सख्त बॉस रितु की ऑफिस में खुदाई
दफ्तर की घड़ी में रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे और पूरी गगनचुंबी इमारत में खामोशी का राज था। अमन और उसकी बॉस रितु एक बहुत ही पेचीदा प्रोजेक्ट की डेडलाइन खत्म करने के लिए ऑफिस में अकेले रुके हुए थे। रितु, जो अपनी सख्ती के लिए मशहूर थी, आज एक गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी में बेहद कयामत लग रही थी। उसके चेहरे पर थकान के बावजूद एक ऐसी कशिश थी जो अमन को बार-बार अपनी ओर खींच रही थी। अमन के केबिन की लाइटें हल्की थीं, जिससे माहौल में एक अजीब सी गर्माहट और नजदीकी का अहसास पैदा हो रहा था।
रितु जब फाइलें देखने के लिए अमन के करीब आई, तो अमन की सांसें उसके जिस्म की खुशबू से महक उठीं। रितु के शरीर की बनावट किसी तराशी हुई मूरत जैसी थी, जहाँ उसके ब्लाउज के भीतर दबे गोल और रसीले तरबूज साड़ी की परत से बाहर आने को बेताब दिख रहे थे। अमन का ध्यान बार-बार उन तरबूजों के बीच की गहरी लकीर पर जा रहा था, जो उसकी उत्तेजना को धीरे-धीरे बढ़ा रही थी। रितु की कमर का लचीलापन और उसके भारी पिछवाड़े की गोलाई साड़ी के कपड़े के नीचे से साफ झलक रही थी, जिसे देख अमन के मन में हलचल मचने लगी थी।
अमन और रितु के बीच हमेशा एक पेशेवर रिश्ता रहा था, लेकिन आज रात की तन्हाई ने भावनाओं के बांध तोड़ दिए थे। रितु ने अपनी चश्मा उतारकर मेज पर रखा और अमन की ओर एक गहरी नज़र से देखा, जिसमें काम की थकान कम और एक दबी हुई प्यास ज़्यादा नज़र आ रही थी। अमन को महसूस हुआ कि रितु भी इस सन्नाटे में उसके करीब आने का बहाना ढूंढ रही है। उनके बीच की बातचीत अब सिर्फ फाइल और डेटा तक सीमित नहीं रही थी, बल्कि आवाज़ों में एक नरमी और आँखों में एक अनकहा इकरार जन्म ले चुका था।
अचानक रितु का हाथ गलती से अमन के हाथ पर पड़ा, और जैसे पूरे कमरे में बिजली की एक लहर दौड़ गई। दोनों में से किसी ने भी हाथ पीछे नहीं खींचा, बल्कि अमन ने धीरे से अपनी उंगलियां रितु की हथेली पर फेरना शुरू कर दिया। रितु की सांसें तेज़ हो गई थीं और उसके चेहरे पर एक हल्की सी सुर्खी छा गई थी। वह थोड़ा हिचकिचाई, उसके मन में अपने पद और मर्यादा का ख्याल आया, लेकिन जिस्म की मांग और बरसों की तन्हाई ने उसे अमन की ओर झुकने पर मजबूर कर दिया। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेबसी और बेपनाह चाहत का संगम था।
अमन ने हिम्मत जुटाकर रितु को अपनी ओर खींचा और उसके गुलाबी होंठों का रस पीना शुरू कर दिया। रितु ने पहले तो हल्का प्रतिरोध किया, लेकिन फिर उसने अपनी बाहें अमन के गले में डाल दीं और पूरी शिद्दत से उसका साथ देने लगी। अमन के हाथ अब रितु के उन रेशमी तरबूजों पर थे, जिन्हें वह बड़े प्यार से सहला रहा था। साड़ी के ऊपर से ही उन तरबूजों की मटर जैसी सख्त हो चुकी घुंडियों को महसूस करना अमन के लिए किसी स्वर्ग के सुख से कम नहीं था। रितु के मुँह से निकलने वाली सिसकियां दफ्तर के उस खाली कमरे में गूंजने लगी थीं।
जल्द ही साड़ी के बंधन खुल गए और रितु का बेदाग गोरा शरीर अमन की आँखों के सामने था। अमन ने धीरे से रितु को टेबल पर लिटाया और उसकी जांघों के बीच की नम और गहरी खाई को अपनी उंगली से खोदना शुरू कर दिया। रितु अपनी कमर ऊपर उठा-उठाकर अमन का साथ दे रही थी और उसकी उंगलियों के स्पर्श से उसका बुरा हाल हो रहा था। अमन ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और रितु की खाई को चाटना शुरू किया, जिससे रितु के शरीर में एक जोरदार कंपन पैदा हुआ और वह अमन के बालों को मजबूती से पकड़कर अपनी आहें भरने लगी।
अब अमन का सब्र जवाब दे चुका था, उसका खीरा पूरी तरह से सख्त और खड़ा हो चुका था। उसने अपनी पैंट उतारी और अपने भारी खीरे को रितु की रेशमी खाई के मुहाने पर रखा। रितु ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अमन को अंदर आने का इशारा किया। अमन ने एक जोरदार धक्का दिया और अपना पूरा खीरा रितु की तंग खाई में उतार दिया। रितु के मुँह से एक लंबी चीख निकली जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी। रितु की खाई इतनी तंग और गर्म थी कि अमन को महसूस हुआ जैसे वह किसी दहकते हुए ज्वालामुखी में समा गया हो।
अमन ने सामने से खोदना (मिशनरी) शुरू किया, हर धक्के के साथ रितु के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और मेज पर रखी फाइलें बिखर रही थीं। 'ओह अमन, और तेज़ खोदो, मुझे पूरा भर दो,' रितु के ये शब्द अमन की आग में घी का काम कर रहे थे। कुछ देर बाद अमन ने रितु को मेज के सहारे झुकाया और पिछवाड़े से खोदना (डॉगी स्टाइल) शुरू किया। पीछे से रितु के भारी पिछवाड़े पर पड़ने वाले थप्पड़ों की आवाज़ पूरे केबिन में गूंज रही थी। रितु के शरीर से पसीना बह रहा था और उसकी सांसें उखड़ने लगी थीं, वह बस पूरी तरह से अमन के खीरे को महसूस करना चाहती थी।
खुदाई की यह प्रक्रिया अपने चरम पर पहुँच गई थी, जहाँ दोनों का बदन पसीने से तर-बतर था। अमन की रफ्तार अब बहुत तेज़ हो चुकी थी और रितु की खाई से निकलने वाली गीली आवाज़ें माहौल को और भी कामुक बना रही थीं। अचानक रितु का पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी खाई की दीवारों ने अमन के खीरे को जोर से जकड़ लिया। रितु का रस निकलना शुरू हो गया था और वह बुरी तरह कांपने लगी। ठीक उसी पल अमन ने भी अपना सारा गर्म रस रितु की गहरी खाई के अंदर उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे में सिमटे हुए काफी देर तक वैसे ही पड़े रहे।
थोड़ी देर बाद जब दोनों की सांसें सामान्य हुईं, तो कमरे में एक सुकून भरी खामोशी छा गई। रितु ने अपने बिखरे बाल सवारे और अमन की ओर देखकर एक धीमी मुस्कान दी, जिसमें अब कोई बॉस वाली सख्ती नहीं थी। उसने धीरे से अमन के माथे को चूमा और अपनी साड़ी फिर से लपेटने लगी। आज की उस रात ने उन दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता बना दिया था जो किसी कागज़ या औहदे का मोहताज नहीं था। ऑफिस की उस टेबल पर बिखरी हुई फाइलें इस बात की गवाह थीं कि एक सख्त बॉस के भीतर भी एक भावुक और प्यासी स्त्री छिपी होती है।