जवान भाभी की चु@@ई--->
दोपहर की उस तपती हुई खामोशी में मीरा अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी बाहर के सन्नाटे को देख रही थी। मीरा की उम्र करीब बत्तीस साल थी और उसका शरीर किसी तराशे हुए संगमरमर की मूर्ति की तरह सुडौल और भरा हुआ था। उसने एक झीनी सी सूती हरी साड़ी पहनी हुई थी जो उसकी गोरी त्वचा पर चिपक सी गई थी। उसके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो बस देखता ही रह जाए। उसके सीने पर उभरे हुए दो विशाल और रसीले तरबूज साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को आतुर दिख रहे थे। जैसे-जैसे वह लंबी सांसें ले रही थी, वे तरबूज ऊपर-नीचे हो रहे थे, जिससे ब्लाउज के बटन पर काफी दबाव पड़ रहा था। मीरा के चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी, जो उसकी आँखों में साफ झलक रही थी। उसका पति शहर गया हुआ था और घर में उसके अलावा सिर्फ उसका देवर राहुल था, जो अभी अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। मीरा को अपनी जवानी की इस आग का अहसास हो रहा था जो उसके भीतर धीरे-धीरे सुलग रही थी और जिसे बुझाने वाला कोई नहीं था।
मीरा का पिछवाड़ा काफी चौड़ा और मांसल था, जो साड़ी के घेरे में भी अपनी गोलाई का अहसास करा रहा था। जब वह चलती थी, तो उसका वह भारी पिछवाड़ा एक खास लय में हिलता था, जो किसी भी मर्द के मन में तूफान लाने के लिए काफी था। उसकी कमर पतली थी लेकिन उसके कूल्हे काफी भरे हुए थे, जो उसे एक परफेक्ट सैंडग्लास फिगर देते थे। मीरा की गोरी गर्दन पर पसीने की कुछ बूंदें चमक रही थीं, जो उसकी छाती के बीच की गहरी घाटी में जाकर खो रही थीं। उसके चेहरे की मासूमियत और उसके शरीर की कामुकता का मेल उसे और भी अधिक आकर्षक बना रहा था। वह अपनी उंगलियों से साड़ी के पल्लू को मरोड़ रही थी, जबकि उसका मन किसी अनजानी गहराई की ओर खिंचा जा रहा था। वह जानती थी कि राहुल उसे पसंद करता है, और उसकी नज़रों में अपने प्रति उस आकर्षण को वह कई बार महसूस कर चुकी थी। यही अहसास उसे एक अलग तरह के रोमांच और डर से भर देता था। नीचे 👇लिंक से पूरी कहानी पढ़ो
राहुल की उम्र बाईस साल थी और वह एक कसरती बदन का नौजवान था। उसकी चौड़ी छाती और मजबूत बाजू उसकी मर्दानगी का सबूत देते थे। वह काफी देर से अपनी किताब में मन लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार मीरा भाभी की उस मस्तानी चाल और उनके भारी तरबूजों की ओर चला जाता था। उसने महसूस किया कि उसके पजामे के अंदर उसका खीरा धीरे-धीरे आकार ले रहा है और सख्त होता जा रहा है। राहुल के मन में अपनी भाभी के प्रति सम्मान तो था, लेकिन उसकी रगों में दौड़ता हुआ जवान खून उसे बार-बार मीरा के करीब जाने के लिए उकसा रहा था। वह बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, और उसका दिमाग सिर्फ एक ही कल्पना में डूबा हुआ था – मीरा भाभी का वह बदन जिसे वह अपनी बाहों में भरना चाहता था। उसे याद आया कि कैसे सुबह रसोई में काम करते वक्त मीरा का पल्लू गिर गया था और उसने उनके उन गोरे तरबूजों की एक झलक देख ली थी, जिसके मटर जैसे दाने ठंडक की वजह से उभरे हुए थे।
तभी अचानक मीरा के कमरे से कुछ गिरने की आवाज़ आई। राहुल तुरंत उठकर उनके कमरे की तरफ भागा। जब वह कमरे में पहुँचा, तो देखा कि मीरा ज़मीन पर झुकी हुई कुछ उठाने की कोशिश कर रही थी। उस अवस्था में उसका भारी पिछवाड़ा राहुल की आँखों के बिल्कुल सामने था, जो साड़ी के कपड़े को पूरी तरह से खींच रहा था। राहुल की धड़कनें तेज़ हो गईं और उसके खीरे ने अपनी पूरी लंबाई हासिल कर ली। मीरा ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा, उसकी आँखें राहुल की आँखों से मिलीं। कमरे में एक सन्नाटा छा गया, जिसमें सिर्फ उन दोनों की तेज़ होती साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। मीरा की आँखों में एक तरफ शर्म थी तो दूसरी तरफ दबी हुई इच्छा। राहुल ने हिम्मत जुटाई और धीरे से मीरा की तरफ कदम बढ़ाया। मीरा वहीं जमी रही, उसने भागने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि उसकी साँसें और भी तेज़ हो गईं, जिससे उसके तरबूज तेज़ी से धड़कने लगे।
राहुल ने जब मीरा के पास पहुँचकर अपना हाथ उसकी रेशमी कमर पर रखा, तो मीरा के पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। वह कांप उठी और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। राहुल का हाथ धीरे-धीरे उसकी पीठ पर ऊपर की ओर सरकने लगा। मीरा ने एक गहरी आह भरी और अपना सिर राहुल के कंधे पर टिका दिया। अब झिझक की सारी दीवारें टूट चुकी थीं। राहुल ने मीरा के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपना रसपान शुरू कर दिया। उन दोनों के होंठ एक-दूसरे में इस कदर उलझ गए जैसे बरसों की प्यास बुझा रहे हों। राहुल की जीभ मीरा के मुँह के कोने-कोने को चख रही थी, और मीरा भी उसका पूरा साथ दे रही थी। इस पहले स्पर्श ने उन दोनों के भीतर छिपी कामुकता की आग को और भी भड़का दिया था। राहुल का हाथ अब मीरा की साड़ी के अंदर जाकर उसके रेशमी बदन को महसूस कर रहा था, जिससे मीरा की आहें और भी गहरी होती जा रही थीं।
धीरे-धीरे राहुल ने मीरा की साड़ी के पल्लू को उसके कंधे से नीचे गिरा दिया। मीरा का गोरा बदन अब सिर्फ उस छोटे से ब्लाउज में था जो उसके भारी तरबूजों को सँभालने में नाकाम हो रहा था। राहुल ने अपनी उंगलियों से ब्लाउज के बटनों को एक-एक करके खोलना शुरू किया। जैसे ही आखिरी बटन खुला, मीरा के दोनों विशाल तरबूज आज़ाद होकर बाहर निकल आए। वे इतने गोरे और गोल थे कि राहुल बस उन्हें देखता रह गया। उन पर मौजूद गुलाबी मटर पूरी तरह से तन चुके थे। राहुल ने झुककर एक मटर को अपने मुँह में ले लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगा। मीरा ने दर्द और लज़्ज़त के मिले-जुले अहसास में अपना सिर पीछे झुका लिया और राहुल के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा दीं। उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं। राहुल अब दोनों हाथों से उन तरबूजों को मसल रहा था, जैसे वह उनका सारा रस निचोड़ लेना चाहता हो।
मीरा की उत्तेजना अब अपने चरम पर थी। उसने राहुल के पजामे के नाड़े को खोला और उसके अंदर छिपे हुए गर्म और सख़्त खीरे को बाहर निकाला। जब उसने उस विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईँ। वह पूरी तरह से तना हुआ और रगों से भरा हुआ था। मीरा ने झुककर उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चखने लगी। राहुल को ऐसा लगा जैसे वह जन्नत में पहुँच गया हो। मीरा की जीभ जब खीरे के ऊपरी हिस्से पर फिर रही थी, तो राहुल के मुँह से कराह निकल रही थी। मीरा उस खीरे को गहराई तक अपने गले में उतार रही थी, जिससे राहुल का शरीर कंपकपाने लगा। उसने मीरा को उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। अब दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र थे। मीरा की जांघों के बीच की वह गहरी और नम खाई अब पूरी तरह से राहुल के स्वागत के लिए तैयार थी।
राहुल ने मीरा की जांघों को फैलाया और उसकी उस रेशमी खाई को निहारने लगा। वहाँ के बाल करीने से कटे हुए थे और खाई से हल्का-हल्का रस निकल रहा था। राहुल ने अपनी उंगली उस खाई में डाली और उसे धीरे-धीरे हिलाने लगा। मीरा बिस्तर पर तड़पने लगी और अपनी कमर ऊपर उठाने लगी। वह बार-बार कह रही थी, "राहुल, और नहीं... अब मुझे वो खीरा चाहिए, मुझे खोद दो राहुल!" राहुल ने और इंतज़ार नहीं कराया। उसने अपने खीरे को मीरा की खाई के मुहाने पर रखा। मीरा ने अपना पिछवाड़ा ऊपर उठाया ताकि वह आसानी से प्रवेश कर सके। जैसे ही राहुल ने एक ज़ोरदार धक्का मारा, आधा खीरा उस तंग खाई के अंदर समा गया। मीरा के मुँह से एक चीख़ निकल गई, लेकिन वह चीख़ दर्द की नहीं बल्कि एक असीम आनंद की थी। उस तंग खाई ने खीरे को हर तरफ से जकड़ लिया था।
राहुल ने अब अपनी गति बढ़ानी शुरू कर दी। वह पूरी ताक़त से मीरा को खोद रहा था। हर धक्के के साथ मीरा का पूरा शरीर हिल रहा था और उसके भारी तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। कमरे में सिर्फ उन दोनों के शरीरों के टकराने की आवाज़ गूँज रही थी। मीरा राहुल की पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थी और पागलों की तरह उसे चूम रही थी। वह चिल्ला रही थी, "हाँ राहुल, और तेज़... अपनी इस भाभी की खाई को पूरी तरह से भर दो!" राहुल की खुदाई अब और भी गहरी और दमदार हो गई थी। वह कभी उसे सामने से खोदता तो कभी उसे पलटकर उसके पिछवाड़े की तरफ से खुदाई शुरू कर देता। मीरा की हालत अब ऐसी थी कि वह बस रस छोड़ने के करीब थी। उसकी आवाज़ अब गले में ही दब रही थी और उसका शरीर पसीने से नहा चुका था।
काफी देर तक चली इस ज़बरदस्त खुदाई के बाद, राहुल को महसूस हुआ कि अब उसका रस निकलने वाला है। उसने अपनी गति को और भी तेज़ कर दिया। मीरा भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी। अचानक मीरा का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा। ठीक उसी पल राहुल ने भी अपना पूरा गरम रस मीरा की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए बिस्तर पर गिर पड़े। उनकी साँसें अभी भी उखड़ी हुई थीं, लेकिन उनके चेहरों पर एक अजीब सी संतुष्टि थी। मीरा ने राहुल को अपने सीने से लगा लिया और उसके माथे को चूमा। उस कमरे की हवा में अब एक अजीब सी खुशबू और सुकून फैल चुका था। मीरा को लग रहा था जैसे उसकी बरसों की प्यास आज जाकर बुझी हो।
खुदाई के बाद की वह हालत बड़ी ही भावुक थी। मीरा और राहुल बिना कुछ बोले एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। मीरा के बाल बिखरे हुए थे और उसकी आँखों में अब वह बेचैनी नहीं बल्कि एक गहरा प्यार था। राहुल ने महसूस किया कि यह रिश्ता सिर्फ शरीर का नहीं बल्कि रूह का भी हो गया है। उसने मीरा के पसीने से भीगे बदन को सहलाया और उसे फिर से अपनी बाहों में भींच लिया। मीरा ने धीरे से कहा, "तुमने आज मुझे वो सुख दिया है जो मुझे कभी नहीं मिला था।" राहुल ने उसके होंठों को फिर से छुआ और वादा किया कि वह हमेशा उसका ख्याल रखेगा। उस दोपहर के सन्नाटे ने एक ऐसी कहानी लिख दी थी, जो उन दोनों के दिलों में हमेशा के लिए दफन हो गई थी, लेकिन जिसकी मिठास वे ताउम्र महसूस करते रहेंगे।