ये बात है प्रिया और रोहन की, दोनों कॉलेज के तीसरे साल में थे। दोनों ने आज लेक्चर बंक करके दिन निकाल लिया था। शाम को लौटते वक्त जयपुर से दिल्ली वाली लोकल बस पकड़ी। बस में भीड़ कम थी, ज्यादातर लोग आगे की सीटों पर बैठे थे। प्रिया और रोहन ने सबसे पीछे की आखिरी सीट पकड़ ली, जहां से कोई आसानी से नहीं देख पाता।
बस चल पड़ी। प्रिया ने रोहन के कंधे पर सिर रख दिया। रोहन ने उसकी कमर में हाथ डाला। दोनों ने सोचा – कोई नहीं देख रहा। रोहन ने प्रिया के होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्का क@@स, फिर गहरा। प्रिया की सांसें तेज हो गईं। उसने रोहन की जीभ पकड़ ली। रोहन का हाथ प्रिया की साड़ी के ऊपर से उसकी कमर पर सरक रहा था। प्रिया ने भी रोहन की कमर में हाथ डाल दिया। दोनों इतने खो गए कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कंडक्टर पीछे आ गया था।
कंडक्टर ने देख लिया। वो 40 साल का मोटा-तगड़ा आदमी था, नाम था करण। उसने ड्राइवर को इशारा किया, ड्राइवर ने मुस्कुरा दिया। लेकिन दोनों ने कुछ नहीं कहा। बस चलती रही।
टिकट काटते हुए करण पीछे पहुंचा। दोनों अभी भी लिपटे हुए थे। करण ने जोर से कहा –
"अरे ये क्या हरकत है! बस के अंदर ऐसा कर रहे हो? शर्म नहीं आती? नाम बताओ, पापा-मम्मी का नंबर दो। अभी घर फोन करूंगा। पुलिस को भी बता दूंगा।"
प्रिया और रोहन चौंक गए। दोनों के चेहरे सफेद पड़ गए। प्रिया ने साड़ी ठीक की, रोहन ने हाथ पीछे खींच लिए। दोनों डर के मारे कांप रहे थे।
करण ने आगे कहा – "चुप रहो। जब तक बस में बैठे हो, मैं कुछ नहीं बोलूंगा। सारी सवारी उतर जाएगी, तब देखते हैं।"
दोनों चुपचाप बैठे रहे। प्रिया का दिल धड़क रहा था, लेकिन अंदर से एक अजीब सा एक्साइटमेंट भी था। प्रिया बहुत च@@ासी थी। उसे रोहन के अलावा दूसरों से च@@वाने का भी बहुत मन करता था। वो अक्सर सोचती थी कि अगर कोई और मजबूत आदमी मिले तो क्या मजा आएगा। आज वो मौका लग रहा था।
बस में आखिरी सवारी भी उतर गई। अब बस खाली थी, सिर्फ प्रिया, रोहन, करण और ड्राइवर। ड्राइवर ने बस एक सुनसान जगह पर रोकी। करण ने दरवाजा बंद किया।
करण ने प्रिया की तरफ देखा – "अब बताओ, क्या करूं तुम्हारे साथ? पुलिस को कॉल करूं?"
प्रिया ने अचानक हिम्मत जुटाई। वो जानती थी कि डरने से कुछ नहीं होगा। उसने मुस्कुराते हुए कहा – "अंकल जी, पुलिस मत बुलाइए। हम दोनों तैयार हैं... जो चाहें कर लीजिए। लेकिन घर पर मत बताना।"
रोहन चौंक गया – "प्रिया, तू क्या बोल रही है?"
करण और ड्राइवर हंस पड़े। करण ने कहा – "अच्छा, तो लड़की तैयार है। चलो, शुरू करते हैं।"
करण ने प्रिया को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। उसने प्रिया की साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। प्रिया का ब@@उज गहरा कट वाला था, उसके गोरे स्तन थोड़े बाहर झांक रहे थे। करण ने ब@@उज के हुक खोल दिए। प्रिया के गोरे, बड़े स्तन बाहर आ गए – गोल, भरे हुए, निप्पल गुलाबी और सख्त हो चुके। करण ने दोनों स्तनों को हाथों में भरा और मसलने लगा। पहले हल्के से दबाया, फिर जोर से मसला। प्रिया की आह निकल गई – "आह... अंकल... कितने बड़े हाथ हैं आपके... दबाओ ऐसे ही... उफ्फ..." करण ने एक निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा, जीभ से गोल-गोल घुमाया। दूसरे निप्पल को उंगलियों से पिंच किया। प्रिया का शरीर सिहर उठा, वो करण के बालों में उंगलियां फेरने लगी। "हां... चूसो... जोर से काटो... आह..."
ड्राइवर, जो 45 साल का पतला लेकिन मजबूत आदमी था, नाम मनोज, पास आ गया। उसने प्रिया की साड़ी पूरी तरह खींच ली। अब प्रिया सिर्फ पेटीकोट और ब@@उज में थी। मनोज ने पेटीकोट ऊपर चढ़ाया, प्रिया की सफेद प@@%%ी दिख गई। उसने प@@%%ी उतार दी। प्रिया की च@@त गुलाबी, गीली और चमकती हुई थी, बाल साफ किए हुए। मनोज ने पहले च@@त पर हाथ फेरा, फिर एक उंगली अंदर डाली। प्रिया चिल्लाई – "ओह... हां... उंगली और अंदर... घुमाओ..." मनोज ने दो उंगलियां डालीं, तेज-तेज घुमाईं। प्रिया की कमर उछलने लगी। "आह... कितना अच्छा लग रहा है... और जोर से..."
करण अभी भी स्तनों से खेल रहा था। उसने प्रिया को सीट पर लिटा दिया। अब करण और मनोज दोनों ने अपनी पैंट उतारी। करण का ल@@ड मोटा था, लगभग 7 इंच लंबा, काला और मोटा जैसे कोई मोटी लकड़ी। मनोज का ल@@ड लंबा था, 8 इंच, लेकिन थोड़ा पतला। करण ने प्रिया की च@@त पर अपना ल@@ड रगड़ा। "तैयार है?" प्रिया ने हां में सिर हिलाया। करण ने धीरे से अंदर डाला, पहले सिर्फ टोपी, फिर आधा ल@@ड। प्रिया की च@@त टाइट थी, दर्द हुआ – "आह्ह... मोटा है... धीरे... फट रही है..." लेकिन मजा भी आ रहा था। करण ने पूरा ल@@ड अंदर पेल दिया। प्रिया की आंखें फैल गईं – "ओह... पूरा घुस गया... कितना भरा हुआ लग रहा है..." करण ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, हर धक्के में प्रिया की च@@त सिकुड़ती। "हां... तेज... च@@दो..."
मनोज ने प्रिया के मुंह में अपना ल@@ड डाल दिया। प्रिया ने चूसना शुरू किया, जीभ से चाटा। अब प्रिया दोनों तरफ से भर चुकी थी – करण नीचे से च@@द रहा था, मनोज मुंह में। प्रिया की सिसकारियां गूंज रही थीं – "उम्म... आह... दोनों... बहुत अच्छा... जोर से..." करण ने स्पीड बढ़ाई, धप-धप की आवाज बस में गूंजने लगी। मनोज ने प्रिया के बाल पकड़कर मुंह में धक्के मारे।
रोहन ये सब देख रहा था। पहले तो उसे गुस्सा आया, लेकिन जैसे-जैसे प्रिया की सिसकारियां सुनाई देने लगीं, उसका ल@@ड खड़ा हो गया। वो पैंट पर हाथ फेरने लगा। अब वो खुद को रोक नहीं पाया। वो पास आया और अपना ल@@ड प्रिया के मुंह में डाल दिया। मनोज ने जगह दी। प्रिया अब रोहन का ल@@ड चूसने लगी। "हां रोहन... तू भी..." रोहन ने कहा – "प्रिया... तू कितनी च@@ासी है... मजा आ रहा है ना?"
अब पोजीशन बदली। करण ने प्रिया को कुतिया स्टाइल में किया। प्रिया घुटनों पर थी। करण ने पीछे से च@@त में ल@@ड पेला। मनोज आगे से मुंह में। रोहन ने प्रिया की ग@@ड पर थप्पड़ मारा और उंगली डाली। फिर तेल लगाकर अपनी ग@@ड में ल@@ड डाला। प्रिया चिल्लाई – "आह्ह... तीनों तरफ... फट रही हूं... लेकिन मत रुको... जोर से..." तीनों ने स्पीड बढ़ाई। प्रिया के स्तन उछल रहे थे, करण ने पीछे से पकड़कर मसले। "आह... दर्द... मजा... आह..." प्रिया झड़ गई, उसकी च@@त सिकुड़कर रस छोड़ दिया।
फिर करण झड़ गया, च@@त में ही माल छोड़ दिया। "आह... कितना गर्म है..." मनोज ने मुंह में झड़ दिया, प्रिया ने निगल लिया। रोहन ने ग@@ड में झड़ दिया। सब हांफते हुए बैठ गए।
प्रिया मुस्कुराई – "अंकल, अब घर फोन नहीं करना ना?" करण ने हंसकर कहा – "नहीं बेटी, अगली बार फिर मिलेंगे।" मनोज ने बस स्टार्ट की। प्रिया और रोहन ने कपड़े ठीक किए। बस फिर चल पड़ी। प्रिया ने रोहन के कान में कहा – "मजा आया ना?" रोहन ने शरमाते हुए कहा – "हां... लेकिन अगली बार सिर्फ हम दोनों।" प्रिया हंस पड़ी।
