ऑफिस की छत पर खुदाई

 रात के ग्यारह बज चुके थे और गुड़गांव के उस आलीशान ऑफिस में सिर्फ दो ही लोग बचे थे। आर्यन अपनी डेस्क पर बैठा फाइलों में उलझा था, पर उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। उसकी नजरें बार-बार सामने वाले केबिन की ओर जा रही थीं, जहाँ उसकी सीनियर मैनेजर ऋचा मैम बैठी थीं। ऋचा मैम की उम्र लगभग 32 साल थी, उनका रंग साफ़ कंचन जैसा और बदन किसी सधी हुई मूर्ति की तरह सुडौल था। उनके भारी भरकम तरबूज उनकी साड़ी के ब्लाउज को चीर कर बाहर आने को बेताब दिखते थे, और जब वो चलती थीं, तो उनके भारी पिछवाड़े की मटक आर्यन के दिल की धड़कन बढ़ा देती थी।


आर्यन अभी नया-नया ही इस ऑफिस में आया था, पर ऋचा के प्रति उसका आकर्षण पहले दिन से ही चरम पर था। ऋचा स्वभाव से थोड़ी सख्त थीं, पर उनकी आँखों में एक अजीब सी तड़प और अकेलापन झलकता था। आज काम का बोझ ज्यादा था, इसलिए दोनों को रुकना पड़ा। आर्यन ने हिम्मत जुटाई और उनके केबिन की ओर बढ़ा। "मैम, काफी देर हो गई है, क्या मैं आपके लिए कॉफी ला सकता हूँ?" उसने दबी आवाज में पूछा। ऋचा ने अपनी चश्मा उतारकर मेज पर रखा और अपनी गहरी आँखों से आर्यन को देखा।


ऋचा की साड़ी का पल्लू थोड़ा खिसका हुआ था, जिससे उनके गोरे और गोल तरबूज का ऊपरी हिस्सा साफ चमक रहा था। आर्यन की सांसें अटक गईं। ऋचा ने एक ठंडी आह भरी और कहा, "आर्यन, मैं बहुत थक गई हूँ। कॉफी से काम नहीं चलेगा, चलो ऊपर छत पर चलते हैं, थोड़ी ताजी हवा की जरूरत है।" आर्यन के लिए यह एक सुनहरे मौके जैसा था। दोनों लिफ्ट से बिल्डिंग की सबसे ऊपरी मंजिल यानी छत पर पहुँच गए। रात की ठंडी हवा और शहर की रोशनियाँ एक अलग ही माहौल बना रही थीं।


छत पर सन्नाटा था। ऋचा मुंडेर के पास जाकर खड़ी हो गईं। हवा के झोंकों से उनकी साड़ी बार-बार उड़ रही थी, जिससे उनके बदन के उभार और भी ज्यादा आकर्षक लग रहे थे। आर्यन उनके पीछे खड़ा था, उसकी नजरें ऋचा के भारी पिछवाड़े पर टिकी थीं जो साड़ी के महीन कपड़े में बहुत उभरे हुए लग रहे थे। ऋचा ने पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराई, "आर्यन, क्या तुम भी अकेलेपन से डरते हो?" आर्यन ने धीमे से कहा, "डरता तो नहीं मैम, पर कभी-कभी महसूस जरूर होता है।"


बातों ही बातों में दोनों के बीच का फासला कम होने लगा। आर्यन ने गौर किया कि ऋचा की सांसें अब थोड़ी तेज चल रही थीं। उनके चेहरे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। आर्यन ने हिम्मत दिखाई और अपना हाथ धीरे से ऋचा के कंधे पर रखा। ऋचा कांप उठीं, लेकिन उन्होंने उसका हाथ हटाया नहीं। "आर्यन, तुम्हें पता है तुम बहुत हिम्मती हो," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। स्पर्श का वो जादू दोनों के शरीरों में आग लगाने के लिए काफी था।


आर्यन ने धीरे से उनका हाथ पकड़ा और उन्हें अपनी ओर खींचा। ऋचा का भारी बदन आर्यन के सीने से टकराया। आर्यन को उनके नरम और बड़े तरबूज अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे। ऋचा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और आर्यन की गर्दन में अपना चेहरा छुपा लिया। उनके बदन से उठती परफ्यूम और पसीने की मिली-जुली खुशबू आर्यन को मदहोश कर रही थी। आर्यन ने अपना हाथ उनकी कमर के नीचे ले जाकर उनके भारी पिछवाड़े को सहलाना शुरू किया।


ऋचा के मुँह से एक धीमी आह निकली। "आह... आर्यन, ये गलत है," उन्होंने कहा, पर उनके शब्द उनके इरादों के विपरीत थे। आर्यन ने उनके कान के पास जाकर कहा, "जो सुकून दे, वो गलत कैसे हो सकता है मैम?" और फिर उसने धीरे से उनके होंठों को चूमना शुरू किया। ऋचा ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया। दोनों के बीच की झिझक अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। आर्यन के हाथ अब ऋचा के ब्लाउज के हुक खोलने में व्यस्त थे।


जैसे ही ब्लाउज खुला, ऋचा के विशाल और दूधिया तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। चाँदनी रात में वो और भी ज्यादा हसीन लग रहे थे। आर्यन ने झुककर उनके गुलाबी मटर को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। ऋचा की कमर ऊपर को उचकी और वो आर्यन के बालों को अपनी उंगलियों में भींचने लगीं। "उफ़... आर्यन... तुम तो पागल कर दोगे," उनकी आवाज़ में उत्तेजना साफ झलक रही थी। आर्यन अब उनके निचले हिस्से की ओर बढ़ा।


उसने ऋचा की साड़ी और पेटीकोट को एक झटके में नीचे कर दिया। ऋचा अब पूरी तरह निर्वस्त्र थीं। उनकी रेशमी और गहरी खाई के पास घने बाल देख आर्यन का खीरा और भी ज्यादा कड़ा हो गया। आर्यन ने अपना पजामा नीचे किया और अपना कड़क चुका खीरा बाहर निकाला। ऋचा की नजरें जब उस विशाल खीरे पर पड़ीं, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गई। "इतना बड़ा... आर्यन, क्या ये मुझमें समा पाएगा?" उन्होंने घबराते हुए पूछा।


आर्यन ने उन्हें तसल्ली दी और पहले अपनी उंगलियों से उनकी खाई को सहलाया। खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और रस टपक रहा था। आर्यन ने झुककर अपनी जुबान से उनकी खाई चाटना शुरू किया। ऋचा बिस्तर... यानी उस ठंडी छत के फर्श पर पड़ी तड़प रही थीं। "आह... और चाटो... आर्यन... बहुत मजा आ रहा है!" जब ऋचा का रस छूटने लगा, तो आर्यन ने उन्हें घुटनों के बल खड़ा किया।


आर्यन ने अब उन्हें पीछे से पकड़ा और उनका पिछवाड़ा अपनी ओर खींचा। उसने अपने कड़क खीरे की नोक को उनकी गीली खाई पर रखा और एक गहरा धक्का मारा। ऋचा की एक जोर की चीख निकली, पर वो चीख दर्द की नहीं, असीम आनंद की थी। आर्यन अब पिछवाड़े से खोदना शुरू कर चुका था। हर धक्के के साथ ऋचा के तरबूज जोर-जोर से हिल रहे थे। "हाँ... आर्यन... ऐसे ही... और जोर से खोदो... मुझे पूरा खत्म कर दो!"


छत पर सिर्फ मांस के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। आर्यन अब उन्हें घुमाकर सीधा लिटा दिया और सामने से खोदना शुरू किया। ऋचा ने अपनी टांगें आर्यन के कंधे पर रख लीं, जिससे उसकी गहराई तक पहुँच और बढ़ गई। आर्यन के धक्कों की रफ्तार अब बहुत तेज हो चुकी थी। पसीना दोनों के जिस्मों को भिगो चुका था। ऋचा का शरीर झटके ले रहा था, और जल्द ही आर्यन का भी सब्र टूट गया। उसने एक आखिरी गहरा धक्का मारा और अपना सारा गरम रस उनकी खाई के अंदर खाली कर दिया।


दोनों काफी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे। ऋचा की सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। उन्होंने आर्यन के माथे को चूमा और कहा, "आज तुमने मुझे वो दिया, जिसकी मुझे सालों से तलाश थी।" आर्यन ने उन्हें अपनी बाहों में और कस लिया। उस रात ऑफिस की वो छत एक गवाह थी उस मिलन की, जो सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि रूहानी भी था। दोनों ने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने और एक नई ऊर्जा के साथ नीचे उतरे, पर उनके दिलों में उस रात की खुदाई की यादें हमेशा के लिए बस गई थीं।


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