ऑफिस की रात और अधूरी फाइल की खुदाई--->रात के दस बज चुके थे और ऑफिस का सन्नाटा गहरा होता जा रहा था। चारों तरफ केवल कंप्यूटर के पंखों की हल्की गुनगुनाहट और मीरा मैम की सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। मीरा मैम मेरी बॉस थीं, जिनकी उम्र लगभग पैंतीस साल होगी, लेकिन उनका निखार किसी पच्चीस साल की हसीना जैसा था। हम दोनों एक जरूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, लेकिन मेरा ध्यान काम से ज्यादा उनकी रेशमी साड़ी और उससे झलकती उनकी गोरी पीठ पर था। उनके हिलते हुए हाथों और कीबोर्ड पर चलती उंगलियों को देखकर मेरा मन बार-बार भटक रहा था।
मीरा मैम का शरीर किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह था। उनकी साड़ी के ब्लाउज से उनके भारी और गोल मटोल तरबूज आधे बाहर झांक रहे थे, जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उनके तरबूजों के बीच की वो गहरी घाटी मुझे अपनी ओर खींच रही थी। जैसे ही वो झुककर फाइल देखतीं, उनके तरबूज और भी ज्यादा उभर आते और उन पर मौजूद छोटे-छोटे मटर जैसे उभार साड़ी के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिखते थे। उनकी कमर का घेरा इतना कामुक था कि मैं बस उसे अपनी बाहों में भरने के सपने देख रहा था।
कमरे में एयर कंडीशनर चल रहा था, फिर भी मेरे शरीर में एक अजीब सी तपन महसूस हो रही थी। मीरा मैम की इत्र की खुशबू मेरे नथुनों में समाकर मेरे मन में हलचल पैदा कर रही थी। मैंने देखा कि उनकी नजरें भी कभी-कभी काम छोड़कर मेरे चेहरे पर ठहर जाती थीं। उनकी आँखों में एक प्यास थी, जिसे वो अपनी पेशेवर मर्यादा के पीछे छुपाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनके थरथराते होंठ और चेहरे पर आया पसीना सब कुछ बयां कर रहा था। हवा में एक अजीब सा तनाव था जो शब्दों की जगह भावनाओं से भरा हुआ था।
"आर्यन, चलो थोड़ी ताजी हवा लेते हैं, यहाँ बहुत घुटन हो रही है," उन्होंने अपनी भारी और रेशमी आवाज में कहा। हम दोनों ऑफिस की छत पर चले गए जहाँ चाँदनी की दूधिया रोशनी चारों तरफ फैली थी। वहां सन्नाटा और भी गहरा और मादक था। जैसे ही हम रेलिंग के पास खड़े हुए, मेरा हाथ गलती से उनके हाथ से टकरा गया। उन्होंने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि मेरी उंगलियों को अपनी उंगलियों में फंसा लिया। उस पहले स्पर्श ने मेरे पूरे शरीर में बिजली की एक तेज लहर दौड़ा दी और मेरा सोया हुआ खीरा अपनी जगह पर जोर-जोर से अंगड़ाई लेने लगा।
उन्होंने मुड़कर मेरी आँखों में देखा और बिना कुछ कहे मेरे करीब आ गईं। उनके विशाल तरबूज अब मेरी छाती से पूरी तरह सट चुके थे। मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी मखमली कमर पर रखा और उन्हें अपनी ओर जोर से खींच लिया। उनकी साँसे बहुत तेज हो गई थीं और वो कांप रही थीं। मैंने धीरे से उनके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले और उनके रसीले तरबूजों को आज़ाद कर दिया। वो चाँदनी रात में और भी सफेद और चमकदार लग रहे थे। मैंने झुककर उनके मटर को अपने मुंह में लिया और धीरे से उन्हें अपनी जीभ से सहलाने लगा।
मीरा मैम के मुंह से एक दबी हुई गहरी कराह निकली और उन्होंने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया। मैंने धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए उनकी साड़ी को ढीला किया और उन्हें पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया। उनकी रेशमी और नम खाई अब मेरे सामने थी, जहाँ काले और घने बाल एक सुरक्षा कवच की तरह फैले हुए थे। मैंने अपनी जीभ से उनकी खाई को चाटना शुरू किया, जिससे वहां से शहद जैसा चिपचिपा रस निकलने लगा। वो बेहाल होकर अपना भारी पिछवाड़ा ऊपर-नीचे हिलाने लगीं और मुझे और गहराई तक जाने का इशारा करने लगीं।
अब मेरा खीरा पूरी तरह से तैयार, लंबा और सख्त हो चुका था। मैंने उन्हें रेलिंग के सहारे खड़ा किया और अपने तपते हुए खीरे को उनकी गीली खाई के मुहाने पर टिका दिया। जैसे ही मैंने पहला गहरा धक्का दिया, मेरा खीरा उनकी तंग खाई में रपटता हुआ अंदर समाता चला गया। वो दर्द और बेतहाशा आनंद की मिलीजुली आवाजें निकालने लगीं। हम दोनों एक मादक लय में बंध गए थे। मैं लगातार अपनी कमर चलाकर उनकी गहराई में खुदाई कर रहा था, और हर धक्के के साथ उनके भारी तरबूज किसी लहर की तरह बुरी तरह उछल रहे थे।
कुछ देर सामने से खुदाई करने के बाद, मेरा मन कुछ और करने का हुआ और मैंने उन्हें मुड़ने के लिए कहा। उन्होंने अपने घुटनों के बल बैठकर अपना गोरा और भारी पिछवाड़ा ऊपर उठा दिया। उनका पिछवाड़ा दो बड़े और गोल पहाड़ों जैसा लग रहा था जो चाँद की रोशनी में चमक रहे थे। मैंने पीछे से अपना खीरा फिर से उनकी खाई में उतारा और तेज रफ्तार से खुदाई शुरू कर दी। थप-थप की गूँजती आवाजें रात के सन्नाटे को चीर रही थीं। वो बार-बार सिसकते हुए कह रही थीं, "और तेज आर्यन, मुझे पूरी तरह खोद डालो, मेरा सारा रस निकाल दो, आज मुझे अपना बना लो।"
हम दोनों पसीने से पूरी तरह लथपथ थे और चरम आनंद की सीमा के बहुत करीब पहुँच रहे थे। मेरी सांसें उखड़ रही थीं और उनका शरीर थर-थर कांप रहा था। मैंने अपने खीरे को उनकी खाई की सबसे अंतिम गहराई तक पहुँचाया और पागलों की तरह जोर-जोर से धक्के मारने लगा। अचानक मेरा पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह अकड़ गया और मेरा सारा गरम रस उनकी खाई के अंदर ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा। ठीक उसी समय उन्होंने भी अपना सारा रस छोड़ दिया और निढाल होकर फर्श पर गिर पड़ीं।
हम दोनों काफी देर तक वहीं छत की ठंडी फर्श पर लेटे रहे, एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए। उस रात की गहन खुदाई ने हमारे बीच के बॉस और कर्मचारी के औपचारिक रिश्ते को हमेशा के लिए एक रसीले बंधन में बदल दिया था। मेरा खीरा अब शांत था, लेकिन मीरा मैम के चेहरे पर जो संतुष्टि और चमक थी, वो दुनिया की किसी भी दौलत से ज्यादा कीमती थी। उनके शरीर की खुशबू अब मेरे रोम-रोम में बस चुकी थी, और हम दोनों जानते थे कि ऑफिस की ये गुप्त फाइलें अब हर रोज इसी तरह खोली और खोदी जाएंगी।