होटल वाली अजनबी चुदाई


होटल वाली अजनबी चुदाई--->शहर की शोर-शराबे से दूर उस आलीशान होटल के कमरे में नमी और सन्नाटा पसरा हुआ था जहाँ रोहित और मीरा एक गलती की वजह से एक ही कमरे में रुकने को मजबूर थे। मीरा की उम्र लगभग सत्ताईस साल रही होगी और उसके बदन की बनावट किसी तराशी हुई मूरत जैसी थी जिसने गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहन रखी थी जो उसके गोरे रंग पर कहर ढा रही थी। रोहित की नजरें बार-बार मीरा के उन उभरे हुए विशाल तरबूजों पर टिक जाती थीं जो साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे और उसकी पतली कमर के नीचे फैला हुआ भारी पिछवाड़ा हर बार रोहित के मन में हलचल पैदा कर देता था। मीरा को भी रोहित की मर्दाना गंध और उसकी चौड़ी छाती अपनी ओर खींच रही थी लेकिन दोनों के बीच एक अनकही झिझक की दीवार खड़ी थी जो धीरे-धीरे पिघलने वाली थी।

मीरा जब खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर देख रही थी तब उसकी साड़ी का पल्लू हल्का सा खिसक गया जिससे उसके कंधों की गोलाई और पीठ का वह हिस्सा नजर आने लगा जो किसी को भी दीवाना बना दे। उसके बदन के तरबूज साड़ी के भीतर कसक रहे थे और उनके ऊपर मौजूद छोटे-छोटे मटर ठंडक की वजह से सख्त होकर कपड़े के ऊपर से ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। रोहित ने जब पीछे से उसे इस हालत में देखा तो उसके भीतर का सोया हुआ मर्द जाग उठा और उसके पाजामे के भीतर उसका विशाल और कड़क खीरा धीरे-धीरे सिर उठाने लगा जिससे उसे चलने-फिरने में भी बेचैनी महसूस होने लगी। वह मीरा के करीब गया और उसकी सांसों की गर्माहट मीरा की गर्दन पर महसूस होने लगी जिससे मीरा के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।

दोनों के बीच बढ़ती इस नजदीकी ने झिझक को खत्म कर दिया था और अब केवल शारीरिक आकर्षण और वासना का सैलाब बाकी था जो बहने को बेताब था। रोहित ने बड़ी कोमलता से मीरा के कंधों पर अपने हाथ रखे और उसकी रेशमी त्वचा का स्पर्श पाकर उसका खीरा और भी ज्यादा कड़क होकर फन उठाने लगा। मीरा ने भी पीछे मुड़कर रोहित की आँखों में देखा जहाँ केवल प्यास और गहरी चाहत नजर आ रही थी और उसने खुद को रोहित की बाहों में सौंप दिया। कमरे की मद्धम रोशनी में दोनों एक-दूसरे के शरीर की बनावट को महसूस कर रहे थे और मीरा के भारी तरबूज अब रोहित की मज़बूत छाती से दब रहे थे जिससे दोनों के दिलों की धड़कनें एक लय में बजने लगी थीं।

रोहित ने धीरे से मीरा के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके गुलाबी होंठों का रस पीना शुरू किया जिसे पाकर मीरा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकल पड़ी। उसके हाथ रोहित के बालों में फँस गए और वह पूरी शिद्दत से रोहित के प्यार का जवाब देने लगी जबकि रोहित का एक हाथ नीचे जाकर मीरा के भारी पिछवाड़े को जोर-से भींचने लगा। साड़ी के ऊपर से ही उस मांसल हिस्से को सहलाने का आनंद ऐसा था कि मीरा की कमर खुद-ब-खुद रोहित के कड़क खीरे की तरफ खिंचने लगी जो अब उसके पेट के निचले हिस्से पर अपनी मजबूती का एहसास करा रहा था। इस स्पर्श ने दोनों के भीतर कामुकता की आग को और भड़का दिया था और अब वे मर्यादा की सारी सीमाएं लांघने को तैयार थे।

धीरे-धीरे रोहित ने मीरा की साड़ी की गांठों को खोलना शुरू किया और जैसे ही साड़ी फर्श पर गिरी मीरा केवल अपने छोटे से ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी रह गई। उसके शरीर के विशाल तरबूज अब साफ़ दिखाई दे रहे थे जिनकी गोलाई देखकर रोहित की राल टपकने लगी और उसने बिना देर किए अपने होंठ उन तरबूजों पर जमा दिए। मीरा ने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुका ली और जब रोहित ने अपने दाँतों से उन पर लगे छोटे मटरों को धीरे से काटा तो मीरा के पैर कांपने लगे। रोहित की जीभ जब मीरा की नाभि से होते हुए नीचे की ओर बढ़ी तो मीरा ने कसकर रोहित का सिर पकड़ लिया क्योंकि उसे अपनी गहरी और गीली खाई में एक अजीब सी गुदगुदी और प्यास महसूस होने लगी थी।

अब समय आ गया था कि इस प्यास को बुझाया जाए इसलिए रोहित ने मीरा को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके पेटीकोट को भी शरीर से अलग कर दिया। मीरा का पूरा नग्न बदन अब रोहित के सामने था जिसमें उसकी खाई के आस-पास के काले बाल और उसकी चिकनी जांघें किसी स्वर्ग से कम नहीं लग रही थीं। रोहित ने अपने कपड़े उतारे और अपना छह इंच लंबा और मोटा खीरा मीरा की आँखों के सामने लहराया जिसे देखकर मीरा की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उस गर्म और कड़क खीरे को पकड़ा और उसे सहलाने लगी जिससे रोहित के मुँह से सिसकारी निकल गई और उसने मीरा की खाई में अपनी उंगली डाल दी।

खाई में उंगली से खोदना शुरू करते ही मीरा के बदन में बिजली सी दौड़ गई और वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींचने लगी क्योंकि वह जगह पूरी तरह से गीली और रसदार हो चुकी थी। रोहित ने अपनी जीभ से मीरा की उस गहरी खाई को चाटना शुरू किया जिससे मीरा पागलों की तरह तड़पने लगी और उसके मुँह से 'ओह रोहित... और तेज' जैसे शब्द निकलने लगे। कुछ देर तक खाई का रस पीने के बाद रोहित ने मीरा की टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने कड़क खीरे की नोक को उस गीली खाई के द्वार पर टिका दिया। मीरा ने एक गहरी सांस ली और जैसे ही रोहित ने एक झटके में अपना पूरा खीरा भीतर डाला मीरा की एक चीख निकल गई जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी।

सामने से खोदना शुरू करते ही कमरे में केवल दोनों के शरीरों के टकराने की आवाज़ें गूंजने लगीं और रोहित हर धक्के के साथ अपने पूरे खीरे को मीरा की गहराई तक पहुँचा रहा था। मीरा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और रोहित उन्हें अपने हाथों से मसलते हुए पूरी ताकत से खुदाई कर रहा था जिससे मीरा की हालत खराब हो रही थी। उसने रोहित को अपने पैरों से जकड़ लिया और हर धक्के पर वह ऊपर की ओर उछलती जैसे कोई नाव लहरों पर तैर रही हो। रोहित ने मीरा को घुमाया और उसे बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया ताकि वह पिछवाड़े से खोदना शुरू कर सके और जैसे ही उसने पीछे से अपना खीरा डाला मीरा ने तकिये में अपना मुँह छिपा लिया।

पीछे से खुदाई का आनंद इतना तीव्र था कि मीरा के शरीर का कोना-कोना कांप रहा था और रोहित की बढ़ती रफ़्तार उसे चरम सुख की ओर ले जा रही थी। रोहित के पसीने की बूंदें मीरा की पीठ पर गिर रही थीं और मीरा के भारी पिछवाड़े पर पड़ते रोहित के थप्पड़ों की आवाज़ कमरे में संगीत की तरह गूंज रही थी। 'रोहित, मैं निकलने वाली हूँ... और तेज खोदो' मीरा ने चिल्लाते हुए कहा और रोहित ने अपनी गति को दोगुना कर दिया। कुछ ही पलों बाद मीरा के शरीर में एक जोरदार कंपन हुआ और उसकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा जिसे महसूस करते ही रोहित ने भी अपने खीरे से सारा गर्म रस मीरा की गहराई में छोड़ दिया।

खुदाई खत्म होने के बाद दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर पड़े थे और उनकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। मीरा का चेहरा गुलाबी पड़ चुका था और उसके बदन पर जगह-जगह रोहित के प्यार के निशान थे जबकि रोहित को एक अजीब सी शांति महसूस हो रही थी। उस अजनबी मुलाकात ने उन दोनों के बीच एक ऐसा अटूट रिश्ता बना दिया था जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था और वे जानते थे कि यह रात उनके जीवन की सबसे यादगार रात रहेगी। दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा और बिना कुछ कहे फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए क्योंकि उस रात की प्यास अभी पूरी तरह बुझी नहीं थी और वे फिर से उस रसभरी यात्रा पर निकलने को तैयार थे।