ऑफिस में राधिका की खुदाई


रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरी बहुमंजिला इमारत के उस फ्लोर पर केवल सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसे केवल एयर कंडीशनर की हल्की सी गूँज ही तोड़ रही थी। राधिका, जो कि समीर की सीनियर मैनेजर थी, आज अपनी मेज पर ढेर सारी फाइलों के साथ बैठी हुई थी और समीर भी उसके साथ प्रोजेक्ट पूरा करने में लगा था। राधिका की उम्र करीब पैंतीस साल थी, लेकिन उसकी खूबसूरती और छरहरा बदन किसी भी जवान लड़के को पागल करने के लिए काफी था। आज उसने गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जो उसके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। समीर का ध्यान बार-बार फाइलों से हटकर राधिका के उस गहरे गले के ब्लाउज की ओर जा रहा था, जहाँ से उसके सुडौल और भारी तरबूज साफ़ झलक रहे थे।

राधिका की साड़ी का पल्लू बार-बार उसके कंधे से फिसल रहा था, जिससे उसके तरबूजों की गोलाई और उनके बीच की गहरी घाटी समीर की आँखों के सामने बार-बार आ रही थी। राधिका ने महसूस किया कि समीर उसे देख रहा है, लेकिन उसने उसे टोका नहीं, बल्कि अपनी नजरें झुकाकर मुस्कुरा दी। समीर के मन में एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना पैदा हो रही थी, क्योंकि रेशमी कपड़े के ऊपर से ही राधिका के उभरे हुए मटर साफ़ दिखाई दे रहे थे, जो ठंड और उत्तेजना की वजह से सख्त हो चुके थे। समीर के शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गई और उसका खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने लगा, जिससे उसकी पैंट में खिंचाव महसूस होने लगा था।

काम खत्म होने के बाद जब दोनों कॉफी पीने के लिए ब्रेक रूम की ओर बढ़े, तो गलियारे की कम रोशनी में दोनों के बीच का तनाव और बढ़ गया। समीर ने हिम्मत जुटाकर राधिका के करीब जाने की कोशिश की और तभी राधिका का पैर हल्का सा फिसला। समीर ने फुर्ती से उसे अपनी बाँहों में थाम लिया, जिससे राधिका का पूरा वजन समीर के ऊपर आ गया और उसके नरम तरबूज समीर की छाती से जोर से टकराए। उस स्पर्श ने जैसे दोनों के दिलों में आग लगा दी। राधिका ने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर की गर्दन के पास अपनी गरम साँसें छोड़ने लगी। समीर का हाथ धीरे-धीरे राधिका की पीठ पर रेंगने लगा और उसने महसूस किया कि राधिका का शरीर काँप रहा है।

समीर ने धीरे से राधिका को पास के सोफे पर बिठाया और उसकी आँखों में झाँकते हुए उसकी गुलाबी पंखुड़ियों जैसे होठों पर अपना प्यार बरसाना शुरू कर दिया। राधिका ने भी कोई विरोध नहीं किया, बल्कि समीर के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा लीं। समीर का एक हाथ राधिका की साड़ी के पल्लू को हटाते हुए उसके रेशमी ब्लाउज के अंदर घुस गया और उसने उन मखमली तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया। जब समीर ने अपनी उंगलियों से उन सख्त हो चुके मटरों को सहलाया, तो राधिका के मुँह से एक धीमी आह निकली। उसकी उत्तेजना चरम पर थी और वह समीर के खीरे को अपनी साड़ी के ऊपर से ही महसूस कर पा रही थी।

धीरे-धीरे कपड़े उतरने लगे और राधिका का पूरा नग्न बदन समीर के सामने था। उसके शरीर की बनावट देख समीर की आँखें फटी की फटी रह गई; उसके भारी तरबूज, पतली कमर और उसके नीचे बालों से घिरी हुई वह रसभरी खाई किसी जन्नत से कम नहीं लग रही थी। समीर ने नीचे झुककर राधिका की उस गहरी खाई को निहारना शुरू किया और फिर अपनी जीभ से उस खाई को चाटना शुरू कर दिया। राधिका सिसकियाँ लेने लगी और समीर के सिर को अपनी ओर और जोर से दबाने लगी। खाई चाटने के उस सुख ने राधिका को पूरी तरह से मदहोश कर दिया था और उसका शरीर धनुष की तरह ऊपर की ओर तन रहा था।

अब राधिका की बारी थी, उसने समीर को सोफे पर लिटाया और उसके खीरे को अपने हाथों में लेकर उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस किया। राधिका ने धीरे से समीर के खीरे को अपने मुँह में लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। समीर की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वह बस उस अद्भुत सुख का आनंद लेने लगा। राधिका बहुत ही सलीके से खीरा चूस रही थी, जिससे समीर का पूरा शरीर उत्तेजना से काँप रहा था। जब समीर को लगा कि अब वह और बर्दाश्त नहीं कर पाएगा, तो उसने राधिका को सीधा लिटाया और उसकी जाँघों के बीच अपनी जगह बनाई ताकि वह खुदाई शुरू कर सके।

समीर ने अपने खीरे का सिरा राधिका की उस भीगी हुई और तंग खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से धक्का दिया। राधिका ने एक दर्द भरी लेकिन सुखद कराह भरी क्योंकि समीर का खीरा काफी मजबूत और बड़ा था। समीर ने धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया और जैसे-जैसे वह अंदर-बाहर हो रहा था, राधिका की खाई से एक गीली आवाज़ आने लगी। कमरे में केवल उनकी साँसों और खुदाई की आवाज़ गूँज रही थी। समीर की हर चोट राधिका के शरीर के अंतर्मन तक पहुँच रही थी। राधिका ने अपनी टांगें समीर की कमर के चारों ओर लपेट लीं ताकि वह और गहराई तक खुदाई कर सके और समीर के खीरे को पूरी तरह महसूस कर सके।

कुछ देर सामने से खोदने के बाद, समीर ने राधिका को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की पोजीशन में खड़ा कर दिया। पीछे से देखने पर राधिका के भारी तरबूज नीचे की ओर झूल रहे थे और उसका पिछवाड़ा हवा में तना हुआ था। समीर ने बिना देर किए अपने खीरे को फिर से राधिका की खाई में पीछे से उतारा। यह पोजीशन राधिका को और भी अधिक सुख दे रही थी। समीर के हर धक्के के साथ राधिका की चीखें निकलने लगी थीं और वह बार-बार 'ओह समीर, और तेज खोदो' कह रही थी। पसीने से लथपथ दोनों शरीर एक दूसरे में पूरी तरह समा चुके थे और उस रात ऑफिस का वह केबिन एक प्रेम मंदिर बन गया था।

खुदाई की गति अब बहुत तेज हो चुकी थी, दोनों अपने चरम आनंद की ओर बढ़ रहे थे। समीर का खीरा पूरी ताकत से राधिका की खाई की दीवारों से टकरा रहा था और राधिका के शरीर में झटके लग रहे थे। अचानक राधिका का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस छूटने लगा। उसी पल समीर ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी और उसका सारा रस राधिका की गहरी खाई के अंदर भर गया। दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े, लंबी-लंबी साँसें लेते हुए। वह पल शांति और संतुष्टि का था, जहाँ शब्द छोटे पड़ गए थे और केवल जिस्मों की राहत ही सब कुछ बयां कर रही थी।

काफी देर तक दोनों उसी अवस्था में लेटे रहे, जैसे कि दुनिया की कोई चिंता ही न हो। राधिका ने समीर के माथे को चूमा और उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। उन्होंने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने और ऑफिस की लाइट्स बंद कीं। बाहर की ताजी हवा ने उनके चेहरों को छुआ, जिससे उन्हें एक नई ताजगी का अहसास हुआ। वह रात केवल शारीरिक सुख की नहीं थी, बल्कि दो अकेले मन के जुड़ाव की भी थी। समीर और राधिका एक दूसरे का हाथ थामे अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ गए, यह जानते हुए कि अब उनके बीच का रिश्ता पहले जैसा नहीं रहेगा, बल्कि यह खुदाई की याद हमेशा उनके दिलों में एक खास जगह बनाए रखेगी।