसकारियों की आवाजें गूंज रही थीं।


अब समय आ गया था उस खाई की गहराई को मापने का। आर्यन ने मौसी के पेटिकोट की डोरी खींची और कपड़ा सरक कर जमीन पर ढेर हो गया। मौसी की उस खाई के पास घने काले बाल थे, जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। आर्यन ने अपनी उंगलियों को उस गीली खाई के करीब ले जाकर सहलाना शुरू किया। मौसी की खाई से पहले ही रस रिसने लगा था, जो इस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह से तैयार थीं। जैसे ही आर्यन ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, मौसी अपनी कमर ऊपर उठाने लगीं और जोर-जोर से कराहने लगीं। वह अहसास इतना तीव्र था कि मौसी का शरीर बार-बार कांप रहा था और वह अपनी जांघों को आर्यन के हाथ पर भींच रही थीं।


आर्यन ने अब अपने खीरे को आजाद किया जो अब पत्थर की तरह सख्त और रसीला हो चुका था। उसने मौसी को बिस्तर के बीचों-बीच लिटाया और उनके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। जब उसने अपने खीरे का सिरा मौसी की उस तंग और फिसलन भरी खाई के मुहाने पर रखा, तो मौसी की आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उन्होंने आर्यन को अपनी ओर खींचा और उसके कानों में फुसफुसाते हुए कहा, "खोद डालो मुझे आर्यन, आज अपनी मौसी की इस बरसों की प्यास बुझा दो।" आर्यन ने एक गहरा धक्का दिया और उसका खीरा आधा उस गीली खाई के भीतर समा गया। मौसी के मुंह से एक चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा आनंद का मिश्रण थी।


खुदाई की प्रक्रिया अब अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुकी थी। आर्यन धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू कर चुका था और हर धक्के के साथ उसका खीरा मौसी की गहराई को छू रहा था। मौसी के तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन बारी-बारी से उन पर अपने दांतों के निशान छोड़ रहा था। मौसी की खाई इतनी तंग थी कि आर्यन को हर धक्के में जबरदस्त घर्षण महसूस हो रहा था। उन्होंने अपने दोनों हाथों से बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया था और उनके पैर आर्यन की कमर के इर्द-गिर्द लिपटे हुए थे। मौसी के चेहरे पर आने वाला हर भाव यह बता रहा था कि वह इस खुदाई का कितना आनंद ले रही थीं और उनका रस धीरे-धीरे बहकर बिस्तर को गीला कर रहा था।


आर्यन ने अब मौसी की पोजीशन बदली और उन्हें पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया। मौसी ने अपने घुटनों के बल झुककर अपने भारी पिछले हिस्से को आर्यन की ओर कर दिया। यह नजारा इतना कामुक था कि आर्यन का खीरा और भी ज्यादा तनाव में आ गया। उसने पीछे से मौसी के तरबूजों को अपने हाथों में पकड़ा और पूरी ताकत से धक्का मारना शुरू किया। हर धक्के की गूंज कमरे में साफ सुनी जा सकती थी। मौसी के बाल बिस्तर पर बिखरे हुए थे और वह बार-बार अपना सिर तकिये में छुपा रही थीं। उनकी आवाज अब और भी ज्यादा गहरी और मदहोश कर देने वाली हो गई थी। वह चिल्ला रही थीं, "हां आर्यन... ऐसे ही... और गहराई तक खोदो... पूरा खीरा अंदर उतार दो।"


करीब आधे घंटे की इस निरंतर खुदाई के बाद, दोनों ही अपने रस निकलने के करीब पहुंच चुके थे। आर्यन की गति अब बिजली जैसी तेज हो गई थी और वह अपनी पूरी ताकत मौसी की उस खाई में झोंक रहा था। मौसी का शरीर झटके ले रहा था और उनकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा था। अचानक, मौसी ने जोर से आर्यन को भींचा और उनकी खाई से रसों की एक तेज धार निकली जिसने आर्यन के खीरे को नहला दिया। ठीक उसी पल, आर्यन ने भी अपना सारा गर्म रस मौसी की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े, पसीने से लथपथ और हांफते हुए। उस पल कमरे की हवा में एक अजीब सा सुकून और तृप्ति घुली हुई थी।


खुदाई खत्म होने के बाद की वह हालत शब्दों में बयां करना मुश्किल था। मौसी का चेहरा गुलाबी हो चुका था और उनकी आंखों में एक असीम शांति थी, जैसे उन्हें वह सब मिल गया हो जिसकी उन्हें सालों से तलाश थी। आर्यन उनकी गोद में सिर रखकर लेटा हुआ था और मौसी प्यार से उसके बालों को सहला रही थीं। अब उनके बीच कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक नया और गहरा रिश्ता बन चुका था। मौसी ने आर्यन के माथे को चूमा और धीरे से कहा, "तुमने मुझे आज फिर से जिंदा कर दिया आर्यन।" उस रात के बाद, उनकी मुलाकातों का यह सिलसिला कभी थमा नहीं, और वह छुट्टियां आर्यन के जीवन की सबसे यादगार दास्तान बन गईं जिसे वह चाहकर भी कभी भूल नहीं पाएगा।