पड़ोसी मालती भाभी की मदहोश खुदाई


पड़ोसी मालती भाभी की मदहोश खुदाई
दोपहर की उस तपती धूप में पूरा मोहल्ला सन्नाटे की चादर ओढ़े सोया हुआ था, लेकिन आर्यन के मन में एक अजीब सी बेचैनी करवटें ले रही थी। वह अपनी पड़ोसन मालती भाभी के घर के बाहर खड़ा था, जो कुछ सालों पहले ही विधवा हुई थीं और अब अपने अकेलेपन को अपनी खामोश मुस्कान के पीछे छुपाती थीं। मालती भाभी की उम्र छत्तीस साल के करीब थी, लेकिन उनके शरीर की बनावट किसी बीस साल की जवान लड़की को भी मात दे सकती थी, उनके चेहरे की चमक और आँखों की गहराई में एक ऐसी प्यास थी जिसे आर्यन बखूबी महसूस कर सकता था। आज आर्यन ने हिम्मत जुटाई और भाभी के घर का दरवाजा खटखटाया, जिसके खुलते ही उसे एक ऐसी खुशबू का एहसास हुआ जिसने उसके रोम-रोम में सिहरन पैदा कर दी और उसके भीतर की दबी इच्छाएं फिर से जाग उठीं।

मालती भाभी ने एक हल्की, बारीक नीले रंग की साड़ी पहन रखी थी, जो उनके गोरे और सुडौल बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। जैसे ही वह मुड़ीं, साड़ी के नीचे उनके गोल और रसीले तरबूज आर्यन की आँखों के सामने उभर आए, जिन्हें देखकर उसके दिल की धड़कनें बहुत तेज हो गईं। उन तरबूजों के बीच की गहरी घाटी और उनके सिरों पर उभरते हुए नन्हे मटर के दाने साड़ी के पतले कपड़े के पार से भी अपनी मौजूदगी का साफ़ अहसास करा रहे थे। भाभी का पिछवाड़ा इतना भारी और मांसल था कि चलते समय वह एक विशेष लय में हिलता था, जिसे देखकर किसी भी पुरुष का मन डोल जाए और आर्यन का खीरा भी अब अपनी पैंट के अंदर पूरी तरह से खड़ा होकर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा था।

दोनों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव काफी पुराना था, वे अक्सर घंटों बैठकर बातें करते थे, लेकिन आज उन बातों में एक अलग ही किस्म की गरमाहट और खिंचाव महसूस हो रहा था। भाभी ने पानी का गिलास देते हुए जब आर्यन की आँखों में झाँका, तो आर्यन को उनमें साफ़ तौर पर अपनी ही जैसी तीव्र इच्छाओं की लहरें दिखाई दीं, जिससे उसे पूरा यकीन हो गया कि वह भी उतनी ही प्यासी हैं जितना कि वह। मालती भाभी के नरम हाथ की छुअन जब आर्यन की उंगलियों से हुई, तो पूरे बदन में एक बिजली सा करंट दौड़ गया और दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में वो मूक इकरार देख लिया जिसे शब्दों की अब कोई जरूरत नहीं थी। उनकी झिझक के बादल धीरे-धीरे छंटने लगे थे और मन के किसी कोने में दबा हुआ आकर्षण का वो ज्वालामुखी अब फटने को पूरी तरह से बेताब था।

आर्यन ने धीरे से मालती भाभी का हाथ थामा और उन्हें अपनी ओर खींच लिया, जिससे भाभी की सांसें तेज हो गईं और उनका कोमल शरीर थरथराने लगा। उसने अपना चेहरा उनके करीब लाया और उनके महकते हुए गुलाब जैसे गालों पर अपने होठों का मिलन करा दिया, जिससे भाभी के मुँह से एक दबी हुई आह निकली जो बंद कमरे में गूंज उठी। अब उनकी झिझक का बांध टूट चुका था और मालती भाभी ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, जिससे उनके विशाल और गोरे तरबूज पूरी तरह आजाद होकर आर्यन की आँखों के सामने थिरकने लगे। उनके उन रसीले तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे गुलाबी मटर अब ठंडक और उत्तेजना की वजह से पूरी तरह सख्त हो चुके थे, जिन्हें आर्यन ने बारी-बारी से अपने मुँह में भरकर उनका रस लेना शुरू कर दिया।

भाभी की कराहें अब और तेज होने लगी थीं, उन्होंने आर्यन की शर्ट के बटन खोले और उसके मजबूत सीने को सहलाने लगीं। जब उनकी नजर आर्यन के पैंट के अंदर उतावले हो रहे भारी खीरे पर पड़ी, तो उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उन्होंने धीरे से आर्यन की पैंट नीचे सरकाई और उस बड़े और तने हुए खीरे को अपने नाजुक हाथों में थाम लिया। कुछ ही पलों में उन्होंने उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया, जिससे आर्यन की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उसे स्वर्ग जैसा सुख महसूस होने लगा। भाभी अपनी जीभ से खीरे के हर हिस्से को सहला रही थीं, जबकि आर्यन उनके रेशमी बालों वाली गहरी खाई को अपनी उंगलियों से टटोलने लगा था जो अब पूरी तरह से गीली और खुदाई के लिए तैयार हो चुकी थी।

आर्यन ने भाभी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी टांगों के बीच की उस मखमली खाई में उंगली से खुदाई शुरू की, जिससे भाभी का पूरा शरीर कमान की तरह मुड़ गया। वह अपनी उंगली को खाई की गहराई तक ले जा रहा था और भाभी के रस से उसकी उंगलियां लथपथ हो चुकी थीं। अब बर्दाश्त की हद खत्म हो चुकी थी, आर्यन ने अपने तने हुए खीरे को उनकी रेशमी खाई के द्वार पर रखा और एक गहरा धक्का लगाया। जैसे ही खीरा पूरी तरह से अंदर समाया, भाभी के मुँह से एक तेज चीख निकली और उन्होंने आर्यन की पीठ को अपने नाखूनों से जकड़ लिया। आर्यन ने सामने से खोदना शुरू किया, उसकी हर हरकत बहुत ही धीमी और गहरी थी जो भाभी के अंतर्मन तक पहुँच रही थी, उनके शरीर के मिलने की आवाज और भाभी की सिसकारियां कमरे के सन्नाटे को चीर रही थीं।

कुछ देर सामने से खोदने के बाद, आर्यन ने भाभी को उल्टा किया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने की स्थिति में ले आया। उनके उभरे हुए पिछवाड़े को देख आर्यन का जोश दोगुना हो गया और उसने फिर से खुदाई की गति तेज कर दी। भाभी के तरबूज बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे और वह हर धक्के के साथ अपने नाम की गुहार लगा रही थीं। अंत में, जब दोनों का चरम पास आया, तो आर्यन ने अपने खीरे को गहराई तक धंसा दिया और भाभी की खाई के अंदर ही उसका सारा गरम रस निकल गया। मालती भाभी ने भी एक लंबी सिसकारी भरी और उनका रस भी एक साथ छूट गया, जिससे दोनों का शरीर पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे के ऊपर निढाल गिर पड़ा। उस पल में जो सुकून और शांति थी, उसने उनकी बरसों की तन्हाई को एक झटके में मिटा दिया था, और वे दोनों एक-दूसरे की बांहों में लिपटे हुए उस अद्भुत एहसास को अपने भीतर उतार रहे थे।