गाँव की उस शांत और उमस भरी दोपहर में जब सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था, मैं अपनी मीरा मामी के पुराने पुश्तैनी घर पहुँचा। मामी की उम्र करीब पैंतीस साल रही होगी, लेकिन उनके बदन की बनावट किसी बीस साल की कली जैसी कसी हुई और सुडौल थी। जब उन्होंने मुस्कराते हुए दरवाज़ा खोला, तो उनकी पतली सूती साड़ी उनके भारी भरकम तरबूजों को बड़ी मुश्किल से ढक पा रही थी, और चलते वक्त उनके चौड़े पिछवाड़े का जो जबरदस्त उभार दिख रहा था, उसने पहली ही नज़र में मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। उनके चेहरे पर वही पुरानी सादगी भरी मुस्कान थी, लेकिन उनकी कजरारी आँखों में एक गहरा सूनापन और एक दबी हुई प्यास साफ़ झलक रही थी, जिसे मैं अपनी युवा नजरों से भांप पा रहा था।
शाम ढलते ही घर के खुले बरामदे में हम दोनों अकेले बैठे थे और ठंडी हवाओं का आनंद ले रहे थे। मामी ने जब चाय का प्याला मेरी ओर बढ़ाया, तो उनकी कोमल उँगलियाँ अनायास ही मेरे हाथ से टकरा गईं और एक बिजली सी मेरे पूरे वजूद में दौड़ गई। उनके ब्लाउज के टाइट कपड़े के भीतर छिपे मटर जैसे निप्पल साड़ी के ऊपर से ही अपनी उभरी हुई मौजूदगी का अहसास करा रहे थे, जिसे देखकर मेरा खीरा मेरी पैंट के अंदर ही अंगड़ाइयाँ लेने लगा था और सख्त होता जा रहा था। हम पुरानी यादों के बारे में बातें तो कर रहे थे, लेकिन मेरा सारा ध्यान बार-बार उनकी गहरी रेशमी खाई की ओर भटक रहा था, जो झुकते वक्त साड़ी के पल्लू के नीचे से साफ़ अपनी गहराई बयां कर रही थी। उस पल में मेरे मन में शर्म और हवस के बीच एक बहुत ही गहरा और रोमांचक द्वंद्व चल रहा था।
रात के खामोश सन्नाटे में जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो चुकी थी, मैं प्यास के बहाने रसोई की ओर गया जहाँ मामी पहले से ही पानी का गिलास लिए खड़ी थीं। खिड़की से आती चाँदनी की मद्धम रोशनी उनके गोरे बदन पर पड़ रही थी, जिससे उनके तरबूज और भी रसीले, बड़े और कामुक लग रहे थे। मैंने हिम्मत जुटाकर पीछे से जाकर धीरे से उनकी पतली कमर पर अपने हाथ रखे, तो वो एक पल के लिए कांप उठीं लेकिन उन्होंने मेरा हाथ हटाया नहीं। उनकी साँसें अचानक तेज़ हो गई थीं और मेरे कड़े खीरे की जबरदस्त सख्ती अब उनके मुलायम पिछवाड़े पर साफ़ महसूस हो रही थी। मैंने अपनी जुबान से उनकी गर्दन के पिछले हिस्से का रस लेना शुरू किया, जिससे उनके मुँह से हल्की-हल्की सिसकियाँ गूँजने लगीं और वातावरण में कामुकता का जहर घुलने लगा।
मामी ने धीरे से पलटकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होठों को अपने होठों के रस में डुबो दिया। उनके मुँह से निकलने वाली गर्म आहें और मदहोश कर देने वाली खुशबू मेरे जोश को कई गुना बढ़ा रही थी। मैंने बड़ी बेताबी से उनके ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोले और उन दोनों विशाल तरबूजों को उनके बंधन से आज़ाद कर दिया। जैसे ही मेरी उँगलियाँ उनके गुलाबी और सख्त मटर से टकराईं, वो पूरी तरह बेहाल होकर झूमने लगीं। मैंने धीरे-धीरे उनकी साड़ी और पेटीकोट को नीचे सरका दिया और उस गहरी रेशमी खाई तक पहुँच गया, जहाँ उत्तेजना के कारण पहले से ही काफी चिपचिपी नमी जमा हो चुकी थी। मेरी उंगलियों ने उस खाई की गहराई को टटोलना शुरू किया, जिससे मामी का पूरा शरीर धनुष की तरह मुड़ने लगा।
अब सब्र का बांध पूरी तरह से टूट चुका था और हम दोनों ही इस जिस्मानी मिलन के लिए बेताब थे। मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटाया और उनके दोनों पैरों को फैलाकर उस गीली खाई के मुहाने पर अपना फन फैलाता हुआ खीरा टिका दिया। जैसे ही मैंने धीरे से दबाव डाला, मामी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और तकिये को मजबूती से पकड़ लिया। मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा खीरा उनकी तंग और रसीली खाई के अंदर उतार दिया। वह अहसास इतना सुखद और गर्म था कि हम दोनों के मुँह से एक साथ आह निकल पड़ी। मामी की खाई इतनी तंग थी कि मेरा खीरा हर धक्के के साथ उनकी दीवारों को रगड़ते हुए अंदर जा रहा था, जिससे पैदा होने वाली सनसनी हमें किसी दूसरी ही दुनिया में ले जा रही थी।
मैंने अब पूरी लय के साथ सामने से खुदाई शुरू कर दी थी। हर धक्के के साथ उनके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके मटर की लाली और बढ़ती जा रही थी। कमरे में केवल हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़ और मामी की बेकाबू होती सिसकियाँ गूँज रही थीं। मामी बार-बार मेरे कानों में फुसफुसा रही थीं, 'और तेज़ करो आर्यन, आज मुझे पूरी तरह से खोदो, बहुत सालों की प्यास है।' उनकी इन बातों ने मेरे अंदर एक नई ऊर्जा भर दी और मैंने खुदाई की गति को और बढ़ा दिया। उनकी खाई अब पूरी तरह से मेरे रस से सराबोर होने लगी थी और घर्षण की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।
कुछ देर बाद मैंने उन्हें घुमाकर उनके घुटनों के बल खड़ा कर दिया और पिछवाड़े से खुदाई शुरू की। पीछे से उनके उभरे हुए पिछवाड़े के बीच जब मेरा खीरा अंदर-बाहर हो रहा था, तो नज़ारा बहुत ही कामुक था। मामी उत्तेजना के चरम पर पहुँच चुकी थीं, उनका शरीर थरथराने लगा था। अंत में, हम दोनों ने एक-दूसरे को कसकर जकड़ लिया और एक जबरदस्त झटके के साथ मेरा पूरा रस उनकी खाई की गहराइयों में छूट गया। मामी ने भी अपना सारा रस निकाल दिया और हम दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे की बाहों में गिर पड़े। उस खुदाई के बाद जो सुकून उनके चेहरे पर था, वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था। हम घंटों तक ऐसे ही लेटे रहे, उस अहसास को महसूस करते हुए जो अब हमारे बीच एक अटूट और गुप्त रिश्ता बन चुका था।