राहुल पिछले छह महीनों से इस नामी एडवरटाइजिंग कंपनी में काम कर रहा था। उसकी उम्र मात्र चौबीस साल थी, लेकिन उसका शरीर काफी कसरती और सुडौल था। उसकी बॉस, महक, बत्तीस साल की एक बेहद आकर्षक और परिपक्व महिला थी। महक की साड़ी के पल्लू से झांकती उसकी गोरी कमर और उस पर टिका पसीना राहुल को अक्सर मदहोश कर देता था।
महक का बदन किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह तराशा हुआ था। उसके रेशमी काले बाल जब उसके गोरे कंधों पर गिरते थे, तो राहुल का दिल जोरों से धड़कने लगता था। उसके उभरे हुए भारी तरबूज उसकी कुर्ती या साड़ी के ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिखते थे। जब वह ऑफिस के गलियारे में चलती थी, तो उसका भारी और गोल पिछवाड़ा एक अलग ही मदमस्त लय में झूलता था।
राहुल अक्सर छुप-छुपकर महक के उन अंगों को निहारता था जो उसकी मर्दानगी को चुनौती देते थे। महक की चाल में एक गजब का आत्मविश्वास था, लेकिन उसकी आंखों में एक छिपी हुई तड़प और अकेलापन भी था। राहुल ने गौर किया था कि महक अक्सर देर रात तक ऑफिस में रुकती थी, जैसे उसे खाली घर में जाने से डर लगता हो।
आज दफ्तर में काम का बोझ ज्यादा था और प्रेजेंटेशन की वजह से रात के दस बज चुके थे। ऑफिस की बालकनी में महक अकेली खड़ी शहर की रोशनी देख रही थी। राहुल ने हिम्मत जुटाई और दो कप गरमा-गरम कॉफी लेकर उसके पास पहुंच गया। वहां का माहौल एकदम शांत था और ठंडी हवाएं महक की खुशबू को राहुल तक पहुंचा रही थीं।
"मैम, आप अभी तक थकी नहीं?" राहुल ने धीरे से पूछा। महक मुड़ी और उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। उसने कॉफी का कप हाथ में लिया और राहुल की आंखों में गहराई से देखा। उस पल राहुल को महसूस हुआ कि महक की सांसें कुछ तेज चल रही थीं। हवा के झोंके से उसका पल्लू सरक गया था, जिससे उसके तरबूज का ऊपरी हिस्सा साफ नजर आ रहा था।
राहुल की नजरें अनचाहे ही उन विशाल अंगों पर टिक गईं। महक ने यह देख लिया, लेकिन उसने अपना पल्लू ठीक करने की कोशिश नहीं की। इसके बजाय, उसने अपनी रेशमी आवाज में कहा, "राहुल, कभी-कभी काम से ज्यादा इंसान का साथ जरूरी होता है।" राहुल का दिल धक-धक करने लगा, उसके शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना दौड़ गई और पैंट के अंदर उसका खीरा अंगड़ाई लेने लगा।
दोनों के बीच एक खामोश संवाद शुरू हो चुका था। राहुल ने देखा कि महक के चेहरे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और महक के चेहरे से एक लट हटाई। महक की आंखों में झिझक थी, लेकिन शरीर का आकर्षण उस पर भारी पड़ रहा था। उसने अपनी आंखें मूंद लीं और राहुल के स्पर्श को महसूस करने लगी।
राहुल ने धीरे से अपने हाथ महक की पतली कमर पर रखे। उसकी मखमली त्वचा के स्पर्श से राहुल के पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई। महक ने विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी सांसें और भी तेज हो गईं। राहुल ने महसूस किया कि महक का शरीर अब धीरे-धीरे उसकी ओर झुक रहा था। उसके तरबूज राहुल की छाती से सटने लगे थे, जिससे उसकी धड़कनें बेकाबू हो गईं।
"राहुल, यह गलत है..." महक ने कांपती आवाज में कहा, लेकिन उसके हाथ राहुल की गर्दन के पीछे कस चुके थे। राहुल ने उसके कानों के पास जाकर फुसफुसाया, "जो दिल को सुकून दे, वो गलत कैसे हो सकता है महक?" यह सुनते ही महक का सारा संयम टूट गया। उसने राहुल के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों को चूमने लगी।
उनका चुंबन गहरा और प्यासा था। राहुल ने महक की कमर को और जोर से अपनी ओर खींचा। उसने महसूस किया कि महक का पिछवाड़ा अब पूरी तरह से उसकी जांघों से रगड़ खा रहा था। राहुल का खीरा अब पूरी तरह से लोहे जैसा सख्त हो चुका था और महक को अपनी पैंट के ऊपर ही उसका अहसास होने लगा था। महक ने एक दबी हुई आह भरी।
राहुल ने धीरे से महक को बालकनी से अंदर के केबिन की ओर धकेला और दरवाजा बंद कर दिया। केबिन की मद्धम रोशनी में महक का बदन और भी ज्यादा कामुक लग रहा था। राहुल ने उसकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह से हटा दिया। अब उसके सामने महक के दोनों विशाल तरबूज थे, जो पतले से ब्लाउज में कैद होने की नाकाम कोशिश कर रहे थे।
राहुल ने अपने कांपते हाथों से ब्लाउज के हुक खोले। जैसे ही ब्लाउज खुला, महक के दोनों तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। उनके बीच में लगे गुलाबी मटर की दाने जैसी घुंडियां ठंड और उत्तेजना से पूरी तरह सख्त हो चुकी थीं। राहुल ने बिना देर किए अपना मुंह एक तरबूज पर रख दिया और उसे पागलों की तरह चूसने लगा, जिससे महक की सिसकारियां गूंजने लगीं।
महक ने राहुल के बालों को अपनी उंगलियों में फंसा लिया और उसका सिर अपने अंगों पर और जोर से दबाने लगी। राहुल बारी-बारी से दोनों तरबूजों के मटर को अपनी जीभ से सहला रहा था। महक का पूरा बदन थरथरा रहा था। उसने राहुल की पैंट की जिप खोली और उसके अंदर छटपटाते हुए विशाल खीरे को अपने नाजुक हाथों में थाम लिया।
जैसे ही महक के ठंडे हाथों का स्पर्श राहुल के गरम खीरे पर हुआ, उसे जन्नत का अहसास हुआ। महक ने उसे सहलाते हुए अपनी आंखों में एक शरारत भरी नजर डाली। वह घुटनों के बल नीचे बैठी और राहुल के खीरे को अपने मुंह में भर लिया। राहुल की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह महक के सिर को पकड़कर उसे और गहराई तक जाने के लिए उकसाने लगा।
कुछ देर खीरा चूसने के बाद, राहुल ने महक को उठाया और उसे ऑफिस की मेज पर लिटा दिया। उसने महक के नीचे के कपड़े उतारे तो उसकी नजरें उसकी झाड़ीनुमा घनी गहरी खाई पर पड़ीं। वह खाई अब पूरी तरह से गीली और रसदार हो चुकी थी। राहुल ने अपनी उंगली उस खाई में डाली, तो महक का पूरा शरीर कमान की तरह मुड़ गया और उसके मुंह से 'उफ़' निकल गई।
राहुल ने अपनी जीभ महक की खाई पर रखी और उसे चाटना शुरू किया। महक अपने पैरों को चौड़ा करती गई ताकि राहुल को उसकी खाई खोदने में आसानी हो। जैसे-जैसे राहुल की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, महक का रस छूटने लगा। वह बुरी तरह हांफ रही थी और उसका पिछवाड़ा मेज पर पटक रहा था। राहुल ने समझ लिया कि अब समय आ गया है।
राहुल ने अपना सख्त और गरम खीरा महक की गीली खाई के मुहाने पर रखा। महक ने उसे अपनी ओर खींचते हुए कहा, "देर मत करो राहुल, मुझे पूरी तरह से खोद डालो।" राहुल ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका पूरा खीरा महक की तंग खाई में समा गया। महक के गले से एक चीख निकली, जो दर्द और बेइंतहा आनंद का मिश्रण थी।
राहुल ने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की। कमरे में सिर्फ जिस्मों के टकराने की आवाजें और महक की सिसकारियां गूंज रही थीं। राहुल ने महक की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और सामने से उसे गहराई तक खोदने लगा। हर धक्के के साथ महक के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उसका पिछवाड़ा मेज से जोर-जोर से टकरा रहा था।
"ओह राहुल... तुम बहुत अच्छा खोद रहे हो... और अंदर तक जाओ..." महक पागलों की तरह चिल्ला रही थी। राहुल ने उसे घुमाया और अब उसे पिछवाड़े से खोदने की पोजीशन में ले आया। महक ने मेज पर झुककर अपना भारी पिछवाड़ा पीछे की ओर निकाल दिया। राहुल ने फिर से अपना खीरा उसकी खाई में उतारा और तेज प्रहार करने लगा।
अब दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल चुका था। राहुल की सांसें उखड़ रही थीं और महक का रस बार-बार छूट रहा था। राहुल ने महसूस किया कि अब उसका अपना रस भी छूटने वाला है। उसने अंतिम बार पूरी ताकत से महक की खाई को खोदा और अपना सारा गरम रस उसकी गहराई में छोड़ दिया। महक भी एक लंबी सिसकारी के साथ शांत हो गई।
दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे से लिपटे हुए मेज पर ही पड़े रहे। महक के बाल बिखरे हुए थे और उसका चेहरा तृप्ति की चमक से दमक रहा था। राहुल ने उसके माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में समेट लिया। ऑफिस की उस शांत रात में, दो रूहें जिस्मानी खुदाई के जरिए एक-दूसरे में विलीन हो चुकी थीं। महक की आंखों में अब वह अकेलापन नहीं था।
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