पहाड़ की उस ठंडी रात में पुराने लकड़ी के केबिन के भीतर एक अलग ही गर्माहट महसूस हो रही थी। रोहित और माया पिछले कई दिनों से एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में यहाँ रुके हुए थे, लेकिन आज की रात कुछ अलग थी। बाहर बर्फबारी हो रही थी और अंदर अंगीठी की आग की लपटें कमरे की दीवारों पर नाच रही थीं। रोहित सोफे पर बैठा माया को देख रहा था, जो खिड़की के पास खड़ी बाहर के अंधेरे को निहार रही थी। माया की रेशमी साड़ी का पल्लू उसके कंधे से सरक गया था, जिससे उसकी गोरी पीठ आग की रोशनी में सोने की तरह चमक रही थी। दोनों के बीच एक गहरा खिंचाव था, जिसे वे अब तक शब्दों में बयान करने से बच रहे थे।
माया की देह किसी तराशे हुए संगमरमर के शिल्प की तरह थी, जिसकी हर रेखा एक कहानी कहती थी। उसकी कुर्ती के भीतर उसके भरे हुए तरबूज अपनी मौजूदगी का पुरजोर एहसास करा रहे थे, मानो वे बाहर आने को बेताब हों। जब वह गहरी सांस लेती, तो वे तरबूज ऊपर-नीचे होते, जिससे रोहित की धड़कनें बेकाबू होने लगती थीं। उन तरबूजों के शिखर पर उभरे छोटे-छोटे मटर जैसे सख्त हो रहे थे, जो ठंड और उत्तेजना के मिले-जुले असर का परिणाम थे। उसकी कमर का घुमाव और उसके भारी पिछवाड़े का उभार उसे एक संपूर्ण स्त्री का रूप देता था, जिसे देखकर रोहित के मन में हलचल मच गई थी।
रोहित धीरे से उठकर माया के पीछे जाकर खड़ा हो गया। उसने अपनी सांसें माया की गर्दन पर महसूस कीं, जिससे माया का शरीर एक बार को कांप उठा। रोहित ने अपने हाथ उसकी पतली कमर पर रखे, जहाँ उसकी उंगलियां उसकी मखमली त्वचा से टकराईं। माया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपना सिर रोहित के कंधे पर टिका दिया। इस पहले स्पर्श ने उनके बीच की झिझक की आखिरी दीवार को भी गिरा दिया था। रोहित के हाथों ने धीरे-धीरे ऊपर की ओर सरकना शुरू किया, जिससे माया की सांसें तेज होने लगी थीं। वह जानती थी कि आज रात कुछ ऐसा होने वाला है जिसे वे दोनों कभी नहीं भूल पाएंगे।
रोहित ने उसे अपनी ओर घुमाया और उसकी आँखों में झाँका, जहाँ उसे केवल समर्पण और बेपनाह प्यास दिखाई दी। उसने माया के माथे को चूमा और फिर धीरे-धीरे उसके होंठों की ओर बढ़ा। जब उनके होंठ आपस में मिले, तो जैसे समय ठहर गया हो। रोहित के हाथ अब उन मुलायम तरबूजों पर थे, जिन्हें वह अपनी हथेलियों में भरकर भींच रहा था। माया के मुंह से दबी हुई आहें निकलने लगी थीं और वह रोहित के बालों में अपनी उंगलियां फँसाकर उसे और करीब खींच रही थी। वह प्यास जो सालों से दबी थी, अब फूटकर बाहर आ रही थी।
धीरे-धीरे कपड़े शरीर से अलग होते गए और जल्द ही वे दोनों कुदरती अवस्था में एक-दूसरे के सामने थे। रोहित की नज़रें माया की उस गहरी खाई पर टिकी थीं, जो अब पूरी तरह से गीली और तैयार नज़र आ रही थी। माया ने रोहित के विशाल खीरे को देखा, जो अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा था। उसने धीरे से अपने हाथों में उस खीरे को थामा और उसे सहलाने लगी। रोहित के लिए अब खुद पर काबू रखना नामुमकिन था। उसने माया को बिस्तर पर लेटाया और उसकी खाई को अपनी उंगलियों से टटोलना शुरू किया। खाई में उंगली जाने ही माया का शरीर धनुष की तरह मुड़ गया और उसने जोर से रोहित का नाम पुकारा।
रोहित ने अब माया की खाई को चखना शुरू किया। वह अपनी जुबान से उस खाई के हर कोने को सहला रहा था, जिससे माया के शरीर में बिजली की लहरें दौड़ रही थीं। वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींच रही थी और उसका रस धीरे-धीरे बाहर आ रहा था। अब समय आ गया था उस असली खुदाई का जिसके लिए दोनों तड़प रहे थे। रोहित ने अपने खीरे को उस खाई के मुहाने पर रखा और एक गहरे धक्के के साथ उसे भीतर उतार दिया। माया ने एक तीखी आह भरी और रोहित को कसकर जकड़ लिया। वह खुदाई बहुत ही धीमी और भावुक थी, हर धक्के में एक नया अहसास छुपा था।
रोहित अब पूरी रफ्तार से सामने से खोदना जारी रखे हुए था। हर बार जब खीरा पूरी गहराई तक जाता, माया का शरीर सिहर उठता। कमरे में उनके शरीर के टकराने की आवाजें और माया की सिसकारियां गूंज रही थीं। रोहित ने अब उसे घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। इस स्थिति में गहराई और भी ज्यादा महसूस हो रही थी। माया के भारी तरबूज नीचे लटक रहे थे और रोहित उन्हें पीछे से पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। खुदाई की यह प्रक्रिया इतनी दमदार थी कि अंजलि का पूरा शरीर पसीने से नहा गया था। वह बार-बार कह रही थी, "रोहित, और गहराई तक खोदो, मुझे पूरा भर दो।"
जैसे-जैसे वे चरम की ओर बढ़ रहे थे, उनकी सांसें उखड़ रही थीं। रोहित ने अपनी गति को और तेज कर दिया, अब वह किसी जंगली जानवर की तरह उस खाई की खुदाई कर रहा था। अंत में, एक जोरदार धक्के के साथ रोहित का सारा रस माया की गहराई में छूट गया। माया भी झटके खाते हुए शांत हुई और उसका भी रस निकल गया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर ढह गए, उनकी धड़कनें अभी भी बहुत तेज थीं। उस ठंडे कमरे में अब केवल उनकी भारी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।
कुछ देर बाद, जब होश वापस आए, तो उन्होंने एक-दूसरे को चादर में लपेट लिया। माया के चेहरे पर एक ऐसी शांति और संतुष्टि थी जो रोहित ने पहले कभी नहीं देखी थी। वह रोहित की छाती पर अपना सिर रखकर लेटी रही, जबकि रोहित उसके गीले बालों को सहला रहा था। शरीर की उस खुदाई ने उनके मन के द्वंद्वों को मिटा दिया था। उस रात के बाद वे केवल दो साथी नहीं रहे थे, बल्कि एक-दूसरे की रूह में बस गए थे। पहाड़ी के उस केबिन में बिताई गई वह रात उनके जीवन की सबसे हसीन और रसीली याद बन चुकी थी।