शहर के उस पॉश इलाके के आखिरी छोर पर स्थित 'फिटनेस हब' जिम में रात के नौ बज रहे थे। अधिकांश लोग जा चुके थे, सिर्फ मैं और मेरी जिम ट्रेनर मेघा मैम वहां बचे थे। मेघा मैम की उम्र लगभग तीस साल थी, लेकिन उनकी फिटनेस ऐसी थी कि बीस साल की लड़कियां भी उनसे ईर्ष्या करें। उनके शरीर का हर हिस्सा तराशा हुआ था, जो जिम के टाइट कपड़ों में और भी ज्यादा उभर कर सामने आता था।
मेघा मैम ने आज काले रंग की बेहद टाइट लेगिंग्स और एक गहरे नीले रंग की स्पोर्ट्स ब्रा पहनी हुई थी। जब वह चलती थीं, तो उनके पीछे का भारी और सुडौल पिछवाड़ा एक लय में हिलता था, जिसे देख कर मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगती थी। उनके सीने पर मौजूद बड़े-बड़े तरबूज उस स्पोर्ट्स ब्रा में से बाहर निकलने को बेताब दिखते थे। उनकी उभरी हुई बनावट देखकर मेरा ध्यान बार-बार कसरत से भटक जाता था।
मैं बेंच प्रेस कर रहा था और मेघा मैम मुझे स्पॉट दे रही थीं। जैसे ही मैं वजन ऊपर उठाता, वह झुककर रॉड को सहारा देतीं। उनके झुकने की वजह से उनके तरबूज बिल्कुल मेरी आंखों के सामने आ जाते। पसीने की कुछ बूंदें उनके गले से फिसलकर उन तरबूजों की गहरी घाटी के बीच समा रही थीं। उस नजारे ने मेरे शरीर के भीतर एक आग सी लगा दी थी और मेरा खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने लगा था।
मेघा मैम ने मेरी आंखों में देखा और मुस्कुराईं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी। "आर्यन, ध्यान कसरत पर लगाओ, कहीं और नहीं," उन्होंने शरारती लहजे में कहा। उनकी आवाज में एक भारीपन था जो सीधा मेरे दिल पर असर कर रहा था। मुझे लगा कि शायद वह मेरा मन पढ़ चुकी थीं। मेरी धड़कनें तेज हो गई थीं और सांसों की गति असामान्य हो गई थी। जिम के शांत माहौल में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।
हम दोनों के बीच पिछले छह महीनों से एक खास रिश्ता बन गया था। वह सिर्फ मेरी ट्रेनर नहीं थीं, बल्कि मेरी राज़दार भी बन चुकी थीं। हम घंटों बातें करते थे, लेकिन आज की खामोशी में एक अलग ही तनाव था। आकर्षण इतना गहरा था कि हम चाहकर भी एक-दूसरे से नजरें नहीं हटा पा रहे थे। जब भी हमारी नजरें मिलतीं, हम झिझक कर दूसरी तरफ देखने लगते, लेकिन अगले ही पल फिर वहीं खिंचे चले आते।
मेघा मैम ने अचानक मेरा हाथ पकड़ा और मुझे उठने का इशारा किया। "आज के लिए इतना काफी है, चलो थोड़ा स्ट्रेचिंग करते हैं," उन्होंने धीरे से कहा। उनके हाथों का स्पर्श इतना गर्म और मुलायम था कि मेरे पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। वह मुझे जिम के उस कोने में ले गईं जहां रोशनी थोड़ी कम थी और वहां बड़े-बड़े गद्दे बिछे हुए थे। मेरा मन जोर-जोर से धड़क रहा था, मानो कुछ बड़ा होने वाला हो।
उन्होंने मुझे जमीन पर लेटने को कहा और खुद मेरे पैरों के पास बैठ गईं। जब उन्होंने मेरे पैरों को मोड़ना शुरू किया, तो उनका हाथ अनजाने में मेरी जांघों के ऊपरी हिस्से को छू गया। उस स्पर्श ने मेरी झिझक की दीवार को हिला कर रख दिया। मेघा मैम की सांसें अब तेज हो रही थीं और उनका चेहरा लाल पड़ गया था। उन्होंने अपनी नजरें नीचे झुका ली थीं, लेकिन उनका हाथ अभी भी वहीं था।
मैंने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ उनके हाथ पर रख दिया। वह रुकी नहीं, बल्कि उन्होंने अपना हाथ और ऊपर खिसकाया, जहां मेरा खीरा अपनी पूरी कठोरता के साथ मौजूद था। उन्होंने एक गहरी सांस ली और मेरी आंखों में देखा। उस पल में कोई शब्द नहीं था, बस एक अनकही सहमति थी। "आर्यन, तुम जानते हो न कि यह गलत है?" उन्होंने कांपती आवाज में पूछा। मैंने उनके चेहरे को छुआ और कहा, "जो इतना सुकून दे, वो गलत कैसे हो सकता है?"
अगले ही पल, मेघा मैम ने अपनी झिझक छोड़ दी और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उनकी सांसों में एक अजीब सी खुशबू थी। हम एक-दूसरे में खोने लगे। मैंने धीरे से उनकी स्पोर्ट्स ब्रा के स्ट्रैप्स को नीचे गिराया, जिससे उनके विशाल तरबूज आजाद होकर बाहर निकल आए। उनके बीच के मटर की तरह उभरे हुए हिस्से अब पूरी तरह सख्त हो चुके थे। मैंने अपने हाथों में उन तरबूजों को भरा और उन्हें हल्के से सहलाने लगा।
मेघा मैम के मुंह से एक धीमी सिसकारी निकली। वह मेरे करीब आ गईं और अपने हाथों से मेरे कपड़े उतारने लगीं। जब मेरा खीरा पूरी तरह से उनके सामने आया, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने उसे अपने कोमल हाथों में लिया और उसे सहलाने लगीं। "यह तो बहुत बड़ा है," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। फिर उन्होंने अपना सिर नीचे किया और उसे चूसना शुरू कर दिया। वह अहसास इतना सुखद था कि मुझे लगा मैं स्वर्ग में हूं।
कुछ देर बाद, उन्होंने अपनी लेगिंग्स उतारी और अपनी गीली खाई को मेरे सामने पेश कर दिया। उनकी खाई से निकलने वाला रस उनकी जांघों तक बह रहा था। मैंने उन्हें गद्दे पर लिटाया और उनकी खाई के पास अपना चेहरा ले गया। वहां के छोटे-छोटे बालों के बीच छिपी हुई उस कोमल जगह को जब मैंने चाटना शुरू किया, तो मेघा मैम का पूरा शरीर धनुष की तरह मुड़ गया। वह जोर-जोर से मेरा नाम पुकारने लगीं।
मैंने अपनी उंगली उनकी खाई के अंदर डाली, तो वहां की गर्मी ने मुझे हैरान कर दिया। वह अंदर से पूरी तरह से तैयार थीं। उनकी खाई का रस मेरे हाथों पर लग रहा था। मैंने धीरे से अपना खीरा उनकी खाई के मुहाने पर रखा। मेघा मैम ने अपनी टांगें मेरे कमर के चारों ओर लपेट लीं। "देर मत करो आर्यन, मुझे अभी अपनी गहराई तक खोदो," उन्होंने बेताबी से कहा। मैंने एक झटके में अपना खीरा उनकी खाई के अंदर उतार दिया।
मेघा मैम के मुंह से एक चीख निकली, जो दर्द और खुशी का मिला-जुला रूप थी। मैंने रुक कर उन्हें संभलने का मौका दिया। वह धीरे-धीरे मेरे लय के साथ तालमेल बिठाने लगीं। मैं अब धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू कर चुका था। हर धक्के के साथ मेरा खीरा उनकी खाई की गहराई को छू रहा था। उनके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे, जिन्हें मैं बारी-बारी से अपने मुंह में भर रहा था। पसीने से हमारे शरीर लथपथ हो चुके थे।
कमरे में केवल हमारे मांस के टकराने की आवाज 'चप-चप' आ रही थी। मेघा मैम की आवाजें अब और भी ज्यादा उत्तेजक हो गई थीं। "हाँ... वहीं... और तेज... मुझे पूरी तरह खोद डालो!" वह चिल्ला रही थीं। मैंने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। उनका पिछवाड़ा इतना विशाल था कि उसे पकड़कर धक्का मारने में एक अलग ही आनंद आ रहा था। मेरी गति अब अपनी चरम सीमा पर थी।
हम दोनों ही अब उस बिंदु पर थे जहां से वापसी मुमकिन नहीं थी। मेघा मैम का शरीर कांपने लगा और उनकी खाई ने मेरे खीरे को कसकर जकड़ लिया। उनका रस छूटने लगा और उसी क्षण मैंने भी अपना सारा लावा उनकी खाई की गहराई में उड़ेल दिया। हम दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, हमारी सांसें बुरी तरह फूल रही थीं। पसीने की बूंदें एक-दूसरे के शरीर में मिल रही थीं।
कुछ देर तक हम वैसे ही पड़े रहे, उस शांति का आनंद लेते हुए जो इस तूफान के बाद आई थी। मेघा मैम ने मेरे माथे को चूमा और मुस्कुराईं। उनके चेहरे पर एक संतुष्टि थी जो शब्दों से परे थी। हमने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने और जिम की लाइटें बंद कर दीं। वह रात हमारे जीवन की सबसे यादगार रात बन गई थी, जहां एक गुरु और शिष्य के बीच के सारे पर्दे गिर चुके थे और सिर्फ रूहानी और जिस्मानी जुड़ाव बचा था।
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