गर्मी की उस तन्हा दोपहर में पूरा घर सन्नाटे की चादर ओढ़े हुए था। सूरज की तपिश खिड़की के पर्दों को चीरकर अंदर आने की नाकाम कोशिश कर रही थी। आर्यन सोफे पर बैठा अपनी किताब में मन लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी नजरें बार-बार सामने वाले कमरे के आधे खुले दरवाजे पर जा टिकती थीं। वहां उसकी मौसी रेखा गहरी नींद में सो रही थीं। रेखा मौसी की उम्र करीब पैंतीस साल थी, लेकिन उनके बदन की बनावट किसी बीस साल की युवती को भी मात दे दे। उनकी गहरी सांसों के साथ उनके उभरे हुए अंगों का उतार-चढ़ाव आर्यन के दिल की धड़कनें बढ़ा रहा था।
रेखा मौसी ने एक पतली सूती साड़ी पहन रखी थी जो उनके बदन से चिपक सी गई थी। सोते समय उनके शरीर की हलचल से साड़ी का पल्लू थोड़ा नीचे खिसक गया था, जिससे उनके गोल और रसीले तरबूज आधे नजर आ रहे थे। उन तरबूजों की गोलाई इतनी सम्मोहक थी कि आर्यन अपनी नजरें हटा नहीं पा रहा था। सफेद ब्लाउज के अंदर से उनके तरबूजों का भारीपन साफ झलक रहा था, और उन पर उभर आए नन्हे मटर के दाने जैसे ब्लाउज के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब थे। उनके बदन की महक पूरे कमरे में फैली हुई थी, जो आर्यन की इंद्रियों को उत्तेजित कर रही थी।
आर्यन के मन में एक गहरा द्वंद्व चल रहा था। एक तरफ रिश्तों की मर्यादा थी और दूसरी तरफ जवानी का उफान मारता जोश। उसने हौसला जुटाया और दबे पांव उनके कमरे में दाखिल हुआ। मौसी के चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी, लेकिन उनके होंठ हल्के से खुले हुए थे जैसे किसी मधुर प्यास का इंतजार कर रहे हों। आर्यन ने धीरे से अपना हाथ उनके पैरों की तरफ बढ़ाया। उसकी उंगलियां जब मौसी के रेशमी बदन से छुईं, तो एक बिजली सी उसके पूरे जिस्म में दौड़ गई। मौसी की नींद थोड़ी कच्ची हुई, उन्होंने करवट बदली जिससे उनकी साड़ी और भी नीचे खिसक गई और उनकी गहरी खाई का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा।
आर्यन अब रुकने वाला नहीं था। उसने अपनी उंगलियों को उनके तरबूजों की ओर बढ़ाया। जैसे ही उसका हाथ उन गर्म और नरम तरबूजों पर पड़ा, मौसी की आंखों में एक चमक सी आई और उन्होंने अपनी आंखें खोल दीं। पहले तो उनके चेहरे पर हैरानी थी, लेकिन आर्यन की आंखों में छाई हवस और प्यार को देखकर उनकी झिझक पिघलने लगी। उन्होंने आर्यन का हाथ पकड़ा और उसे अपने सीने पर और जोर से दबा लिया। मौसी की इस स्वीकृति ने आर्यन के अंदर की आग को भड़का दिया। उसने धीरे से उनके मटर को अपनी उंगलियों से सहलाया, जिससे मौसी के मुंह से एक दबी हुई आह निकल गई।
मौज-मस्ती का सिलसिला अब आगे बढ़ चुका था। आर्यन ने मौसी के ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले, और जैसे ही वह बंधन मुक्त हुए, उनके विशाल और दुधिया तरबूज आजाद होकर बाहर आ गिरे। आर्यन ने अपनी जुबान से उनके मटर के दानों को सहलाया, जिससे मौसी की कमर धनुष की तरह मुड़ गई। वे बार-बार आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फंसा रही थीं। धीरे-धीरे आर्यन नीचे की ओर बढ़ा और उनकी साड़ी को पूरी तरह से हटा दिया। वहां नीचे घने बालों के बीच उनकी मखमली और गीली खाई नजर आ रही थी, जो किसी अमृत के कुंड की तरह लग रही थी।
आर्यन ने बिना देर किए अपनी जुबान उस खाई पर रख दी। मौसी की सिसकारियां अब पूरे कमरे में गूंजने लगी थीं। वे आर्यन का सिर अपनी खाई की ओर और जोर से दबा रही थीं। आर्यन अपनी जुबान से उस खाई के कोने-कोने को चख रहा था। उधर, आर्यन का अपना खीरा भी पूरी तरह से तैयार और सख्त हो चुका था, जो अपनी हदें पार करने को बेताब था। मौसी ने नीचे झुककर आर्यन के पैंट की जिप खोली और उसके विशाल खीरे को अपने हाथों में ले लिया। उन्होंने अपनी कोमल हथेलियों से उस खीरे को सहलाया और फिर उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया।
खीरा चूसने की उस प्रक्रिया ने आर्यन को पागल कर दिया था। मौसी बड़े प्यार और शिद्दत से उस खीरे का रस चख रही थीं। कुछ देर बाद, मौसी ने आर्यन को अपने ऊपर आने का इशारा किया। उन्होंने आर्यन को सामने से खोदने के लिए तैयार किया। जैसे ही आर्यन ने अपने खीरे का सिरा मौसी की गीली और तंग खाई के मुहाने पर रखा, दोनों के शरीर कांप उठे। धीरे-धीरे उसने अपने खीरे को उस खाई के अंदर उतारना शुरू किया। मौसी ने अपनी टांगें आर्यन की कमर के चारों ओर कस लीं और खुदाई का असली खेल शुरू हो गया।
हर धक्के के साथ आर्यन का खीरा उस खाई की गहराइयों को नाप रहा था। कमरे में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाज और भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। आर्यन ने मौसी के हाथों को अपने हाथों में जकड़ लिया और पूरी ताकत से खोदना जारी रखा। मौसी बार-बार कह रही थीं, 'और जोर से खोदो आर्यन, आज मुझे पूरी तरह से भर दो।' खुदाई की रफ्तार बढ़ती गई, पसीने की बूंदें उनके शरीरों पर चमक रही थीं। आर्यन ने अब मौसी को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने की पोजीशन में ले आया।
पीछे से खुदाई करते हुए आर्यन को एक अलग ही आनंद मिल रहा था। मौसी का पिछवाड़ा इतना गदबदा था कि हर धक्के पर वह लहरें मार रहा था। आर्यन ने उनके तरबूजों को पीछे से पकड़ लिया और पूरी शिद्दत के साथ अपने खीरे को उनकी खाई में अंदर-बाहर करने लगा। चरम सीमा करीब थी, मौसी की आवाजें अब और भी तेज हो गई थीं। अचानक आर्यन को महसूस हुआ कि उसका रस निकलने वाला है। उसने अपनी रफ्तार और तेज कर दी और मौसी की खाई के सबसे गहरे हिस्से में अपने खीरे का सारा गर्म रस छोड़ दिया। मौसी का भी उसी वक्त रस निकल गया और वे निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ीं।
कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे, उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। मौसी के चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी और आर्यन के मन में एक नया अहसास। उस दोपहर की खुदाई ने उनके रिश्ते को एक नया और गहरा मोड़ दे दिया था। मौसी ने आर्यन के माथे को चूमा और धीरे से कहा, 'तुमने तो आज मुझे सच में तृप्त कर दिया।' दोनों की हालत पसीने से तर-बतर थी, लेकिन उनके दिलों में एक-दूसरे के लिए एक अनकहा राज और बेपनाह चाहत बस गई थी।