रीना चाची की मदहोश कर देने वाली खुदाई


दोपहर की वह खामोश बेला जब सूरज की तपिश खिड़कियों के पर्दों से छनकर कमरे में आ रही थी, आर्यन अपनी चाची रीना के साथ बैठा हुआ था। रीना चाची की उम्र पैंतीस के करीब थी, लेकिन उनके बदन की सुडौलता और कसावट किसी जवान लड़की को मात दे सकती थी। उन्होंने एक पारदर्शी सूती साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें से उनके शरीर के उतार-चढ़ाव साफ झलक रहे थे। आर्यन की नजरें बार-बार उनके सीने पर टिक जाती थीं, जहाँ उनके गोल और रसीले तरबूज साड़ी के पतले कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे।

रीना चाची ने आर्यन की नजरों को महसूस किया और एक हल्की सी मुस्कान उनके होंठों पर तैर गई, जिसमें एक अजीब सी शरारत और आमंत्रण था। आर्यन ने गौर किया कि साड़ी के नीचे उनके तरबूजों के बीच का गहरा रास्ता कितना मनमोहक लग रहा था और उनके गुलाबी मटर कपड़े के ऊपर से ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे। कमरे में सन्नाटा था, सिर्फ कूलर की मध्यम आवाज आ रही थी, लेकिन दोनों के दिलों की धड़कनें एक अलग ही संगीत सुना रही थीं। आर्यन का मन कर रहा था कि वह बस उन तरबूजों को हाथों में भर ले।

बातों-बातों में आर्यन उनके करीब खिसक गया और उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिया, जिससे रीना चाची के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। रीना ने अपनी आँखें मूंद लीं और एक लंबी आह भरी, जैसे वह सालों से इसी स्पर्श का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने आर्यन की ओर मुड़कर देखा और उनकी आँखों में छुपी हुई आग अब साफ दिखने लगी थी। आर्यन ने धीरे से अपना हाथ उनके कंधे से नीचे की ओर सरकाया और उनके रेशमी बदन की गर्मी महसूस करने लगा। अब दोनों के बीच कोई पर्दा नहीं बचा था।

आर्यन ने धीरे से उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके गुलाबी होंठों को अपने काबू में कर लिया, जिससे रीना चाची का शरीर धनुष की तरह तन गया। उनकी सांसें तेज चलने लगी थीं और वह आर्यन के करीब और ज्यादा आने की कोशिश करने लगीं। आर्यन का हाथ साड़ी के पल्लू को हटाकर उनके रसीले तरबूजों पर पहुँच गया था, जिन्हें वह अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। रीना चाची के मुंह से एक धीमी सी कराह निकली जब आर्यन ने उनके मटरों को अपनी दो उंगलियों के बीच दबाकर हल्का सा मरोड़ा।

गर्मी इतनी बढ़ गई थी कि आर्यन ने जल्दी से रीना चाची के सारे कपड़े उतार दिए और अब वह कुदरत के एक अनमोल तोहफे की तरह उसके सामने नग्न पड़ी थीं। उनके पैरों के बीच की वह गहरी और नम खाई अब आर्यन की नजरों के सामने थी, जहाँ काले-काले घुंघराले बाल उस रहस्यमयी रास्ते की रखवाली कर रहे थे। आर्यन ने झुककर उस खाई को अपनी जुबान से सहलाना शुरू किया, जिससे रीना चाची बिस्तर की चादरों को अपनी मुट्ठियों में भींचने लगीं। उनका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था और वह लगातार अपनी कमर ऊपर उठा रही थीं।

अब आर्यन का खीरा पूरी तरह से अकड़ चुका था और वह अपनी खुदाई शुरू करने के लिए बेकरार था। उसने अपना खीरा रीना चाची के मुंह के करीब ले गया और उन्होंने बड़े ही प्यार से उसे अपने मुंह में भर लिया। वह उसे किसी कैंडी की तरह चूसने लगीं, जिससे आर्यन की आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। रीना चाची की जुबान जब खीरे के ऊपरी हिस्से पर फिरती थी, तो आर्यन को ऐसा महसूस होता था जैसे उसके शरीर के हर पोर से बिजली की लहरें दौड़ रही हों।

कुछ देर चूसने के बाद आर्यन ने उन्हें सीधा लिटाया और सामने से खुदाई शुरू करने के लिए तैयार हो गया। उसने अपने खीरे को रीना चाची की गीली खाई के द्वार पर रखा और एक ही झटके में उसे अंदर धकेल दिया। रीना चाची की एक चीख निकली, जो दर्द की नहीं बल्कि एक असीम आनंद की थी। आर्यन ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और हर धक्का चाची के भीतर तक महसूस हो रहा था। उनकी खाई से निकलने वाला रस अब खुदाई को और भी आसान और आनंदमयी बना रहा था।

रीना चाची ने अपनी टांगे आर्यन की कमर के चारों ओर लपेट लीं ताकि वह और गहराई तक खुदाई कर सके। 'ओह आर्यन, और तेज खोदो, मुझे आज पूरा भर दो,' रीना ने कराहते हुए कहा। कमरे में मांस के मांस से टकराने की चप-चप की आवाजें गूँज रही थीं। आर्यन अब पूरी ताकत से प्रहार कर रहा था और रीना चाची का शरीर हर धक्के के साथ हिल रहा था। उनके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन बारी-बारी से उन्हें अपने मुंह में भरकर चूस रहा था।

फिर आर्यन ने उन्हें घुमाकर बिस्तर पर लिटा दिया और पिछवाड़े से खुदाई शुरू की। यह स्थिति और भी कामुक थी क्योंकि अब आर्यन को उनके पूरे बदन का पिछला हिस्सा साफ दिखाई दे रहा था। उसने अपनी उंगली से पहले उनकी खाई को सहलाया और फिर खीरे को अंदर उतार दिया। रीना चाची ने अपने हाथ बिस्तर के सिरहाने पर टिका दिए और जोर-जोर से सिसकने लगीं। खुदाई अब अपने चरम पर पहुँच रही थी और दोनों का शरीर पसीने से लथपथ होकर चमक रहा था।

अंत में आर्यन ने रफ्तार को अपनी चरम सीमा पर पहुँचा दिया और कुछ ही पलों बाद उसके खीरे से गरम-गरम रस निकलने लगा जो सीधे रीना चाची की खाई के भीतर समा गया। उसी पल रीना चाची का भी रस छूट गया और वह निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ीं। दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे और उनकी तेज चलती सांसें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। उस खुदाई ने न केवल उनके शरीर की प्यास बुझाई थी, बल्कि उनके दिलों के बीच एक अटूट और गहरा रिश्ता भी कायम कर दिया था।